FY26 (वित्तीय वर्ष 2025-26) में भारतीयों द्वारा विदेश भेजे गए पैसों में **2%** की मामूली गिरावट आई है, जो कुल **$28.95 बिलियन** रहा। हालांकि, ट्रैवल और शिक्षा पर खर्च कम हुआ, लेकिन विदेशी इक्विटी, डेट और डिपॉजिट में इन्वेस्टमेंट **43.7%** बढ़कर **$28.95 बिलियन** तक पहुंच गया।
क्या हुआ?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-2026 में भारत से बाहर भेजे जाने वाले रेमिटेंस (Outward Remittances) में मामूली गिरावट देखी गई है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत व्यक्तियों द्वारा विदेश भेजे गए कुल धन $28.95 बिलियन रहा। यह पिछले वित्तीय वर्ष (FY 2024-2025) में दर्ज $29.56 बिलियन की तुलना में 2% की कमी है।
LRS एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क है जो भारत में रहने वाले व्यक्तियों को शिक्षा, यात्रा, चिकित्सा उपचार और निवेश सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए हर साल एक निश्चित राशि विदेश भेजने की अनुमति देता है। इस स्कीम के तहत वर्तमान वार्षिक सीमा प्रति व्यक्ति $250,000 है।
खर्च में बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
कुल रेमिटेंस संख्या में आई यह मामूली गिरावट मुख्य रूप से दो प्रमुख श्रेणियों: अंतरराष्ट्रीय यात्रा और विदेशी शिक्षा पर खर्च में कमी के कारण है। ये दोनों क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से भारतीयों द्वारा विदेश भेजे जाने वाले धन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।
हालांकि, व्यवहार में एक स्पष्ट बदलाव देखा गया है। यात्रा और शिक्षा के लिए उपभोग-आधारित रेमिटेंस धीमे हो गए, जबकि धन सृजन (Wealth Creation) और वैश्विक संपत्ति आवंटन (Global Asset Allocation) की ओर निर्देशित धन में तेज वृद्धि हुई। यह दर्शाता है कि भारतीय व्यक्ति विदेशी इक्विटी, डेट और बैंक जमा जैसी संपत्तियों को भारत के बाहर रखकर अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए तेजी से देख रहे हैं।
निवेश रेमिटेंस में उछाल
FY26 के आंकड़ों में सबसे उल्लेखनीय रुझान निवेश के उद्देश्यों के लिए विदेश भेजे गए धन में 43.7% की साल-दर-साल वृद्धि है। वित्तीय वर्ष के अंत की ओर यह तेजी और अधिक स्पष्ट हो गई।
उदाहरण के लिए, मार्च 2026 में, निवेश के लिए रेमिटेंस $440.22 मिलियन तक पहुंच गया, जो मार्च 2025 में इसी उद्देश्य के लिए दर्ज $306.30 मिलियन से काफी अधिक है। मासिक रुझान भी इस गति की पुष्टि करता है, जिसमें जनवरी 2026 में $178.86 मिलियन से फरवरी में $265.99 मिलियन और फिर मार्च 2026 में $440.22 मिलियन तक निवेश रेमिटेंस में वृद्धि देखी गई। यह डेटा बताता है कि भारतीय बचतकर्ता सक्रिय रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पूंजी डाल रहे हैं।
विदेशी प्रॉपर्टी में घटती रुचि
जहां इक्विटी और डेट जैसी वित्तीय संपत्तियों में निवेश बढ़ा है, वहीं विदेश में अचल संपत्ति (Immovable Property) खरीदने में रुचि विपरीत दिशा में चली गई है। मार्च 2026 के आंकड़े बताते हैं कि विदेशी संपत्ति की खरीद के लिए $38.68 मिलियन भेजे गए, जो मार्च 2025 में इसी उद्देश्य के लिए भेजे गए $45.10 मिलियन की तुलना में 14.2% की गिरावट है। 2026 की पहली तिमाही के दौरान रुझान में लगातार गिरावट देखी गई, जो उच्च लागत, ब्याज दरों या बदलती भावना का संकेत देता है, जो अंतरराष्ट्रीय रियल एस्टेट की भूख को प्रभावित कर सकता है।
आगे क्या देखना चाहिए?
इस बदलाव के बाद निवेशक और बाजार पर्यवेक्षक कई कारकों पर नजर रख सकते हैं। पहला, भारतीय रुपये की मजबूती एक प्रमुख निगरानी बिंदु बनी हुई है, क्योंकि उच्च आउटवर्ड रेमिटेंस विदेशी मुद्रा की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। दूसरा, निवेशकों को LRS के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक से किसी भी नियामक अपडेट पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि केंद्रीय बैंक मुद्रा स्थिरता को प्रबंधित करने के लिए इन प्रवाहों की आवधिक समीक्षा करता है। अंत में, इस निवेश प्रवृत्ति की स्थिरता संभवतः वैश्विक बाजार के प्रदर्शन और स्थानीय प्लेटफार्मों के माध्यम से विदेशी संपत्तियों में निवेश की आसानी पर निर्भर करेगी, जो हाल के वर्षों में अधिक सुलभ हो गए हैं।
