सोने की कीमत में बड़ी गिरावट से रिजर्व पर असर
ताजा आंकड़े बताते हैं कि 20 मार्च, 2026 को समाप्त हुए हफ्ते में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में $11.41 अरब की भारी कमी आई है। यह लगातार दूसरी साप्ताहिक गिरावट है। इस भारी कमी की मुख्य वजह देश के सोने के भंडार के वैल्यूएशन में आई $13.495 अरब की तेज गिरावट है, जिससे इसका मूल्य घटकर $117.186 अरब रह गया। हालांकि, भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा, विदेशी मुद्रा संपत्ति (Foreign Currency Assets) में $2.127 अरब की मामूली बढ़ोतरी हुई है, जो $557.695 अरब तक पहुंच गई। लेकिन यह बढ़ोतरी सोने के वैल्यूएशन में हुई भारी कमी की भरपाई नहीं कर सकी। फरवरी 2026 के अंत में $728.494 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाला कुल रिजर्व अब वैश्विक बाजार की उथल-पुथल के बीच काफी कम हो गया है।
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर, FII Outflows का दबाव
विदेशी मुद्रा भंडार में आई इस तेज गिरावट के साथ ही भारतीय रुपये (Indian Rupee) पर भी काफी दबाव देखा जा रहा है। 27 मार्च, 2026 तक, USD/INR एक्सचेंज रेट लगभग 94.87 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। पिछले एक महीने में इसमें करीब 3.59% और पिछले एक साल में 10.91% की बड़ी गिरावट आई है। इस कमजोरी की वजह लगातार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का पैसा निकालना है। मार्च महीने में ही $11 अरब से ज्यादा की रकम भारतीय इक्विटी और डेट मार्केट से बाहर गई है, जो अक्टूबर 2024 के बाद सबसे बड़ी मासिक निकासी है। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी मार्केट में घबराहट बढ़ा दी है, जिससे तेल आपूर्ति में रुकावट और महंगाई बढ़ने की चिंताएं बढ़ गई हैं।
सोने का अजीब बर्ताव और RBI की चिंता
सोने को पारंपरिक तौर पर एक सुरक्षित निवेश (Safe-haven asset) माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से इसकी कीमतों में अजीब गिरावट देखी जा रही है। फरवरी के अंत से सोने की कीमत 15% से ज्यादा गिर चुकी है और 25 मार्च, 2026 तक यह लगभग $4,152 प्रति औंस पर आ गई, जबकि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा था। इस विपरीत चाल का मुख्य कारण मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंचे ब्याज दरों के बने रहने की उम्मीदें हैं, जो निवेशकों को सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों से दूर ले जा रही हैं।
तुलनात्मक स्थिति और RBI का दखल
भारत का मौजूदा फॉरेक्स रिजर्व स्तर $698.346 अरब अभी भी काफी बड़ा है, लेकिन यह चीन, जापान और स्विट्जरलैंड जैसे देशों से कम है। ऐतिहासिक रूप से, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये को संभालने और उसकी वैल्यू को स्थिर रखने के लिए करेंसी मार्केट में सक्रिय रहा है। ऐसे समय में जब मार्केट में तनाव बढ़ा था, RBI ने डॉलर बेचकर यानी मार्केट में डॉलर की सप्लाई बढ़ाकर रुपये को सहारा दिया, जिसके चलते पिछले कुछ हफ्तों में रिजर्व में कमी देखी गई। उदाहरण के लिए, 6 मार्च, 2026 को समाप्त हफ्ते में, RBI ने बड़े पैमाने पर डॉलर बेचे थे, जिससे रिजर्व में $11.68 अरब की कमी आई थी।
भविष्य की राह: चुनौतियों से निपटना
भू-राजनीतिक अस्थिरता, कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक निवेशकों की बदलती भावनाओं के बीच, भारतीय रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार में अभी और अस्थिरता रहने की संभावना है। रिजर्व के एक अहम हिस्से सोने के मूल्य में गिरावट, मुद्रा के झटकों के खिलाफ बफर के तौर पर इसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करती है। लगातार FII Outflows के चलते RBI को और अधिक दखल देना पड़ सकता है, जिससे रिजर्व और घट सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि रुपया दबाव में रह सकता है, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता बनी हुई है और ब्याज दरों के ऊंचे रहने की उम्मीदें भी कायम हैं। RBI के लिए महत्वपूर्ण होगा कि वह अपनी क्षमता का इस्तेमाल करते हुए विदेशी मुद्रा भंडार को खतरनाक स्तर तक घटने से रोके।