भारत की 'वर्चुअल साइकिल' और उसकी दूसरी तस्वीर
RBI डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता के मुताबिक, भारत की इकोनॉमी एक 'वर्चुअल साइकिल' में है, जहाँ तेज़ ग्रोथ मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता को बढ़ा रही है। पिछले 4 सालों में इकोनॉमी की ग्रोथ लगभग 7.7% सालाना रही है, जो 1980 के दशक के 5.7% की तुलना में काफी ज़्यादा है। पर कैपिटा इनकम 1981 में करीब $274 थी, जो अब बढ़कर $2,700 हो गई है और IMF के अनुमान के मुताबिक 2030 तक $4,346 तक पहुंच सकती है। Fiscal Responsibility and Budget Management और Goods and Services Tax जैसे रिफॉर्म्स ने ग्रोथ और स्थिरता में अहम भूमिका निभाई है। निवेशकों का भरोसा Nifty 50 के 21.0 के P/E रेश्यो में दिखता है।
राज्यों के बीच बढ़ती असमानता
भले ही आर्थिक ग्रोथ अब देश के ज़्यादातर राज्यों में फैल गई हो, लेकिन आमदनी बढ़ने की रफ़्तार हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ राज्यों की पर कैपिटा इनकम 20 साल में दस गुना बढ़ी है, तो वहीं कुछ में यह तीन गुना ही बढ़ पाई है। हाल के सालों में अमीर और गरीब राज्यों के बीच की खाई थोड़ी कम हुई है, लेकिन बड़े अंतर अभी भी मौजूद हैं।
ग्रोथ के रास्ते में आने वाले खतरे
भारत की ज़बरदस्त ग्रोथ के आगे कई चुनौतियां हैं। विदेशी एनर्जी पर हमारी निर्भरता हमें भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति संवेदनशील बनाती है। मिडिल ईस्ट के टेंशन ने तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंचा दीं, जिससे ट्रेड और फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) के बढ़ने का खतरा है। तेज़ औद्योगिकीकरण से पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ा है। इकोनॉमिक ग्रोथ के साथ-साथ सस्टेनेबल डेवलपमेंट (टिकाऊ विकास) को बैलेंस करना बहुत ज़रूरी है। हर साल 10 मिलियन नए युवा नौकरी बाजार में आ रहे हैं, जिसके लिए लगातार रोज़गार पैदा करना ज़रूरी है। यह काम महिलाओं की कम लेबर पार्टिसिपेशन और बड़े इनफॉर्मल सेक्टर की वजह से और भी मुश्किल हो जाता है। भारत का GDP पर कैपिटा $2,777 (मार्च 2025) है, जो डेवलप्ड देशों से काफी कम है और दुनिया में 149वें नंबर पर है (2026)। 19.1% (2025) का एक्सटर्नल डेट टू जीडीपी रेश्यो स्थिर है, लेकिन फाइनेंशियल वोलैटिलिटी के बीच इसे संभालना ज़रूरी है।
2047 तक की राह
FY27 के बाद भी ग्रोथ बनाए रखने के लिए भारत को तेज़ फैसले लेने होंगे और स्ट्रैटेजिक प्लानिंग करनी होगी। RBI महंगाई को 4% (2-6% बैंड) के टारगेट पर कंट्रोल करने में कामयाब रहा है, लेकिन एनर्जी प्राइस शॉक इसे बिगाड़ सकते हैं। वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि ग्लोबल स्थिरता रही तो FY27 में भारत की ग्रोथ 6.6% के आसपास रहेगी। 2047 तक एक हाई-इनकम इकॉनमी बनने के लिए सिर्फ GDP ग्रोथ ही काफी नहीं है, बल्कि इनकम इनइक्वालिटी (आय असमानता) को दूर करना, प्रोडक्टिविटी बढ़ाना, महिलाओं के लिए समावेशी रोज़गार पैदा करना और इन्वेस्टमेंट बढ़ाना भी ज़रूरी है। भारत का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि उसकी तेज़ आर्थिक रफ़्तार से सभी को फ़ायदा मिले।
