अर्थव्यवस्था में मजबूती का दौर जारी
SBI की एक रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में भारत की GDP ग्रोथ 8.1% रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा पूरे FY26 के लिए पहले लगाए गए 7.4% के अनुमान से काफी बेहतर है। इस शानदार बढ़ोतरी का मुख्य श्रेय देश की मजबूत डोमेस्टिक डिमांड को जाता है, जिसने आर्थिक गतिविधियों को गति दी है। ग्रामीण और शहरी दोनों ही इलाकों में खपत में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है, जो कि कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में सकारात्मक रुझानों और फिस्कल स्टिमुलस (Fiscal Stimulus) का नतीजा है। यह डोमेस्टिक स्ट्रेंथ ग्लोबल इकोनॉमी की सुस्ती के सामने एक मजबूत सहारा बनकर उभरी है।
आंकड़ों का बदलाव और वैश्विक परिदृश्य
अब सभी की निगाहें 27 फरवरी को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation) द्वारा जारी होने वाले FY26 के दूसरे एडवांस एस्टिमेट्स पर टिकी हैं। इसी के साथ, पिछले तीन फाइनेंशियल ईयर के GDP आंकड़े भी नई बेस ईयर 2022-23 के हिसाब से रिवाइज किए जाएंगे, जो कि मौजूदा 2011-12 की बेस ईयर से अलग है। इस बदलाव का मकसद भारतीय अर्थव्यवस्था की बदलती संरचना, खासकर बढ़ते डिजिटल कॉमर्स और सेवा क्षेत्र को बेहतर ढंग से दर्शाना है। हालांकि, इस मेथडोलॉजिकल बदलाव से पिछले आंकड़ों की तुलना करना जटिल हो सकता है। वहीं, वैश्विक अर्थव्यवस्था की बात करें तो 2026 में इसके 2.7% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो कि महामारी-पूर्व स्तरों से काफी कम है। डेवलपिंग मार्केट्स (Emerging Markets) को भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक मसलों और टैरिफ जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
विभिन्न संस्थाओं के अनुमान
भारत की GDP ग्रोथ को लेकर अलग-अलग संस्थाओं के अनुमानों में थोड़ा अंतर है। IMF ने FY26 के लिए 6.4%, वर्ल्ड बैंक ने 7.2% और यूरोमॉनिटर ने 2026 के लिए 6.9% का अनुमान जताया है। वहीं, RBI का अनुमान FY26 के लिए 7.4% है। ऐसे में SBI का Q3 के लिए 8.1% का अनुमान तिमाही स्तर पर मजबूत प्रदर्शन का संकेत देता है।
जोखिम और चिंताएं
चमकीले आंकड़ों के बावजूद, कुछ चिंताएं भी हैं। शहरी खपत का फिस्कल स्टिमुलस पर निर्भर रहना एक कमजोरी है, और ऐसे किसी भी सपोर्ट में कमी से मांग प्रभावित हो सकती है। ग्लोबल अनिश्चितताएं, व्यापारिक तनाव और संभावित टैरिफ भारत के निर्यात प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। FY26 में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स (Merchandise Exports) में लगभग 1% की गिरावट का अनुमान है। महंगाई (Inflation) की बात करें तो अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान यह औसतन 1.7% रही है, लेकिन RBI ने भू-राजनीतिक अस्थिरता, ऊर्जा की कीमतों और मौसम संबंधी घटनाओं के कारण इसके बढ़ने का जोखिम जताया है। FY26 के लिए सालाना महंगाई का अनुमान 2.1% है, जबकि Q4 FY26 में यह 3.2% तक जा सकती है।
आगे का रास्ता
27 फरवरी को जारी होने वाले दूसरे एडवांस GDP एस्टिमेट्स से तस्वीर और साफ होगी। इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, FY27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। RBI को भी FY27 की पहली और दूसरी तिमाही में क्रमश: 6.9% और 7.0% ग्रोथ की उम्मीद है। Q3 का मजबूत प्रदर्शन दिखाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है, लेकिन बाहरी कारकों पर नजर रखना और रिवाइज्ड डेटा की व्याख्या करना महत्वपूर्ण होगा।