लागत का बोझ ग्राहकों पर
एजेंसी का मानना है कि कंपनियां धीरे-धीरे ऊर्जा, ट्रांसपोर्टेशन और कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डालना शुरू कर देंगी। हालांकि अभी ग्राहकों को इसका पूरा असर महसूस नहीं हो रहा है, लेकिन आने वाले समय में कीमतें बढ़ सकती हैं।
खाद्य महंगाई में तेजी
खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों की महंगाई दर अप्रैल में बढ़कर 4.0% पर पहुंच गई, जबकि कुल खाद्य महंगाई 4.2% रही। खासकर, वेजिटेबल ऑयल्स (खाद्य तेल) की कीमतों में 10.7% की भारी बढ़ोतरी देखी गई, जो जुलाई 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। इसका सीधा संबंध पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी ग्लोबल कीमतों से है।
कृषि उत्पादन पर खतरा
सब्जियों की कीमतें पहले से ही ऊंची बनी हुई हैं, खासकर टमाटर के दाम चिंता का विषय हैं। Crisil ने आगाह किया है कि अगर मानसून कमजोर रहा, एल नीनो (El Niño) की स्थिति बनी, या फिर भीषण गर्मी का दौर जारी रहा, तो कृषि उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। इससे आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
ईंधन और कोर इन्फ्लेशन
बिजली, गैस और अन्य ईंधन की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है, जिसका एक कारण पिछले साल की तुलना में आसान बेस और एलपीजी (LPG) कीमतों में स्थिरता है। हालांकि, यह भी कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट बढ़ने पर ईंधन संबंधी महंगाई फिर बढ़ सकती है। कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) के रुझान मिले-जुले हैं। उदाहरण के लिए, कंपनियों द्वारा आयातित इनपुट की बढ़ी हुई कीमतें ग्राहकों पर डालने के कारण घरेलू साज-सज्जा और रखरखाव की लागत बढ़ी है। वहीं, बढ़ी हुई कमर्शियल एलपीजी (LPG) लागत ग्राहकों पर डालने से रेस्टोरेंट और होटल के दामों में भी काफी इजाफा हुआ है।
कीमती धातुओं से राहत
इसके विपरीत, सोना, हीरा और प्लैटिनम जैसी कीमती धातुओं की महंगाई में नरमी आई है, क्योंकि ग्लोबल कीमतें हाल की ऊंचाई से गिरी हैं। यह कुछ हद तक महंगाई के बढ़ते दबाव को कम करने में मदद कर रहा है।
रिजर्व बैंक की नजर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (Monetary Policy Committee) से उम्मीद की जा रही है कि वह अपनी अगली समीक्षा बैठक में ब्याज दरों और अपनी पॉलिसी की दिशा में कोई बदलाव नहीं करेगी। केंद्रीय बैंक भविष्य की किसी भी नीतिगत समायोजन के लिए महंगाई के रुझानों पर बारीकी से नजर रखेगा।
