ग्रोथ की रफ्तार और बाहरी चुनौतियां
FY26 की जनवरी-मार्च तिमाही (Q4 FY26) के लिए भारत की आर्थिक रफ्तार उम्मीद से कहीं ज़्यादा मज़बूत नज़र आ रही है। SBI Research का अनुमान है कि इस तिमाही में GDP ग्रोथ 7.2% रहेगी, जिससे पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) के लिए ग्रोथ का अनुमान 7.5% पर बना हुआ है। यह ग्रोथ दुनिया की कई बड़ी इकोनॉमीज़ के मुकाबले काफी अच्छी है, जो कि मज़बूत डोमेस्टिक डिमांड, खासकर ग्रामीण और शहरी खपत के बूते संभव हुई है। लेकिन, इस चमक के पीछे कुछ ऐसे खतरे भी मंडरा रहे हैं जो आने वाले समय में मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।
बाहरी झटके और अनुमानों में कटौती
SBI Research ने FY26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) में GDP ग्रोथ 7.2% रहने का अनुमान जताया है। वहीं, पूरे फाइनेंशियल ईयर FY26 के लिए ग्रोथ 7.5% रहने की उम्मीद है। इसके साथ ही भारत दुनिया की प्रमुख इकोनॉमीज़ में सबसे तेज़ रफ़्तार वाली इकोनॉमी बना रहेगा। लेकिन, वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज़ी भारत के लिए एक बड़ी सिरदर्दी है। इन वजहों से इंपोर्ट बिल बढ़ रहा है और महंगाई (Inflation) का दबाव भी बढ़ रहा है। इन बाहरी झटकों को देखते हुए S&P Global, World Bank, Moody's और UBS जैसी कई इंटरनेशनल एजेंसियों ने FY27 के लिए ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 6.0% से 6.6% के बीच कर दिया है।
रुपए की कमजोरी और BoP पर दबाव
भारतीय रुपया (Indian Rupee) पिछले 12 महीनों में करीब 10.36% कमजोर हुआ है और एनालिस्ट्स का मानना है कि यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95-96 तक गिर सकता है। इसके पीछे ग्लोबल महंगाई, सख्त मॉनेटरी पॉलिसी और करीब $21 बिलियन जैसे बड़े इक्विटी आउटफ्लो को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है। रुपए की यह कमजोरी भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (BoP) पर दबाव बढ़ा रही है। कच्चे तेल, सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स के भारी इंपोर्ट की वजह से मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट (Merchandise Trade Deficit) लगातार बना हुआ है। वेस्ट एशिया संकट की वजह से करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) FY26 में 0.8% से बढ़कर FY27 में 2.2% तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट्स का कहना है कि इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने और एक्सपोर्ट बढ़ाने जैसे स्ट्रक्चरल बदलावों की ज़रूरत है।
क्रेडिट ग्रोथ जारी, पर धीमी पड़ने की उम्मीद
FY26 में क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) में ज़बरदस्त तेज़ी देखने को मिली, जो 16.1% पर पहुंच गई। 30 अप्रैल, 2026 तक यह 16% पर बनी हुई है। सरकार के स्टिमुलस (Stimulus) की मदद से FY26 की दूसरी छमाही में क्रेडिट ग्रोथ में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, पिछले साल के हाई बेस इफ़ेक्ट (High Base Effect) के चलते FY27 की दूसरी छमाही में ग्रोथ थोड़ी धीमी पड़ने की उम्मीद है। पूरे FY27 के लिए क्रेडिट ग्रोथ 13% से 14% के बीच रहने का अनुमान है।
आगे का रास्ता
कुल मिलाकर, FY27 में भारत की GDP ग्रोथ के 6.0% से 6.6% के बीच रहने का अनुमान है। यह धीमापन वेस्ट एशिया संकट, ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेज में तेज़ी और रुपए में अस्थिरता के कारण हो सकता है। डोमेस्टिक डिमांड भले ही सहारा दे, लेकिन एक्सपोर्ट को बढ़ाने और इंपोर्ट पर निर्भरता घटाने के लिए स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स (Structural Reforms) ही लंबे समय तक ग्रोथ को बनाए रखने में मदद करेंगे।
