China पर भारत की बढ़ती निर्भरता: EV, सोलर, स्मार्टफोन पर मंडराया खतरा

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
China पर भारत की बढ़ती निर्भरता: EV, सोलर, स्मार्टफोन पर मंडराया खतरा
Overview

आत्मनिर्भर भारत के दावों के बावजूद, भारत की चीन पर निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है। खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), सोलर एनर्जी और स्मार्टफोन्स जैसे अहम सेक्टर्स में, जहां कंपोनेंट्स के लिए हम पूरी तरह चीन पर निर्भर हैं। इस साल चीन से कुल आयात **$131 अरब** तक पहुंच गया है, जो भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है।

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भारत पर चीन का बढ़ता शिकंजा

चीन से भारत का आयात $131 अरब के आंकड़े को पार कर गया है, जो बताता है कि महत्वपूर्ण सेक्टरों में हमारी निर्भरता कितनी गहरी है। यह स्थिति भारत के तकनीकी और मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्यों के लिए एक बड़ा रणनीतिक जोखिम पैदा करती है।

EV बैटरी पर बड़ा झटका

इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की बैट्री बनाने में दुनिया भर में चीन का दबदबा है। CATL और BYD जैसी कंपनियां मार्केट का लगभग 70% हिस्सा कंट्रोल करती हैं। भारत की बड़ी कंपनियां जैसे Reliance Industries और Adani Group भी कंपोनेंट्स के लिए CATL से बात कर रही हैं। हालांकि, भारत में बैट्री बनाने की क्षमता मांग से काफी कम है। एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत उम्मीद के मुताबिक उत्पादन अभी शुरू नहीं हुआ है। अक्टूबर 2025 तक केवल 2.8% क्षमता ही चालू हो पाई है। इस वजह से, PLI स्कीम के बावजूद, हमें चीन से लगातार आयात पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अकेले लिथियम का आयात 2025 में $1.2 अरब तक पहुंच गया। भारत ने चीनी सोलर सेल्स पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी भी लगाई है, लेकिन चीनी कंपनियां अब भारत को पूरी मॉड्यूल की जगह सिर्फ सेल्स एक्सपोर्ट कर रही हैं।

सोलर सप्लाई चेन पर चीन का कब्ज़ा

सोलर पैनल, वेफर्स, सेल्स और पॉलीसिलिकॉन सहित पूरी ग्लोबल सोलर सप्लाई चेन का अनुमानित 80-85% हिस्सा चीन कंट्रोल करता है। 2023 में, दुनिया भर के सोलर वेफर्स का 98%, सेल्स का 92% और पैनल्स का 85% उत्पादन चीन में हुआ। भारत भले ही अपनी सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रहा हो, लेकिन सेल्स के लिए वह अभी भी काफी हद तक चीन पर निर्भर है। भारत का जून 2026 का स्थानीय सोलर सेल बनाने का नियम आयात कम करने का लक्ष्य रखता है, लेकिन घरेलू उत्पादन अभी काफी कम है। 2025 के पहले 11 महीनों में चीन से सोलर सेल्स का आयात 47.17% बढ़कर 49 GW से अधिक हो गया। सोलर वेफर कैपेसिटी में भी चीन का 95% हिस्सा है।

स्मार्टफोन कंपोनेंट्स: एक नाजुक जुड़ाव

भारत की स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग की महत्वाकांक्षाएं भी चीन से जुड़ी हुई हैं। 2026 तक दुनिया भर में iPhone असेंबली में भारत का हिस्सा 28% होने की उम्मीद है और चीन को होने वाले कंपोनेंट एक्सपोर्ट भी बढ़ रहे हैं। लेकिन, सबसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स चीन से ही आते हैं, जो दुनिया के लगभग 60% स्मार्टफोन की सप्लाई करता है। Huawei जैसे चीनी ब्रांड अपने घरेलू बाजार में मजबूत हैं, जबकि Apple को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। भारत सरकार ने प्रोजेक्ट में देरी और कमी के कारण पावर और कोयला जैसे सेक्टरों में जरूरी उपकरणों के चीनी आयात पर कुछ प्रतिबंधों को आसान बनाया है।

व्यापार घाटा और प्रतिस्पर्धा की चुनौतियाँ

चीन के साथ व्यापार घाटा काफी बढ़ गया है, जो FY20 में $65 अरब से बढ़कर FY26 में $131 अरब हो गया। सरकारी नीतियां इस संरचनात्मक निर्भरता को दूर करने में संघर्ष कर रही हैं। भारत की डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भले ही बढ़ रही हो, लेकिन मांग उससे कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। बैटरी उत्पादन के लिए ACC PLI स्कीम में देरी हुई है, जिसमें लाभार्थियों ने सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण एक्सटेंशन मांगे हैं, जिसमें अक्सर चीनी उपकरण शामिल होते हैं। चीन का विशाल औद्योगिक पैमाना और सरकारी सब्सिडी, जिसने 2011 से 2023 के बीच सोलर मैन्युफैक्चरर्स को $50 अरब से अधिक की मदद की है, एक महत्वपूर्ण लागत लाभ प्रदान करती है, जिससे भारत के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है। चीनी कंपनियों ने भारतीय एंटी-डंपिंग ड्यूटी का मुकाबला करने के लिए सेल्स और वेफर्स का निर्यात बढ़ा दिया है।

भू-राजनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम

महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के लिए चीन पर भारत की अत्यधिक निर्भरता गंभीर कमजोरियां पैदा करती है। भू-राजनीतिक तनाव या व्यापार विवादों से जरूरी पार्ट्स की सप्लाई बाधित हो सकती है, जिसका असर भारत के EV, सोलर और स्मार्टफोन उद्योगों पर पड़ेगा। भारी आयात बिल पूंजी के बहिर्वाह को दर्शाता है, और चीन की मूल्य निर्धारण शक्ति घरेलू मैन्युफैक्चरिंग में बाधा डाल सकती है। भले ही भारतीय समूह पार्टनरशिप की तलाश कर रहे हों, चीन उन्नत तकनीक साझा करने में हिचकिचा सकता है। महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग का चीन में यह केंद्रीकरण रणनीतिक क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएं पैदा करता है।

आगे की राह

भारत PLI स्कीमों और सोलर सेल अनिवार्यताओं के माध्यम से स्थानीयकरण को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें Reliance और Adani जैसी कंपनियां बैटरी पार्टनरशिप का विस्तार कर रही हैं। हालांकि, चीन का मैन्युफैक्चरिंग पैमाना, लागत प्रतिस्पर्धा और तकनीकी बढ़त एक बड़ी चुनौती पेश करती है। दशकों के सप्लाई चेन दबदबे को पार पाना एक लंबी प्रक्रिया होगी, जिसमें निरंतर औद्योगिक नीति, निवेश और रणनीतिक पैंतरेबाज़ी की आवश्यकता होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.