सरकारी दखल से ऑयल कंपनियों पर बढ़ी मुसीबत
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई अप्रत्याशित उछाल के बीच, भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने जहां एक तरफ घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम की है, वहीं दूसरी तरफ डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर ड्यूटी लगा दी है। यह दोहरी रणनीति मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष और उससे जुड़ी तेल आपूर्ति की अनिश्चितताओं के मद्देनजर अपनाई गई है। लेकिन, इस कदम का सीधा असर देश की सरकारी ऑयल मार्केटिंग कम्पनीज़ (OMCs) जैसे Indian Oil Corporation (IOCL), Bharat Petroleum Corporation Ltd (BPCL) और Hindustan Petroleum Corporation Ltd (HPCL) के मार्जिन (Margins) और कैश फ्लो (Cash Flow) पर पड़ने वाला है।
उपभोक्ताओं को राहत, कंपनियों को झटका
सरकार के इस फैसले से पेट्रोल पंप पर ग्राहकों को तुरंत राहत मिलेगी, लेकिन इसके चलते OMCs पर बढ़ती कच्चे तेल की लागत का बोझ आ गया है। विश्लेषकों और रेटिंग एजेंसियों का मानना है कि यह नीति, जो उपभोक्ताओं के लिए वरदान साबित हो सकती है, वहीं दूसरी ओर इन सरकारी कंपनियों की वित्तीय स्थिरता के लिए चिंता का सबब बन सकती है, खासकर अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं।
नई नीतियों का बाजार पर असर
नई नीति के तहत, डीजल पर ₹21.5 प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर ₹29.5 प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई गई है। साथ ही, घरेलू इस्तेमाल के लिए पेट्रोल और डीजल दोनों पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर कम की गई है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब मध्य-पूर्व संकट के कारण ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें मार्च 2026 में $100 से बढ़कर $119 प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने इसे 'वैश्विक तेल बाजार में इतिहास की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा' बताया है।
हालांकि भारत में ईंधन की कीमतें अब डिरेगुलेटेड (Deregulation) हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में OMCs प्रभावी रूप से मूल्य नियंत्रण (Price Control) प्रणाली के तहत काम कर रही हैं। ICRA जैसी रेटिंग एजेंसियों ने पहले ही $100-105 प्रति बैरल कच्चे तेल के औसत पर पेट्रोल पर ₹11 प्रति लीटर और डीजल पर ₹14 प्रति लीटर के संभावित नुकसान की चेतावनी दी थी। Emkay Research का अनुमान है कि $100/bbl ब्रेंट पर ऑटो फ्यूल पर वार्षिक नुकसान ₹4.4 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। Moody's Ratings और S&P Global Ratings ने भी OMCs के मार्जिन पर दबाव बढ़ने और कैश-फ्लो की अस्थिरता की चेतावनी दी है। अप्रैल 2022 से घरेलू पंप की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इन चिंताओं के कारण IOCL, BPCL और HPCL के शेयरों में पहले ही भारी गिरावट आई है, कुछ OMCs ने 19 मार्च 2026 को 7% तक का नुकसान दर्ज किया और इस महीने अब तक लगभग 25% की गिरावट देखी गई है।
वैश्विक झटकों के प्रति भारत की संवेदनशीलता
भारत अपनी कच्चे तेल की 85-88% जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिससे यह वैश्विक मूल्य झटकों और आपूर्ति व्यवधानों के प्रति बेहद संवेदनशील है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का बंद होना, जो वैश्विक तेल और एलएनजी का लगभग 20% हिस्सा ले जाता है, इस जोखिम को और बढ़ाता है। हालांकि सरकार UAE और सऊदी अरब से आयात बढ़ाने जैसे आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने के लिए काम कर रही है, फिर भी व्यवधानों का तत्काल प्रभाव महत्वपूर्ण है।
भविष्य के लिए अनुमान
विश्लेषकों का अनुमान है कि कच्चा तेल महंगा बना रहेगा। Goldman Sachs के अनुसार 2026 में ब्रेंट क्रूड का औसत $85 प्रति बैरल रहने की उम्मीद है। IEA भी मार्च 2026 तक महत्वपूर्ण वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों का अनुमान लगा रहा है। यह बताता है कि OMC के मार्जिन पर दबाव जारी रहेगा। वर्तमान नीति की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि सरकार खुदरा कीमतों में वृद्धि की अनुमति देने, पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान करने या अपने ऊर्जा क्षेत्र की वित्तीय सेहत को खतरे में डालने के लिए कितनी तैयार है। बाजार OMCs की वित्तीय सेहत और उपभोक्ताओं की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने वाले किसी भी नीतिगत बदलाव पर कड़ी नजर रखेगा।