ग्रोथ के आंकड़ों का मायाजाल
इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) के लिए नए बेस ईयर (2022-23) को अपनाने से पुराने आंकड़ों से सीधी तुलना करना मुश्किल हो गया है। अप्रैल में 4.9% की ग्रोथ भले ही 3.9% के मार्केट अनुमान से काफी अच्छी दिख रही हो, लेकिन यह📈 नंबर कई अस्थिर फैक्टर्स पर टिका है। हाल ही में वेस्ट एशिया के तनाव के कारण प्रभावित रही नेचुरल गैस सप्लाई में सुधार ने आउटपुट को मार्च की तुलना में कृत्रिम रूप से बढ़ाया है। इसके अलावा, भविष्य में सप्लाई चेन की संभावित दिक्कतों से बचने के लिए मैन्युफैक्चरर्स ने प्रोडक्शन को आगे खिसका दिया है, यानी अगले क्वार्टर की डिमांड को अभी ही पूरा कर लिया है। ऐसे में, यह सवाल उठता है कि क्या यह औद्योगिक रिकवरी वाकई टिकाऊ है?
GVA और IIP के बीच बढ़ता अंतर
नए IIP फ्रेमवर्क में एक और चिंताजनक बात यह है कि यह इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) और ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) के बीच बढ़ते अंतर को उजागर कर रहा है। नए आंकड़ों के मुताबिक, कैपिटल गुड्स (पूंजीगत सामान) में मजबूत ग्रोथ दिख रही है, जो काफी हद तक सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च का नतीजा है। लेकिन, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं) का ट्रेंड कुछ और ही कहानी कह रहा है, जो शहरी खपत में नरमी का संकेत देता है। इसका मतलब है कि इंडस्ट्रियल सेक्टर दो हिस्सों में बंट गया है: एक तरफ पब्लिक सेक्टर का निवेश मुख्य इंजन बना हुआ है, तो दूसरी तरफ प्राइवेट कंज्यूमर सेगमेंट थका हुआ दिख रहा है। HSBC के एनालिस्ट्स का कहना है कि जैसे-जैसे इक्विटी मार्केट से मिलने वाला रिटर्न सामान्य हो रहा है, वेल्थ इफेक्ट (धन प्रभाव) से शहरी मांग को पहले जो सहारा था, वह कम हो रहा है, जिससे कंज्यूमर-फेसिंग मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट पर और दबाव बढ़ेगा।
आगे के जोखिमों का आकलन
फाइनेंशियल ईयर (FY) 25 और FY26 के लिए ग्रोथ के ऊंचे अनुमानों पर निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। भले ही नई मेथोडोलॉजी, जिसमें 463 आइटम ग्रुप्स और रिन्यूएबल इलेक्ट्रिसिटी को शामिल किया गया है, अर्थव्यवस्था का अधिक आधुनिक रूप दिखाती है, लेकिन यह चेन-लिंक्ड इंडेक्सिंग के जरिए काफी अस्थिरता भी पैदा करती है। IIP मैन्युफैक्चरिंग और नेशनल GVA के बीच कमजोर कोरिलेशन (संबंध) यह बताता है कि मौजूदा औद्योगिक रिपोर्टिंग असल आर्थिक लाभप्रदता से अलग हो सकती है। इसके अलावा, प्राइवेट सेक्टर की सुस्ती की भरपाई के लिए सरकारी कैपिटल एक्सपेंडिचर पर निर्भरता एक फिस्कल निर्भरता पैदा करती है। अगर सरकार अपने डेफिसिट टारगेट को पूरा करने के लिए खर्च कम करती है, तो प्राइवेट मैन्युफैक्चरिंग में लचीलेपन की कमी के कारण औद्योगिक आउटपुट में तेज गिरावट आ सकती है। मौजूदा डेटा डिमांड-साइड प्रोडक्टिविटी में किसी बड़े बदलाव के बजाय सप्लाई-साइड एडजस्टमेंट की एक तस्वीर पेश करता है।
