India Gender Budget: ₹5 लाख करोड़ के पार! महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India Gender Budget: ₹5 लाख करोड़ के पार! महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
Overview

भारत का जेंडर बजट (Gender Budget) वित्त वर्ष 2026 के लिए एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रहा है! पहली बार यह आवंटन **₹5,00,878 करोड़** के पार चला गया है, जो पिछले साल के मुकाबले **11.54%** की बड़ी बढ़ोतरी दर्शाता है।

महिला-केंद्रित विकास का नया कीर्तिमान

यह अभूतपूर्व ₹5 लाख करोड़ का आवंटन देश की वित्तीय रणनीति में एक अहम मोड़ है, जो महिला-केंद्रित विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर की तुलना में 11.54% की बड़ी बढ़ोतरी है। इस बढ़े हुए बजट का मकसद महिलाओं को सशक्त बनाने वाली विभिन्न योजनाओं, जैसे खाद्य सुरक्षा से लेकर ग्रामीण रोजगार और आवास तक, को मजबूती देना है। यह 'नारी शक्ति' को बढ़ावा देने की व्यापक आर्थिक रणनीति का संकेत है।

मुख्य कल्याणकारी योजनाओं का योगदान और बदलाव

वित्त वर्ष 2026 के लिए कुल ₹5,00,878.73 करोड़ के जेंडर बजट में सबसे बड़ा योगदान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) का रहा, जिसे ₹1.09 लाख करोड़ मिले हैं, जो कुल आवंटन का 20% से अधिक है। जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के फंड में 53.90% की बड़ी बढ़ोतरी हुई है, जिससे इसे ₹35,982 करोड़ मिले हैं। वहीं, दूसरी ओर, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) में भारी 185% की कटौती की गई है, जो घटकर ₹13,956 करोड़ रह गई है। इसके स्थान पर, 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन' (Viksit Bharat-Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission) के लिए ₹44,506 करोड़ का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को ₹52,575 करोड़ मिले हैं, जो पिछले साल से 5% कम है।

बजट की संरचना और महत्वपूर्ण चिंताएं

जेंडर बजट को तीन भागों में बांटा गया है: पार्ट A (महिलाओं के लिए 100% आवंटन), पार्ट B (महिलाओं के लिए 30-99% आवंटन), और पार्ट C (महिलाओं के लिए 30% तक आवंटन, जिसे हाल ही में जुलाई 2024 में पेश किया गया)। FY2026 के लिए, पार्ट A में 5.2% की बढ़ोतरी के साथ ₹1,07,688.42 करोड़, पार्ट B में 12.7% की बढ़ोतरी के साथ ₹3,63,412.37 करोड़, और पार्ट C में 22% की बढ़ोतरी के साथ ₹29,777.94 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

हालांकि, इस आवंटन की संरचना को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पार्ट B की योजनाओं पर निर्भरता बढ़ रही है, जहां सीधे तौर पर महिलाओं के लिए विशिष्ट परिणामों को ट्रैक करना पार्ट A की योजनाओं की तुलना में अधिक कठिन हो जाता है। इसके अलावा, कुछ मंत्रालयों द्वारा फंड के प्रभावी उपयोग में ऐतिहासिक अंतराल, जेंडर-आधारित हिंसा से निपटने के लिए किसी समर्पित बड़े कार्यक्रम की अनुपस्थिति और ट्रांसजेंडर समुदाय को जेंडर बजट स्टेटमेंट से बाहर रखना भी आलोचना का विषय है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आर्थिक निहितार्थ

भारत का जेंडर बजट, जो औपचारिक रूप से 2005-06 में पेश किया गया था, तब से काफी विकसित हुआ है। FY 2021-22 में ₹1.54 लाख करोड़ के आवंटन से बढ़कर यह वर्तमान रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह वृद्धि राष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में महिलाओं के सशक्तिकरण को एकीकृत करने और 'नारी शक्ति' को आर्थिक विकास के चालक के रूप में पहचानने की नीतिगत मंशा को दर्शाती है। आर्थिक सर्वे ने भी महिलाओं के आर्थिक विकास में योगदान और महिला कार्यबल की भागीदारी बढ़ने से GDP में वृद्धि की संभावना पर प्रकाश डाला है।

आगे की राह

भविष्य के लिए, यह जोर दिया जा रहा है कि बजट के आवंटन को ठोस परिणामों में बदलने के लिए मजबूत कार्यान्वयन और जवाबदेही तंत्र की आवश्यकता है। विशेषज्ञ महिला श्रम बल की भागीदारी, अवैतनिक देखभाल के बोझ को कम करने और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाओं पर अधिक ध्यान देने की वकालत कर रहे हैं, जैसे कि नए प्रस्तावित SHE Marts। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि बजट डिजाइन केवल मौजूदा योजनाओं का नाम बदलने के बजाय महिलाओं की विशिष्ट बाधाओं को दूर करने के लिए सक्रिय रूप से फिर से डिजाइन किए जाएं।

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