घरेलू मांग को मिलेगा सहारा, पर चुनौतियाँ भी!
India की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ का दारोमदार मुख्य रूप से घरेलू मांग पर रहने वाला है। Morgan Stanley का अनुमान है कि FY27 में जीडीपी ग्रोथ 6.7% और FY28 में 7% तक पहुंच सकती है। इस ग्रोथ में शहरी खपत में मजबूती, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में सरकारी निवेश, और सर्विस एक्सपोर्ट्स का अहम योगदान रहेगा। ये फैक्टर्स कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन की चिंताओं के बावजूद अर्थव्यवस्था को सहारा देंगे। रेटिंग एजेंसी Moody's Ratings ने भी माना है कि दूसरे बड़े इमर्जिंग मार्केट्स की तुलना में India की इकोनॉमी काफी रेजिलिएंट है, जिसकी वजह पॉलिसी रिफॉर्म्स, मजबूत फाइनेंशियल रिजर्व्स और विविध अर्थव्यवस्था है। इससे बॉरोइंग कॉस्ट और करेंसी में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिल रहा।
तेल की बढ़ती कीमतें बिगाड़ सकती हैं पूरा खेल!
लेकिन, इस मजबूत आउटलुक के सामने सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण तेल की कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है, जो 2026 और 2027 तक ऊंची बने रहने का अनुमान है। Morgan Stanley का मानना है कि इससे India का करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़कर जीडीपी का 1.8% हो सकता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल इंपोर्ट करता है, और इसमें बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों से आता है। तेल की कीमतों में बड़ा उछाल पहले भी India की इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन को नुकसान पहुंचा चुका है। वहीं, बढ़ती कीमतों का असर महंगाई पर भी दिख रहा है, अप्रैल 2026 में सीपीआई 3.48% पर था। RBI ने FY27 के लिए महंगाई 4.6% रहने का अनुमान लगाया है, जबकि HSBC इसे 5.6% तक पहुंचने की आशंका जता रहा है, जिसका मुख्य कारण एनर्जी कॉस्ट और एल नीनो इफेक्ट्स हैं।
RBI ब्याज दरों पर स्थिर रहने की उम्मीद
इन सब के बीच, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को स्थिर रखने की उम्मीद है। एनालिस्ट्स का मानना है कि RBI FY27 तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, ताकि ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन बना रहे। अप्रैल 2026 में RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा था, जो एक न्यूट्रल स्टांस का संकेत था। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स जैसे HSBC का मानना है कि एनर्जी झटकों और एल नीनो के कारण बढ़ती महंगाई को देखते हुए FY27 में दो बार 5.75% तक रेट हाइक्स हो सकते हैं।
सप्लाई चेन और मौसम का भी रहेगा असर
इसके अलावा, एक्सटर्नल फैक्टर्स और पॉलिसी चॉइस भी महत्वपूर्ण जोखिम पैदा कर रहे हैं। सरकार की ओर से फ्यूल यूज़ कम करने की अपील, जो रिसोर्स बचाने के लिए है, वह घरेलू मांग को धीमा कर सकती है। सरकारी फ्यूल रिटेलर्स को पहले से ही बढ़ी हुई एनर्जी प्राइसेस और सरकारी नीतियों के कारण प्रतिदिन लगभग ₹1,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है। वहीं, खराब मानसून और बढ़ते तापमान के कारण खाने-पीने की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, जो एनर्जी कॉस्ट से बढ़ रही महंगाई में और इज़ाफा करेंगी।
ग्रोथ के अनुमानों में थोड़ा अंतर
कुल मिलाकर, India की जीडीपी ग्रोथ के अनुमानों में कुछ भिन्नता है, जो अनिश्चितताओं को दर्शाती है। Morgan Stanley जहां 6.7% की ग्रोथ का अनुमान लगा रहा है, वहीं RBI ने 6.9% और World Bank ने 6.6% का अनुमान दिया है। Asian Development Bank का मानना है कि मिडिल ईस्ट संघर्ष और ट्रेड अनिश्चितता के कारण रीजनल ग्रोथ धीमी हो सकती है, लेकिन India का ग्रोथ आउटलुक मजबूत बना हुआ है। यह सारा परिदृश्य कमोडिटी प्राइस में उतार-चढ़ाव और जियोपॉलिटिकल घटनाओं जैसे एक्सटर्नल फैक्टर्स पर निर्भर करेगा।
