भारत का निवेश पहेली: मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ धीमी, नौकरियों पर खतरा

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत का निवेश पहेली: मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ धीमी, नौकरियों पर खतरा
Overview

पूर्व NITI Aayog उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि सरकारी सुधारों के बावजूद प्राइवेट निवेश सुस्त बना हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी है कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ पिछले एक दशक से नौकरियों के लिए बहुत धीमी रही है, जिससे देश के डेमोग्राफिक एडवांटेज पर खतरा मंडरा रहा है। कुमार ने निवेश को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने और अधिक अनुमानित नियमों को सुनिश्चित करने के लिए नीति में बदलाव का आह्वान किया।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

भारत की निवेश पहेली: प्राइवेट खर्च में कमी, मैन्युफैक्चरिंग को चाहिए बूस्ट

NITI Aayog के पूर्व वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने प्राइवेट सेक्टर की पूंजीगत खर्च (capital spending) में लगातार आ रही सुस्ती को एक बड़ी 'पहेली' करार दिया है। सरकार के व्यवसायिक माहौल और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के प्रयासों के बावजूद, प्राइवेट निवेश उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ा है। पिछले दस सालों से प्राइवेट कॉर्पोरेट निवेश भारत के GDP का लगभग 12% ही रहा है, और फाइनेंशियल ईयर 2024 में ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) में इसकी हिस्सेदारी एक दशक के निचले स्तर 33% पर आ गई। कुमार ने स्पष्ट नीतिगत दिशा की कमी और जमीन पर 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (ease of doing business) के बेहतर न होने को प्राइवेट निवेश में रुकावट के मुख्य कारण बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकारों की भूमिका इसमें अहम है, उन्हें निवेश को बढ़ावा देने के लिए सिर्फ 'नियामक' (regulatory) से हटकर सक्रिय रूप से 'प्रमोशनल' (promotional) बनना होगा।

नौकरियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ नाकाफी

कुमार की चिंताएं भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से भी जुड़ी हैं। पिछले बारह सालों से, मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ सालाना मामूली 3% से 3.5% के बीच रही है। यह दर हर साल वर्कफोर्स में शामिल हो रहे युवाओं की बड़ी संख्या को रोजगार देने के लिए पर्याप्त नहीं है। इस धीमी प्रगति से भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड (demographic dividend) खतरे में पड़ सकता है, क्योंकि GDP में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा 16-17% पर ही अटका हुआ है, जो 25% के लक्ष्य से काफी कम है। 'मेक इन इंडिया' (Make in India) और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम्स जैसी पहलें शुरू होने के बावजूद, वे जरूरी पैमाने पर रोजगार पैदा नहीं कर पाई हैं। वैश्विक मर्चेंडाइज ट्रेड (global merchandise trade) में भी भारत की हिस्सेदारी दशकों से लगभग 2% पर स्थिर है।

PLI स्कीम्स के मिले-जुले नतीजे, नीति की निश्चितता है ज़रूरी

प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम्स ने कुछ खास क्षेत्रों, जैसे बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में सफलता दिखाई है, जिससे भारत मोबाइल फोन एक्सपोर्टर बना है। जून 2024 तक, इन स्कीम्स ने काफी निवेश आकर्षित किया और 8.5 लाख से अधिक नौकरियां पैदा कीं। हालांकि, समग्र मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी भी पर्याप्त रोजगार पैदा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। कुमार का नीति की निश्चितता (policy predictability) पर जोर देना महत्वपूर्ण है, क्योंकि दीर्घकालिक औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए एक स्थिर नियामक वातावरण आवश्यक है। भारत की 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' रैंकिंग में सुधार हुआ है, लेकिन विभिन्न राज्यों के नियमों के कारण जमीनी हकीकत अभी भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

विकास की राह:

कम प्राइवेट पूंजीगत खर्च और मैन्युफैक्चरिंग में नौकरियों की कमी से निपटने के लिए, कुमार का सुझाव है कि मोबाइल फोन उत्पादन में देखी गई सफलता के समान, एंकर निवेशकों के साथ प्रमुख एक्सपोर्ट-उन्मुख क्षेत्रों की पहचान की जाए और उन्हें समर्थन दिया जाए। सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के लिए उत्पादों की पहचान करने और निर्यात बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसमें मार्केट एक्सेस के लिए ट्रेड एग्रीमेंट्स का उपयोग किया जा रहा है। बिजनेस प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए सुधार भी चल रहे हैं। हालांकि, स्थायी विकास के लिए पब्लिक खर्च से परे पूंजी निर्माण (capital formation) को बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि प्राइवेट निवेश को प्रोत्साहित किया जा सके, जो कमजोर मांग, नीतिगत अनिश्चितता और व्यापारिक भरोसे की कमी के कारण बाधित हुआ है। अधिक प्रमोशनल दृष्टिकोण अपनाने और निश्चित नीतियों को सुनिश्चित करना भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को खोलने और उसकी रोजगार की जरूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.