भारत में इंडिविजुअल इनकम टैक्स फाइलिंग का आंकड़ा 8.09 करोड़ के पार पहुँच गया है, जो कि FY14 के 3.05 करोड़ से काफी ज़्यादा है। कुल टैक्सपेयर्स की संख्या तो बढ़ी ही है, लेकिन ₹10 लाख से ज़्यादा सालाना कमाने वाले लोगों की संख्या में कई गुना इज़ाफ़ा हुआ है।
टैक्स बेस में बड़ा उछाल
वित्त वर्ष 2025 में भारत में व्यक्तिगत आयकर रिटर्न (Individual Income Tax Returns) दाखिल करने वालों की संख्या 8.09 करोड़ से ज़्यादा हो गई है। यह एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि वित्त वर्ष 2014 में यह आंकड़ा सिर्फ 3.05 करोड़ था। पिछले 11 सालों में, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 5 करोड़ से ज़्यादा नए व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स जोड़े हैं, जिसका मतलब है कि हर साल औसतन लगभग 48 लाख फाइलिंग्स बढ़ी हैं।
अमीरों की संख्या बढ़ी, इनकम ब्रैकेट्स में बड़ा बदलाव
जहां एक तरफ टैक्स भरने वालों की कुल संख्या बढ़ी है, वहीं सबसे बड़ा बदलाव आय के खास ब्रैकेट्स में देखने को मिला है। साल 2016 में जहां 2.77 मिलियन (2.77 लाख) लोग 10 लाख से 50 लाख रुपये के बीच सालाना कमा रहे थे, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर 11.7 मिलियन (1.17 करोड़) हो गई। इस सेगमेंट में सालाना करीब 20% की दर से ग्रोथ देखी गई, जो कुल टैक्स फाइलर पॉपुलेशन की ग्रोथ से कहीं ज़्यादा है।
इसी तरह, 50 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच कमाने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या भी 1.72 लाख से बढ़कर 7.26 लाख हो गई। सबसे ज़्यादा कमाई करने वाले यानी 1 करोड़ से 100 करोड़ रुपये सालाना कमाने वालों की संख्या भी 4,467 से बढ़कर 16,337 हो गई।
टॉप अर्नर्स का ट्रेंड
खासकर कोरोना महामारी के बाद, देश के सबसे ज़्यादा कमाई करने वालों की संख्या में तेज़ी आई है। 100 करोड़ रुपये से ज़्यादा सालाना आय घोषित करने वाले लोगों की संख्या 2022 में 142 थी, जो 2026 तक बढ़कर 576 हो गई। यह दिखाता है कि आय में बढ़ोतरी और टैक्स का ढांचा, दोनों ही हाई-इनकम ब्रैकेट्स में बढ़ रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है मतलब?
यह डेटा भारत में आर्थिक गतिविधियों और डिस्पोजेबल इनकम के वितरण को समझने का एक अच्छा जरिया है। ज़्यादा आय वाले टैक्सपेयर्स का बढ़ना अक्सर प्रीमियम (Premium) प्रोडक्ट्स और फाइनेंशियल सर्विसेज की डिमांड को बढ़ाता है। मार्केट एनालिस्ट (Market Analysts) इन ट्रेंड्स पर नजर रखते हैं ताकि ऑटोमोबाइल, लग्जरी रिटेल (Luxury Retail) और बैंकिंग जैसे सेक्टर्स में डोमेस्टिक डिमांड (Domestic Demand) का अंदाजा लगा सकें।
आगे, वित्त वर्ष 2026 के आंकड़े ज़रूरी होंगे, जिनसे उम्मीद है कि मौजूदा ट्रेंड्स के चलते कुल फाइलर्स 9 करोड़ के करीब पहुँच सकते हैं।
