India GDP Forecast: 7.1% तक पहुंचेगी ग्रोथ, पर तेल के दाम बढ़ा रहे महंगाई का डर!

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
India GDP Forecast: 7.1% तक पहुंचेगी ग्रोथ, पर तेल के दाम बढ़ा रहे महंगाई का डर!
Overview

S&P Global ने India की Financial Year 2027 (FY27) की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर **7.1%** कर दिया है। मजबूत आर्थिक रफ्तार के चलते यह अनुमान लगाया गया है। हालांकि, कच्चे तेल और ईंधन की बढ़ती कीमतें महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं। अनुमान है कि Financial Year 2027 में कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (CPI) बढ़कर **4.3%** तक पहुंच सकता है, जो FY26 में **2.5%** था। यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए एक नाजुक स्थिति पैदा कर रहा है, जिसे ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

India की ग्रोथ का मजबूत अनुमान

S&P Global ने India के लिए Financial Year 2027 (FY27) की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है, जो देश की मजबूत आर्थिक रफ्तार को दर्शाता है। यह संशोधित अनुमान प्रमुख फोरकास्टर्स में सबसे आशावादी है। यह India के घरेलू खपत (domestic consumption) में तेजी को दिखाता है।

अन्य देशों से बेहतर प्रदर्शन

FY27 के लिए India का 7.1% का अनुमान International Monetary Fund (IMF) के 6.4% और World Bank के 6.5% के अनुमानों से काफी ऊपर है। S&P Global को उम्मीद है कि FY28 में ग्रोथ 7.2% और FY29 में 7.0% रह सकती है। मजबूत डोमेस्टिक डिमांड और सर्विस सेक्टर का शानदार प्रदर्शन इस उम्मीद की बड़ी वजह है।

तेल की कीमतों से महंगाई का खतरा

लेकिन, सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल और ईंधन की बढ़ती कीमतों से पैदा हो रही महंगाई को लेकर है। S&P Global का अनुमान है कि Financial Year 2027 तक कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (CPI) बढ़कर 4.3% पर पहुंच सकता है, जो FY26 के लिए अनुमानित 2.5% से काफी ज्यादा है। यह अनुमान Economic Survey और IMF की चिंताओं से मेल खाता है। मार्च 2026 के अंत तक WTI क्रूड ऑयल लगभग $88.92 और Brent क्रूड ऑयल करीब $97.80 प्रति बैरल के आसपास चल रहा है, जो इस खतरे को दर्शाता है। India अपनी 85% से ज्यादा तेल की जरूरतें आयात करता है, ऐसे में वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे घरेलू लागतों को प्रभावित करता है और रुपये को कमजोर कर सकता है, जिससे आयात और महंगा हो जाता है। जियो-पॉलिटिकल टेंशन भी एनर्जी मार्केट में अस्थिरता बढ़ा सकती है।

RBI के सामने संतुलन की चुनौती

लगातार बढ़ती महंगाई का खतरा इस अच्छी ग्रोथ स्टोरी पर पानी फेर सकता है। एनर्जी की ऊंची कीमतों के चलते CPI इन्फ्लेशन का FY27 में 4.3% तक पहुंचना, घरों और व्यवसायों के बजट पर दबाव डाल सकता है। इससे RBI की मॉनेटरी पॉलिसी पर भी प्रेशर बढ़ रहा है। सेंट्रल बैंक ने फिलहाल अपनी न्यूट्रल पॉलिसी बनाए रखी है और रेपो रेट 5.25% पर है, जिसका मकसद इकोनॉमी को सपोर्ट देना है। लेकिन, अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा तेजी से बढ़ी, तो RBI के लिए यह स्थिति संभालना मुश्किल हो सकता है। तेल आयात बढ़ने से करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) भी बढ़ सकता है, जो रुपये को और कमजोर कर सकता है और घरेलू महंगाई को हवा दे सकता है।

आगे का रास्ता तेल की कीमतों पर निर्भर

आगे का रास्ता तेल की कीमतों और RBI की पॉलिसी पर निर्भर करेगा। RBI की न्यूट्रल पॉलिसी यह संकेत देती है कि वह महंगाई से निपटने के लिए तैयार है, लेकिन लगातार ऊंची तेल कीमतें एक अहम फैक्टर बनी रहेंगी जिन पर नजर रखनी होगी। RBI खुद भी बढ़ती प्राइस प्रेशर का अनुमान लगा रहा है, उसने Q1 FY27 के लिए इन्फ्लेशन 4.0% और Q2 FY27 के लिए 4.2% रहने का अनुमान जताया है।

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