'नारी शक्ति' पर सरकार का रिकॉर्ड दांव
Union Budget 2026-27 में भारत सरकार ने महिलाओं के उत्थान और उनके सशक्तिकरण को अपनी आर्थिक रणनीति का मुख्य आधार बनाया है। इस बजट में 'जेंडर बजट' के तहत ₹5.08 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है, जो कि अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। यह राशि न केवल एक रिकॉर्ड है, बल्कि कुल बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है, जो 'नारी शक्ति' को बढ़ावा देने के सरकार के मजबूत इरादे को दर्शाता है। पिछले कुछ सालों में जेंडर बजट में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है, जो इस बात का सबूत है कि सरकार महिलाओं को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पिछले सालों के मुकाबले भारी उछाल
वित्तीय वर्ष (Financial Year) 2026-27 के लिए जेंडर बजट का आवंटन ₹5.08 लाख करोड़ रहा, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में यह राशि ₹4.49 लाख करोड़ थी। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में संशोधित (Revised) आंकड़ों के अनुसार यह ₹3.9 लाख करोड़ था। वहीं, वित्तीय वर्ष 2021-22 में यह आवंटन सिर्फ ₹1.54 लाख करोड़ था। यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि कैसे सरकार ने महिलाओं से जुड़ी योजनाओं में निवेश को कई गुना बढ़ा दिया है।
प्रमुख योजनाओं और नए कदमों पर फोकस
महिलाओं की तरक्की के लिए कई अहम योजनाओं को इस बार बड़ा फंड मिला है। किसानों के लिए 'पीएम किसान योजना' (PM Kisan Yojana) में ₹15,240 करोड़ का आवंटन बरकरार रखा गया है। मनरेगा (MGNREGS) की तर्ज पर शुरू की गई नई ग्रामीण रोजगार योजना के लिए ₹44,506 करोड़ रखे गए हैं। 'जल जीवन मिशन' (Jal Jeevan Mission) को ₹33,022 करोड़ दिए गए हैं, जो पिछले साल के ₹20,476 करोड़ से काफी ज्यादा है। हालांकि, यह भी देखा गया कि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में जल जीवन मिशन के लिए आवंटित राशि में से सिर्फ ₹8,306 करोड़ ही खर्च हुए, जिससे इसके कार्यान्वयन पर सवाल उठता है।
महिला उद्यमियों के लिए 'SHE Marts'
महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक नई पहल की है। बजट में 'सेल्फ-हेल्प एंटरप्रेन्योर (SHE) मार्ट्स' (Self-Help Entrepreneur Marts) की स्थापना का प्रस्ताव है। इनका मकसद महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे ग्रामीण उद्यमों को बेहतर फाइनेंसिंग और सामुदायिक स्वामित्व वाले रिटेल आउटलेट्स के जरिए सपोर्ट करना है।
बजट की संरचना और भविष्य की दिशा
जेंडर बजट को तीन भागों में बांटा गया है। पार्ट A में 100% महिला-विशिष्ट योजनाएं हैं। पार्ट B में ऐसी योजनाएं शामिल हैं जहां कम से कम 30% लाभार्थी महिलाएं होती हैं, जैसे 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (Pradhan Mantri Awas Yojana)। पार्ट C में वे योजनाएं आती हैं जहां महिलाओं के लिए 30% से कम आवंटन होता है। हाल के रुझानों से ऐसा लग रहा है कि सरकार पार्ट B की योजनाओं पर ज्यादा निर्भर हो रही है, जिससे सीधे तौर पर महिला-केंद्रित नतीजों को ट्रैक करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
आर्थिक विकास का नया अध्याय
यह भारी-भरकम जेंडर बजट आवंटन 'नारी शक्ति' और महिलाओं द्वारा संचालित विकास को भारत की आर्थिक ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण मानने की सरकार की रणनीति को मजबूत करता है। ग्रामीण रोजगार, जल और स्वच्छता, मातृ एवं शिशु पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा, खासकर STEM क्षेत्रों में जहां भारत में महिला नामांकन ज्यादा है, इन सभी क्षेत्रों को फायदा होगा। साथ ही, 'लखपति दीदी' (Lakhpati Didi) जैसे कार्यक्रमों और SHE Marts जैसी पहलों से महिलाएं लोन आधारित आजीविका से आगे बढ़कर खुद के उद्यम खड़ी कर सकेंगी।
प्रभावशीलता और आगे की राह
भारत में जेंडर बजटिंग 2005-06 से शुरू हुई है और इसने सरकारी खर्च में महिलाओं की दृश्यता बढ़ाने में मदद की है। आवंटन में लगातार बढ़ोतरी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह पैसा वाकई में महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण ला रहा है या नहीं, खासकर वंचित समुदायों के लिए, इस पर अभी भी बहस जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि नतीजों पर आधारित मूल्यांकन, लिंग-विभाजित डेटा (gender-disaggregated data) और मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है ताकि इन योजनाओं का प्रभावी ढंग से लाभ मिल सके। महिलाओं द्वारा संचालित विकास और उद्यमिता पर जोर भविष्य के लिए एक अच्छी सोच है, लेकिन इन बढ़े हुए बजटीय प्रतिबद्धताओं का पूरा फायदा उठाने के लिए मजबूत कार्यान्वयन और जवाबदेही तंत्र महत्वपूर्ण होंगे।