मार्च में महंगाई दर रही कम
मार्च महीने में भारत की ओवरऑल महंगाई दर (Overall Inflation) कम बनी रही। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में पिछले महीने की तुलना में सिर्फ 0.26% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो जनवरी के इजाफे से भी कम है। इसका मतलब है कि देश में ज्यादातर गुड्स (Goods) और सर्विसेज (Services) की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है। खाने-पीने की चीजों, कपड़ों, हेल्थ सर्विसेज और ट्रांसपोर्ट (Transport) जैसी कैटेगरीज में कीमतों में खास बढ़ोतरी देखने को नहीं मिली।
जियोपॉलिटिकल टेंशन से एनर्जी कीमतों में उछाल
हालांकि, खास तौर पर मिडिल ईस्ट (Middle East) में चल रहे जियोपॉलिटिकल (Geopolitical) टेंशन के चलते एनर्जी (Energy) सेक्टर्स में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। हाउसिंग, यूटिलिटीज और फ्यूल्स (Fuels) से जुड़ी कैटेगरीज में 0.6% का इजाफा हुआ। इसका मुख्य कारण एलपीजी (LPG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (Piped Natural Gas) के दामों में 3.61% की बड़ी बढ़ोतरी रही। पेट्रोल और डीजल जैसे लिक्विड फ्यूल्स (Liquid Fuels) की कीमतों में भी 1.56% का मंथली जंप आया। यह उछाल तब आया जब सरकार और ऑयल कंपनियों ने ग्लोबल क्रूड ऑयल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों का असर कम करने की कोशिश की।
एनालिस्ट्स (Analysts) की चिंता: अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
एक्सपर्ट्स (Experts) का मानना है कि अगर यह जियोपॉलिटिकल टेंशन बरकरार रहा, तो ये बढ़ी हुई एनर्जी की कीमतें जल्द ही भारतीय अर्थव्यवस्था के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकती हैं। एग्रीकल्चर (Agriculture), केमिकल्स (Chemicals), एफएमसीजी (FMCG) और पेंट्स (Paints) जैसी इंडस्ट्रीज के ऑपरेटिंग कॉस्ट (Operating Cost) में इजाफा हो सकता है। इसके अलावा, ट्रांसपोर्ट (Transport) के बढ़ते खर्चों से कई प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ेंगे, जिससे ओवरऑल इन्फ्लेशन (Inflation) में बढ़ोतरी हो सकती है और आम आदमी की परचेजिंग पावर (Purchasing Power) कम हो सकती है।