ट्रेड डील और बाजार की खुशी
हाल ही में अमेरिका के साथ हुए ट्रेड डील के तुरंत बाद, 3 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजारों में जबरदस्त उछाल देखा गया। बेंचमार्क BSE Sensex 2.54% चढ़कर 83,739 पर बंद हुआ, वहीं Nifty 50 इंडेक्स 2.55% बढ़कर 25,727 पर पहुंच गया। इस तेजी से निवेशकों का उत्साह साफ झलक रहा था, जो टैरिफ में कमी के तुरंत असर को लेकर आशावादी थे। यूएस डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में भी मामूली मजबूती देखी गई और यह 90.2650 पर बंद हुआ। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि इस टैरिफ कटौती से भारत की GDP ग्रोथ में सालाना लगभग 0.2 प्रतिशत पॉइंट्स का इजाफा हो सकता है।
इकोनॉमी पर डील का असर
गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, यह ट्रेड डील भारत के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित हो सकती है। टैरिफ में कमी से भारतीय सामानों का अमेरिका में निर्यात आसान होगा। फर्म ने अनुमान लगाया है कि यह सीधा असर GDP ग्रोथ पर 0.2% तक दिख सकता है। इसके अलावा, ट्रेड पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता खत्म होने से प्राइवेट इन्वेस्टमेंट (Private Investment) यानी निजी निवेश बढ़ने की उम्मीद है। इससे करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) यानी चालू खाते का घाटा भी कम होकर CY26 में GDP का 0.8% रह सकता है।
क्या यह सब सिर्फ टैरिफ पर निर्भर?
हालांकि, टैरिफ में कमी एक बड़ा कदम है, लेकिन भारत की इकोनॉमी के लिए लंबे समय तक अच्छी ग्रोथ बनाए रखने के लिए कई और फैक्टर मायने रखते हैं। इसमें सबसे अहम है प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) यानी निजी क्षेत्र द्वारा किया जाने वाला निवेश, जिसके CY26 की दूसरी छमाही में बढ़ने की उम्मीद है। भारत की ग्रोथ में अभी भी डोमेस्टिक डिमांड (घरेलू मांग) और सरकारी खर्चों का बड़ा योगदान है, लेकिन प्राइवेट कैपेक्स इसमें 'स्विंग फैक्टर' का काम कर सकता है।
ऐतिहासिक संदर्भ और भविष्य की राह
यह ध्यान देने वाली बात है कि पहले अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, जैसे कि 2025 में 50% का टैरिफ, कुछ एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स के लिए परेशानी का सबब बने थे। नया एग्रीमेंट इस ट्रेंड को पलटने में मदद करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय सामानों पर प्रभावी टैरिफ में यह बड़ी गिरावट टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर्स के लिए राहत लाएगी।
आगे क्या?
गोल्डमैन सैक्स ने भारत की CY26 रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 6.9% तक पहुंचाया है। इसके अलावा, ट्रेड टेंशन कम होने से भारतीय रुपये पर दबाव भी कम हो सकता है। भारत का यूनियन बजट 2026-27 भी मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में ₹12.2 ट्रिलियन के कैपेक्स आवंटन के साथ इन सेक्टर्स को बढ़ावा देने का संकेत देता है। हालांकि, इस डील की पूरी तस्वीर तब साफ होगी जब भारत द्वारा की जाने वाली जवाबी टैरिफ में कटौती, खासकर एग्रीकल्चर और सर्विसेज सेक्टर को लेकर, और स्पष्ट हो जाएगी।