भारतीय कंपनियों का विदेशी निवेश रिकॉर्ड ₹26.7 अरब पार, पर रफ़्तार हुई धीमी!

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
भारतीय कंपनियों का विदेशी निवेश रिकॉर्ड ₹26.7 अरब पार, पर रफ़्तार हुई धीमी!
Overview

साल 2025-26 में भारतीय कंपनियों का विदेश में सीधा निवेश (Overseas Direct Investment - ODI) **₹26.7 अरब** डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह पिछले साल के मुकाबले एक बड़ी छलांग है, लेकिन यह भी सच है कि निवेश बढ़ाने की रफ़्तार पहले से धीमी रही है।

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रिकॉर्ड आउटफ्लो, पर धीमी हुई ग्रोथ

वित्त मंत्रालय के अनुसार, भारतीय कंपनियों का यह विदेशी निवेश (ODI) आउटफ्लो फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में रिकॉर्ड ₹26.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह साल 2023-24 के ₹14.5 अरब डॉलर की तुलना में 84% ज़्यादा है। लेकिन, इन आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि साल 2025-26 में निवेश की रफ़्तार पिछले साल की तुलना में धीमी रही। इस साल यह रफ़्तार करीब 10.3% रही, जबकि पिछले साल यानी 2024-25 में यह 67% की शानदार बढ़ोतरी से बढ़ी थी।

इक्विटी और लोन का दबदबा, सिंगापुर सबसे बड़ा डेस्टिनेशन

निवेश के तरीके की बात करें तो, इक्विटी (Equity) में निवेश सबसे ज़्यादा रहा, जो ₹18.6 अरब डॉलर से ऊपर गया। इसके अलावा, कंपनियों ने लोन (Loan) के ज़रिए भी ₹8 अरब डॉलर से ज़्यादा का निवेश किया है। सबसे ज़्यादा निवेश सिंगापुर में हुआ, जहां ₹7.6 अरब डॉलर पहुंचे। इसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) का नंबर आया, जहाँ ₹4 अरब डॉलर का निवेश किया गया। मॉरिशस (Mauritius) में भी ₹2.4 अरब डॉलर का निवेश पहुंचा।

वित्तीय सेवाओं का बोलबाला

सेक्टर की बात करें तो, 'वित्तीय, बीमा और व्यावसायिक सेवाएँ' (Financial, Insurance and Business Services) को सबसे बड़ा हिस्सा मिला, जिसमें ₹11 अरब डॉलर से ज़्यादा का निवेश हुआ। इसके अलावा, मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) सेक्टर में ₹4.6 अरब डॉलर और व्यापार/हॉस्पिटैलिटी (Trade/Hospitality) सेक्टर में ₹3 अरब डॉलर का निवेश देखा गया।

सरकारी नियमों से मिली मदद

इस विदेशी निवेश को बढ़ावा देने में सरकार की Foreign Exchange Management (Overseas Investment) Rules, 2022 का बड़ा हाथ है। इन नियमों ने विदेशी निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाया है। अब भारतीय कंपनियाँ अपनी नेट वर्थ (Net Worth) का 400% तक ऑटोमेटिक रूट (Automatic Route) से निवेश कर सकती हैं। व्यक्तिगत निवेशकों के लिए, लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत सालाना $250,000 की सीमा बनी हुई है।

ग्लोबल इकोनॉमी और बाज़ार की स्थिति

यह सब तब हो रहा है जब ग्लोबल इकोनॉमी मिली-जुली तस्वीर पेश कर रही है। महंगाई (Inflation) और तेल की कीमतों में उठापटक बनी हुई है। भारतीय शेयर बाज़ार (Share Market) भी थोड़ा सावधान दिख रहा है, जहाँ मई 2026 की शुरुआत में BSE Sensex और Nifty 50 करीब 77,000-77,500 के स्तर पर कारोबार कर रहे थे। वहीं, रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर करीब 95 के स्तर पर आ गया है, जो वैश्विक करेंसी के उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक घटनाओं से प्रभावित है।

निवेश के सामने चुनौतियाँ

हालांकि, विदेशी निवेश की रफ़्तार में आई यह कमी संकेत दे सकती है कि ग्लोबल आर्थिक दबाव और भू-राजनीतिक जोखिमों के चलते कंपनियाँ थोड़ी ज़्यादा सावधानी बरत रही हैं। सिंगापुर और मॉरिशस जैसे लोकप्रिय डेस्टिनेशन (Destinations) के इस्तेमाल से अंतिम निवेशक को ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है। भारतीय कंपनियों को रियल एस्टेट या जुए जैसे प्रतिबंधित क्षेत्रों में निवेश न करने के नियमों का भी पालन करना होता है। रुपये में गिरावट से करेंसी रिस्क (Currency Risk) बढ़ जाता है, जिससे विदेशी संपत्ति की लागत बढ़ सकती है।

भविष्य का नज़रिया

आगे चलकर, उम्मीद है कि विदेशी निवेश बढ़ता रहेगा, लेकिन यह वैश्विक आर्थिक स्थिरता और सरकारी समर्थन पर निर्भर करेगा। 2022 के आसान नियमों से भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अपनी पैठ बनाने में मदद मिलेगी। कंपनियों की कमाई, भू-राजनीतिक घटनाएँ और केंद्रीय बैंकों की नीतियाँ भविष्य के रुझानों को तय करेंगी। ग्लोबल वैल्यू चेन (Global Value Chains) का हिस्सा बनने और नए बाज़ारों में प्रवेश करने की चाहत भारतीय कंपनियों को आगे बढ़ाती रहेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.