India's Population Surge: भारत की 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' बनेगी आर्थिक शक्ति या बनेगी आफत?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India's Population Surge: भारत की 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' बनेगी आर्थिक शक्ति या बनेगी आफत?
Overview

India की आबादी **2060s** तक बढ़ने का अनुमान है, जो इसे China, Europe और US जैसे देशों से बिल्कुल अलग खड़ा करता है, जहाँ आबादी या तो स्थिर हो रही है या घट रही है। यह जनसांख्यिकीय (demographic) बदलाव भारत को एक बड़ा 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' (demographic dividend) दे रहा है, जिसका मतलब है कि काम करने लायक उम्र की आबादी (working-age population) काफी बड़ी होगी। इससे आर्थिक विकास और मज़बूत लेबर पूल (labor pool) की उम्मीद जगी है। हालांकि, इस क्षमता का पूरा फायदा उठाने के लिए नौकरियों के अवसर पैदा करने, स्किल डेवलपमेंट (skill development) और इंफ्रास्ट्रक्चर (infrastructure) जैसी बड़ी चुनौतियों से निपटना होगा, वरना यह डिविडेंड एक बोझ बन सकता है।

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भारत की जनसांख्यिकीय बढ़त: दुनिया से अलग तस्वीर

संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुमानों के मुताबिक, India की आबादी 2060s की शुरुआत में लगभग 1.7 अरब तक पहुँचकर धीरे-धीरे घटने लगेगी। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में यह एक बिल्कुल अनोखी स्थिति है। इसकी तुलना में, China की आबादी सदी के अंत तक घटकर आधी यानी करीब 63.3 करोड़ रहने का अनुमान है। Europe में लगातार जनसंख्या घट रही है और आबादी बूढ़ी हो रही है। वहीं, America में अप्रवासियों (immigrants) की वजह से आबादी थोड़ी बढ़ रही है, लेकिन India जितनी बड़ी वृद्धि की संभावना नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि India के पास दुनिया की सबसे बड़ी काम करने लायक उम्र की आबादी (working-age population) होगी। इसे ही 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' कहा जाता है। यह बड़े पैमाने पर आर्थिक अवसर पैदा करता है, जैसे कि श्रम की उपलब्धता बढ़ना, बचत और निवेश दरें बढ़ना, और घरेलू खपत में वृद्धि। ये सब मिलकर GDP ग्रोथ को बढ़ावा दे सकते हैं और India को वैश्विक टैलेंट हब (global talent hub) बना सकते हैं। अनुमान है कि India की वर्किंग-एज पॉपुलेशन भविष्य में लंबे समय तक आर्थिक विकास को सहारा देगी, खासकर उन देशों के मुकाबले जिनकी लेबर फोर्स घट रही है।

दुनिया भर के देशों से तुलना: India बनाम बाकी

जनसंख्या के इन अलग-अलग रुझानों के आर्थिक प्रभाव बहुत बड़े हैं। India के लिए, काम करने लायक उम्र की बढ़ती आबादी (जो 2030 तक करीब 1 अरब हो सकती है) विकास की गति तेज करने का एक सुनहरा मौका है, बशर्ते पर्याप्त नौकरियाँ पैदा की जाएँ। युवा, अंग्रेजी बोलने वाले STEM ग्रेजुएट्स का बड़ा पूल IT और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में India को खास बढ़त देता है। यह जनसंख्यात्मक लाभ (population advantage) पहले से ही उन निवेशकों को आकर्षित कर रहा है जो एक बड़ी और प्रशिक्षित वर्कफोर्स की तलाश में हैं।
इसके बिल्कुल विपरीत, China की तेज़ी से बूढ़ी होती आबादी और घटती वर्किंग पॉपुलेशन गंभीर चुनौतियाँ पैदा कर रही है। 2011 और 2022 के बीच 5 करोड़ की कमी के साथ, कामकाजी आबादी में गिरावट से श्रम की कमी हो रही है और प्रति व्यक्ति GDP ग्रोथ 10% तक कम हो सकती है। इसी तरह, Europe की घटती वर्कफोर्स (जो 2060 तक औसतन 13% घटने की उम्मीद है) लगातार वर्कर की कमी और सामाजिक कार्यक्रमों पर दबाव से जूझ रही है। जबकि अमेरिका को अप्रवासियों से फायदा होता है, उसकी वृद्धि India की संभावित डेमोग्राफिक डिविडेंड जितनी बड़ी नहीं है। अमेरिकी विकास मुख्य रूप से विदेश-जन्मे श्रमिकों पर निर्भर है, जो इसकी लेबर फोर्स ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण हैं।

चुनौतियाँ: क्षमता को समृद्धि में कैसे बदलें?

भले ही India के पास जनसंख्यात्मक लाभ (population advantage) एक बड़ी ताकत है, लेकिन इस क्षमता को हासिल करना कोई गारंटी नहीं है और इसमें बड़े जोखिम भी शामिल हैं। सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती युवा आबादी के लिए पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नौकरियाँ पैदा करना है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि पढ़े-लिखे युवाओं में बेरोजगारी दर काफी ज़्यादा है, और कई लोग अपनी स्किल से मेल खाने वाली नौकरियाँ खोजने में संघर्ष कर रहे हैं। अगर नौकरियों का सृजन जनसंख्या वृद्धि से पीछे रह गया, तो यह डेमोग्राफिक डिविडेंड 'डेमोग्राफिक डिजास्टर' (demographic disaster) में बदल सकता है। इसके अलावा, महिलाओं की कार्यबल भागीदारी दर (female labor force participation rate) भी एक चिंता का विषय बनी हुई है, जो देश की आर्थिक शक्ति को सीमित करती है। China के विपरीत, जिसने अपनी जनसांख्यिकीय बढ़त का फायदा उठाते हुए तेज़ी से औद्योगीकरण किया, India के सामने दो बड़ी चुनौतियाँ हैं: अपनी युवा आबादी का बेहतर इस्तेमाल करना और शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट व इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश करना – ऐसे क्षेत्र जहाँ प्रगति मिली-जुली रही है। अमेरिका को अप्रवासियों से मदद मिलती है और यह बूढ़ी होती आबादी को संतुलित करता है, लेकिन India को अपनी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए घर में नौकरियाँ पैदा करने और स्किल्स को बेहतर बनाने पर ध्यान देना होगा।

आगे की राह

UN का अनुमान है कि India पूरी सदी तक दुनिया का सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश बना रहेगा। इस जनसंख्यात्मक लाभ (population advantage) का उपयोग करने के लिए, सरकार की ओर से स्मार्ट कदम उठाना बेहद ज़रूरी है। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश, श्रम सुधार (labor reforms) और महिलाओं की कार्यबल भागीदारी बढ़ाने के प्रयास महत्वपूर्ण हैं। इन कदमों के बिना, India अपनी जनसंख्यात्मक बढ़त को बर्बाद करने का जोखिम उठा सकता है, जैसा कि अन्य देशों ने जनसंख्या परिवर्तन को संभालने में संघर्ष किया है। आने वाले कुछ दशक यह तय करेंगे कि India अपनी बढ़ती आबादी को स्थायी आर्थिक संपत्ति में बदल पाता है या बढ़ती सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करता है।

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