मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन
फरवरी 2026 में भारत के औद्योगिक उत्पादन (IIP) में जो 5.2% की बढ़ोतरी देखी गई, उसके पीछे सबसे बड़ा हाथ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का रहा। इस सेक्टर ने 6% की जबरदस्त रफ़्तार पकड़ी, जो पिछले महीने के 5.3% के मुकाबले एक बड़ी छलांग है। यह दर्शाता है कि भारतीय कारखानों में उत्पादन काफी मज़बूत रहा है और डिमांड अच्छी है।
बाकी सेक्टरों में सुस्ती का असर
हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग की इस तेज़ी के बावजूद, अन्य प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में ग्रोथ धीमी रही। बिजली उत्पादन (Power Generation) की ग्रोथ फरवरी में घटकर मात्र 2.3% रह गई, जबकि जनवरी में यह 5.1% थी। माइनिंग सेक्टर की ग्रोथ भी पिछले महीने के 4.3% से घटकर 3.1% पर आ गई। इन विपरीत रुझानों से पता चलता है कि औद्योगिक रिकवरी अभी भी एक समान नहीं है।
ग्लोबल Trends और महंगाई
यह मैन्युफैक्चरिंग की मज़बूती वैश्विक परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) में 54.2 के आंकड़े से भी दिखाई देती है। लेकिन, ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग सेंटीमेंट मिले-जुले हैं।
दूसरी ओर, मार्च 2026 में महंगाई लगभग 5.5% पर बनी हुई है। ऐसे में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मुख्य ब्याज दर 6.75% पर बरकरार रखी है, लेकिन वह महंगाई पर कड़ी नज़र रखे हुए है।
अंदरूनी चुनौतियां और भविष्य
पावर सेक्टर में सुस्ती के पीछे पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर और ईंधन सप्लाई की समस्याएँ हो सकती हैं, जबकि माइनिंग सेक्टर में पर्यावरण मंजूरी और रेगुलेटरी बाधाएं प्रमुख चिंताएं हैं। 2025 के अंत में IIP में ऐसे ही मिले-जुले रुझानों ने निफ्टी 50 में गिरावट का संकेत दिया था। विश्लेषकों को 2026 के लिए 6.5-7% की आर्थिक ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन टिकाऊ विकास के लिए पावर और माइनिंग सेक्टर में सुधार के साथ-साथ महंगाई पर नियंत्रण ज़रूरी होगा।