केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 27 अप्रैल को एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिलों और इंडस्ट्री एसोसिएशन्स के प्रतिनिधियों से मिलेंगे। यह चर्चा ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हो रही है जब भारतीय निर्यातकों को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ा पश्चिम एशिया का संकट, शिपिंग कंपनियों को प्रमुख मध्य पूर्वी बाजारों में परिचालन करने से हिचकिचा रहा है, जो भारतीय सामानों के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य है।
निर्यात पर संकट का असर
इसका असर हाल के ट्रेड (Trade) आंकड़ों में साफ दिख रहा है। मार्च में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स (Merchandise Exports) 7.44% घटकर $38.92 बिलियन रह गए, जो पिछले पांच महीनों में सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। खास तौर पर पश्चिम एशिया को भेजे जाने वाले शिपमेंट्स (Shipments) में उस महीने 50% से अधिक की गिरावट आई। हालांकि, कम आयात (Imports) के कारण मार्च में ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) नौ महीने के निचले स्तर $20.67 बिलियन पर आ गया, लेकिन निर्यात में यह कमजोरी चिंता का विषय बनी हुई है।
मीटिंग का एजेंडा और संदर्भ
यह मीटिंग ऐसे समय में हो रही है जब भारत और न्यूजीलैंड (New Zealand) अपना फ्री ट्रेड पैक्ट (Free Trade Pact) साइन करने वाले हैं। न्यूजीलैंड के ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट मिनिस्टर टॉड मैक्क्ले (Todd McClay) पहले से ही देश में हैं और व्यावसायिक चर्चाओं में भाग ले रहे हैं। बैठक में लेदर, फार्मास्यूटिकल्स (Pharmaceuticals), ऑटो (Auto), स्पोर्ट्स गुड्स (Sports Goods) और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर्स के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।
पूरे फाइनेंशियल ईयर का ट्रेड
मार्च की गिरावट के बावजूद, पूरे 2025-26 फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के लिए मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स में 0.93% की मामूली बढ़ोतरी हुई और यह रिकॉर्ड $441.78 बिलियन पर पहुंच गया। वहीं, इम्पोर्ट्स (Imports) 7.45% बढ़कर $775 बिलियन हो गए, जिससे ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) बढ़कर $333.2 बिलियन हो गया। इसका मुख्य कारण सोना और चांदी की बढ़ी हुई खरीद है। गुड्स (Goods) और सर्विसेज (Services) के कुल एक्सपोर्ट्स 2025-26 फाइनेंशियल ईयर में रिकॉर्ड $860.09 बिलियन रहे।
