भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतरा: ग्लोबल झटकों से गिरी ग्रोथ का अनुमान, रेटिंग एजेंसियों ने जताई चिंता

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतरा: ग्लोबल झटकों से गिरी ग्रोथ का अनुमान, रेटिंग एजेंसियों ने जताई चिंता
Overview

भारत की आर्थिक रफ्तार सुस्त पड़ने की आशंका है। **FY27** के लिए देश की GDP ग्रोथ का अनुमान घटाकर **6.6%** कर दिया गया है। इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता, तेल की बढ़ती कीमतें और रुपये में कमजोरी जैसे ग्लोबल झटके हैं।

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ग्रोथ आउटलुक में नरमी के संकेत

कई बड़ी इंटरनेशनल एजेंसियों ने भारत के लिए फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) में GDP ग्रोथ के अनुमान को कम कर दिया है। S&P Global अब 6.6% ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है, जो पहले 7.1% का अनुमान था। वहीं, World Bank का अनुमान भी 6.6% है। UBS के अनुमान 6.2%, IMF के 6.5%, Moody's Ratings के 6% और Nomura के 6.8% हैं। इन डाउनवर्ड रिवीज़न की वजहें साफ हैं: पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, जो कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता ला रहा है, और रुपये का डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होना। अनुमान है कि FY27 के अंत तक रुपया 96 के स्तर तक गिर सकता है। इन ग्लोबल झटकों के साथ, इस साल मॉनसून के सामान्य से कम रहने की आशंका एग्रीकल्चरल आउटपुट और रूरल डिमांड के लिए भी चिंता का विषय है।

महंगाई का बढ़ता खतरा और RBI की पॉलिसी

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का सीधा असर भारत की महंगाई (Inflation) पर दिख रहा है। RBI का 4.6% का महंगाई का अनुमान अब ऊपर जा सकता है। UBS विश्लेषकों का मानना है कि FY27 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) महंगाई औसतन 5.2% रह सकती है, जबकि World Bank इसे 4.9% पर देखता है। इस स्थिति को देखते हुए, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) FY27 की दूसरी छमाही में अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को और सख्त कर सकता है, यानी ब्याज दरों में बढ़ोतरी (monetary tightening) पर विचार कर सकता है।

बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था की परीक्षा

पश्चिम एशिया का संकट भारत के लिए एक बड़ा एनर्जी शॉक साबित हो रहा है, जिसका सीधा असर इंपोर्ट बिल और करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर पड़ रहा है। भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 50% क्रूड ऑयल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आयात करता है, जो सप्लाई में किसी भी रुकावट के प्रति इसे संवेदनशील बनाता है। ऐसे में, UBS का अनुमान है कि FY27 में भारत का CAD बढ़कर GDP का 2.5% हो सकता है, जबकि World Bank इसे 1.8% पर देखता है।

'विकसित भारत' के लिए रिफॉर्म्स की अहमियत

भारत को 2047 तक 'विकसित भारत' बनने के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स पर फिर से ध्यान केंद्रित करना होगा, खासकर एनर्जी और फूड सिक्योरिटी के क्षेत्रों में। सरकार डोमेस्टिक बफर्स को मजबूत करने और ग्लोबल झटकों के प्रति रेजिलिएंस बढ़ाने पर जोर दे रही है। एनर्जी ट्रांजिशन, फर्टिलाइजर और डिफेंस प्रोक्योरमेंट में निवेश बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा, हाल ही में ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और ओमान जैसे देशों के साथ साइन हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) का पूरा फायदा उठाने के लिए, भारत को अपनी कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ानी होगी।

फिस्कल डेफिसिट और कर्ज का बढ़ता बोझ

आर्थिक मजबूती के बावजूद, भारत में कुछ स्ट्रक्चरल कमजोरियां बनी हुई हैं। World Bank का अनुमान है कि FY27 में जनरल गवर्नमेंट फिस्कल डेफिसिट बढ़कर GDP का 7.6% हो सकता है। वहीं, पब्लिक डेट GDP के 84% तक पहुंचने का अनुमान है, जो कर्ज घटाने के लक्ष्य को और दूर कर सकता है। S&P Global और Crisil के अनुसार, भारत का डेट-टू-GDP रेश्यो बढ़कर 57.5% तक पहुंचने की उम्मीद है।

आगे क्या? रेजिलिएंस की परीक्षा जारी

इन चुनौतियों के बावजूद, भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बने रहने की उम्मीद है, जिसकी वजह डोमेस्टिक डिमांड का मजबूत होना है। S&P Global ने हाल ही में भारत की रेटिंग को 'BBB' के साथ स्टेबल आउटलुक दिया है, जो देश की आर्थिक रेजिलिएंस और फिस्कल कंसॉलिडेशन के प्रयासों को दर्शाता है। हालांकि, FY27 के लिए ग्रोथ के अनुमानों पर लगातार बने भू-राजनीतिक तनाव, ऊंची तेल कीमतों और सप्लाई चेन में संभावित रुकावटों का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। एनर्जी और फूड सिक्योरिटी में चल रहे स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स, और विवेकपूर्ण फिस्कल व मॉनेटरी पॉलिसी ही इन अनिश्चितताओं से निपटने और देश के लॉन्ग-टर्म आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने की कुंजी होंगी।

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