प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से गैर-जरूरी आयात (non-essential imports) कम करने और विदेशी मुद्रा (forex) बचाने की अपील, भारत पर मंडरा रहे गंभीर आर्थिक दबाव का साफ संकेत है। ये दबाव मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के कारण पैदा हुआ है, जिसका सीधा असर ऊर्जा आपूर्ति (energy supplies) और कमोडिटी की कीमतों पर पड़ रहा है।
ऊपर चढ़ते कच्चे तेल के दाम भारत के आर्थिक संतुलन के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गए हैं। अनुमान है कि अगर कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के स्तर पर रहा, तो देश का करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) 1.5% तक पहुंच सकता है। और अगर यह $120-$130 प्रति बैरल तक चला गया, तो यह 2% या उससे भी ऊपर जा सकता है। बैंक ऑफ अमेरिका का अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2027 तक भारत का CAD बढ़कर $88 बिलियन, यानी GDP का 2.1% हो सकता है, जो 2013 के 'Fragile Five' दौर के बाद सबसे बड़ा स्तर होगा। इस बढ़त की सीधी वजह कच्चे तेल की कीमतों में इस साल आई लगभग 72% की तेजी है। इसके साथ ही, भारतीय रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5.1% की गिरावट आई है, जिससे ऊर्जा आयात और भी महंगा हो गया है।
इन हालात से निपटने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बाजार में हस्तक्षेप किया है, जिसके चलते फरवरी 2026 में अपने रिकॉर्ड $728.49 बिलियन के स्तर से विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) घटकर 1 मई 2026 तक लगभग $690.69 बिलियन रह गया है।
इसी बीच, महंगाई (inflation) के अनुमानों को भी लगातार ऊपर की ओर संशोधित किया जा रहा है; ADB का अनुमान है कि FY27 में महंगाई 6.9% तक पहुंच सकती है, जो RBI के 6% के टॉलरेंस लेवल से काफी ऊपर है। सरकार 2013 के 'टैपर टैंट्रम' जैसे हालात से निपटने के लिए कुछ कदम उठाने पर विचार कर रही है, जिसमें नागरिकों के कुछ गैर-जरूरी विदेशी खर्चों (LRS) पर अस्थायी रोक या सोने के आयात नियमों में संभावित बदलाव शामिल हैं। हालांकि, जुलाई 2024 में सोने पर कस्टम ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% किया गया था, जिसका मकसद लीगल इंपोर्ट को बढ़ावा देना था, लेकिन यह CAD को कितना प्रभावित करेगा, यह देखना बाकी है। FCNR डिपॉजिट या विदेशी बॉन्ड जारी कर विदेशी मुद्रा जुटाना संभव है, लेकिन मौजूदा ग्लोबल ब्याज दरों के कारण यह महंगा पड़ेगा। RBI भी रुपये को सहारा देने के लिए कुछ खास मौद्रिक कदम उठा रहा है, लेकिन इनसे फॉरेक्स रिजर्व कम हो रहा है। इन उपायों की प्रभावशीलता ग्लोबल आर्थिक रुझानों से सीमित है।
आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, भारतीय इक्विटी बेंचमार्क जैसे Nifty 50 और BSE Sensex अपनी ऊंची वैल्यूएशन बनाए हुए हैं। 10 मई 2026 तक Nifty 50 का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो लगभग 21.0 है। Nifty 50 का मार्केट कैप करीब ₹1,96,95,612 करोड़ और Sensex का वैल्यूएशन लगभग ₹1,55,93,492 करोड़ है। हालांकि, पिछले 12 महीनों में रुपये में 10.36% की गिरावट (लगभग 94.5 प्रति डॉलर) और 2026 के पहले चार महीनों में $20 बिलियन से अधिक के फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर (FPI) आउटफ्लो ने निवेशकों की सतर्कता को दर्शाया है।
बढ़ते तेल के दाम और चौड़ा होता CAD, भारत के लिए स्टैगफ्लेशन (उच्च महंगाई के साथ धीमी ग्रोथ) का जोखिम पैदा करते हैं। महंगाई के अनुमान RBI के कम्फर्ट जोन से बाहर हैं और ADB जैसी संस्थाएं ग्रोथ के अनुमानों को नीचे ला रही हैं। भारत अपनी करीब 85-87% तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जो इसे ग्लोबल कीमतों के झटकों के प्रति स्ट्रक्चरली कमजोर बनाता है। लगातार बढ़ती तेल कीमतें सीधे तौर पर उपभोक्ता मूल्य, कंपनियों की लागत और सरकारी सब्सिडी को प्रभावित करती हैं, साथ ही करेंसी को भी कमजोर करती हैं। फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने चेताया है कि पर्याप्त फॉरेन एक्सचेंज हेजिंग के बिना काम कर रही कंपनियां, खासकर रिन्यूएबल्स और पावर यूटिलिटीज जैसे सेक्टर में, रुपये के बड़े डेप्रिसिएशन की स्थिति में रेटिंग downgrade का सामना कर सकती हैं। 2013 के 'Fragile Five' दौर की यादें, जो करेंसी डेप्रिसिएशन और बड़े CAD के कारण आर्थिक अस्थिरता से जुड़ी थीं, एक चेतावनी की तरह हैं। प्रस्तावित नीतियां भले ही अल्पावधि में राहत दें, लेकिन वे बैलेंस ऑफ पेमेंट की मूल समस्याओं को हल नहीं कर सकतीं, जिसके लिए दीर्घकालिक स्थिरता हेतु व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।
हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूत घरेलू मांग और युवा आबादी जैसे सकारात्मक पहलू हैं, लेकिन मौजूदा ग्लोबल हालात और ऊर्जा की कीमतें निकट और मध्यम अवधि में बड़े जोखिम पेश कर रही हैं। इन चुनौतियों से सफलतापूर्वक पार पाने के लिए न केवल बेहतर मॉनेटरी और फिस्कल पॉलिसी प्रबंधन की आवश्यकता है, बल्कि निर्यात क्षमता बढ़ाने, ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और बढ़ते बाहरी घाटे को पूरा करने के लिए स्थिर विदेशी पूंजी आकर्षित करने हेतु गहरे स्ट्रक्चरल सुधारों को लागू करना भी जरूरी है।
