'Invented in India' से नवाचार में बड़ी उछाल
भारत का इनोवेशन आउटपुट (Innovation Output) पिछले 2025-26 में तेजी से बढ़ा है। पेटेंट फाइलिंग 30.2% की छलांग लगाकर ऐतिहासिक 1,43,729 पर पहुंच गई है। यह लगातार 8वां साल है जब डबल-डिजिट ग्रोथ देखने को मिली है, जो देश के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (Intellectual Property) सिस्टम में लगातार हो रहे सुधार को दर्शाता है। घरेलू इनोवेशन अब हावी हो रहा है, जिसमें भारतीय आविष्कारक और संस्थाएं सभी फाइलिंग्स का 69% से अधिक हिस्सा रखती हैं। यह आंकड़ा पिछले सालों की तुलना में काफी बढ़ा है। तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र के इनोवेटर्स (Innovators) की अगुवाई में यह उछाल 'Made in India' से 'Invented in India' की ओर एक बड़े बदलाव का संकेत है, जो देश को एक ग्लोबल इनोवेशन हब के रूप में स्थापित कर रहा है। लगभग 95% फाइलिंग्स अब ऑनलाइन हो रही हैं, जो सरकारी प्रक्रियाओं के सुचारू होने का नतीजा है।
भारत की ग्लोबल पोजिशन और ग्रोथ के कारक
लगातार ग्रोथ के दम पर भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा पेटेंट फाइलर (Patent Filer) बन गया है। यह ग्रोथ IP (Intellectual Property) में व्यापक विस्तार का हिस्सा है, जिसमें FY25 में कुल IPR एप्लीकेशन्स (IPR Applications) 0.75 मिलियन के करीब पहुंचीं, जिनमें ट्रेडमार्क्स (Trademarks) और पेटेंट्स का बड़ा योगदान रहा। सरकार के प्रयासों, जैसे स्टार्टअप्स और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (Educational Institutions) के लिए फीस में कमी, तेज एग्जामिनेशन (Examination) और प्रो-बोनो (Pro Bono) सेवाएं, ने इस माहौल को बढ़ावा दिया है। खास बात यह है कि अकेले एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस ने FY26 में कुल फाइलिंग्स में 36.5% का योगदान दिया, जो इनोवेशन पर मजबूत एकेडमिक फोकस दिखाता है। ग्लोबल स्तर पर, चीन 1.8 मिलियन एप्लीकेशन्स के साथ पेटेंट फाइलिंग में सबसे आगे है, लेकिन 2024 में भारत की 19.1% की ग्रोथ रेट प्रमुख देशों में सबसे अधिक थी। यह एक बड़े स्ट्रक्चरल शिफ्ट (Structural Shift) का संकेत है, जहाँ पहले नॉन-रेसिडेंट्स (Non-residents) का दबदबा था, अब मेजॉरिटी फाइलिंग्स रेजिडेंट्स (Residents) द्वारा की जा रही हैं।
क्वालिटी पर सवाल: R&D खर्च कम और ग्रांट में देरी
फाइलिंग्स की भारी बढ़ोतरी के बावजूद, भारत के पेटेंट्स की क्वालिटी और इकोनॉमिक इम्पैक्ट (Economic Impact) पर सवाल बने हुए हैं। भारत का रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर कुल खर्च (GERD) GDP का लगभग 0.64% है, जो अमेरिका (~3.5%), चीन (~2.5%) और दक्षिण कोरिया (~5.21%) जैसे ग्लोबल लीडर्स की तुलना में काफी कम है। यह अंतर हाई-वैल्यू रिसर्च (High-Value Research) को सीमित करता है और एडवांस्ड सेक्टर्स (Advanced Sectors) में इम्पोर्टेड IP (Imported IP) पर निर्भरता बढ़ाता है। इसके अलावा, चार साल में पेटेंट फाइलिंग्स दोगुनी होने के बावजूद, ग्रांटेड पेटेंट्स (Granted Patents) उस गति से नहीं बढ़े हैं। FY25 में ग्रांट्स पिछले साल से कम रहे, जिसका एक कारण एग्जामिनर भर्ती में चुनौतियां भी हैं। फाइलिंग्स और ग्रांट्स के बीच यह अंतर एग्जामिनेशन सिस्टम की एफिशिएंसी (Efficiency) पर चिंताएं बढ़ाता है और सवाल उठाता है कि क्या फोकस सिर्फ संख्या बढ़ाने पर है, क्वालिटी पर नहीं। फॉरेन फर्म्स (Foreign Firms) अभी भी हाई-टेक पेटेंट्स का बड़ा हिस्सा प्राप्त कर रही हैं, जो डोमेस्टिक (Domestic) स्तर पर कमर्शियलाइज़ेशन (Commercialization) और वैल्यू रियलाइजेशन (Value Realization) में गैप का संकेत देता है। पेटेंट एग्जामिनेशन पीरियड, हालांकि कम हुए हैं, पर ग्लोबल पीयर्स (Global Peers) की तुलना में अभी भी एक चुनौती बने हुए हैं।
नॉलेज इकॉनमी की राह
भारत का लक्ष्य 2047 तक 'विकसित भारत@2047' (Viksit Bharat@2047) के एजेंडे के अनुरूप साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का ग्लोबल हब बनना है। 'अनुसन्धान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन' (Anusandhan National Research Foundation - ANRF) जैसी पहलें और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Infrastructure) एक अधिक इंटीग्रेटेड इनोवेशन इकोसिस्टम (Integrated Innovation Ecosystem) बनाने का लक्ष्य रखते हैं। पेटेंट फाइलिंग्स में लगातार ग्रोथ, खासकर डोमेस्टिक स्रोतों से, एक मजबूत इनोवेशन बेस का संकेत देती है। इस पोटेंशियल को हासिल करने के लिए लगातार पॉलिसी सपोर्ट (Policy Support), R&D इन्वेस्टमेंट (R&D Investment) में भारी बढ़ोतरी और इनोवेशन को मूर्त इकोनॉमिक वैल्यू (Economic Value) व ग्लोबल एडवांटेज (Global Advantage) में बदलने पर मजबूत फोकस की आवश्यकता होगी।