क्या हैं FDI नियम और क्यों हैं ये 'खराब'?
जाने-माने अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने भारत के निवेश के माहौल पर चिंता जताते हुए इसे 'बहुत खराब' करार दिया है। उनका मानना है कि यही वजह है कि विदेशी और घरेलू, दोनों तरह का पैसा भारत से दूर जा रहा है। भल्ला ने खासतौर पर 2017 के फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) पॉलिसी का जिक्र किया। इस पॉलिसी के तहत, भारत में निवेश से जुड़े विवादों को अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन (अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता) के बजाय भारत के भीतर ही सुलझाना होता है। भल्ला का कहना है कि यह नियम दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता और यह दर्शाता है कि भारत की कानूनी व्यवस्था अभी विकसित देशों के स्तर पर नहीं पहुंची है।
उन्होंने अनुमान लगाया है कि इस नियम के साथ-साथ 2017 से द्विपक्षीय निवेश संधियों (Bilateral Investment Treaties - BITs) के निलंबन के कारण भी FDI में आई 30% की गिरावट में योगदान मिला है।
धीमी ग्रोथ का बढ़ता खतरा
भल्ला को इस बात की भी चिंता है कि भारत की धीमी आर्थिक ग्रोथ, गरीबी कम करने की दिशा में हुई प्रगति को खतरे में डाल सकती है। उनका मानना है कि हाल की चुनावी जीतों के कारण सरकार शायद आत्मसंतोष में आ गई है और जरूरी सुधारों में देरी कर रही है। भल्ला ने कहा, "अगर ग्रोथ इसी तरह धीमी रही, तो गरीबी भी हमारी समस्या बन जाएगी।" उन्होंने लगातार अच्छी ग्रोथ की जरूरत पर जोर दिया।
वैश्विक दबाव और घरेलू चिंताएं
भल्ला का यह आकलन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों से तेल आपूर्ति में बाधाएं आ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संभावित वैश्विक आपदाओं के बारे में आगाह किया है जो गरीबी उन्मूलन के प्रयासों को पलट सकती हैं। इन वैश्विक मुद्दों के बावजूद, भल्ला का मानना है कि भारत की अत्यधिक गरीबी की स्थिति कुछ हद तक स्थिर बनी हुई है, जिसका एक कारण खाद्य सब्सिडी भी है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कुछ सब्सिडी को कम किया जा सकता है, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था काफी व्यापक है।
