विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी सेंध!
15 मई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) $8.094 अरब घटकर $688.894 अरब पर आ गया है। यह पिछले हफ्ते के $6.295 अरब की बढ़त के बिल्कुल विपरीत है, जिसने भंडार को $696.988 अरब तक पहुंचाया था। आपको बता दें कि फरवरी के आखिर में यह रिकॉर्ड $728.494 अरब के स्तर पर था।
रुपये को बचाने की कोशिश
अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव, खासकर मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्षों के कारण भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ा है। इस दबाव को कम करने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को सहारा देने के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर बेचे। इसी का नतीजा है कि विदेशी मुद्रा भंडार में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने और गैर-जरूरी विदेशी यात्रा व सोने की खरीदारी से बचने की अपील की है।
डॉलर और सोने के भंडार में कमी
विदेशी मुद्रा संपत्ति, जो कि भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा है, $6.483 अरब घटकर $545.904 अरब रह गई। यह संपत्ति यूरो, पाउंड और येन जैसी प्रमुख मुद्राओं में रखी जाती है और इनके मूल्य में उतार-चढ़ाव आता रहता है।
इसके साथ ही, भारत के सोने के भंडार का मूल्य भी $1.536 अरब कम होकर $119.317 अरब हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ विशेष आहरण अधिकार (SDR) में $49 मिलियन की कमी आई है, जिससे यह $18.824 अरब पर आ गया है। IMF के साथ भारत की रिजर्व पोजीशन में भी $25 मिलियन की गिरावट दर्ज की गई है, जो अब $4.85 अरब है।
आगे क्या?
यह गिरावट RBI के रुपये को अवमूल्यन से बचाने के सक्रिय हस्तक्षेप का नतीजा है। हालांकि यह मुद्रा की स्थिरता के लिए जरूरी है, लेकिन इससे भंडार का उपयोग होता है जो समय के साथ बनाया गया था।
अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारत का भंडार अभी भी मजबूत है, लेकिन गिरावट की दर पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। चीन जैसे देश के पास अभी भी कहीं ज्यादा भंडार है। भारत का वर्तमान स्तर, अपने चरम से नीचे होने के बावजूद, बाहरी झटकों के खिलाफ एक बफर प्रदान करता है। लेकिन, बढ़ती वैश्विक कमोडिटी कीमतें और पूंजी प्रवाह में संभावित बदलाव भंडार की वृद्धि को चुनौती दे सकते हैं।
RBI का यह हस्तक्षेप तब तक जारी रह सकता है जब तक कि वैश्विक दबाव बना रहता है। भंडार में और गिरावट भविष्य में मुद्रा के झटकों या बाहरी ऋणों से निपटने की केंद्रीय बैंक की क्षमता को सीमित कर सकती है। सरकार द्वारा की जा रही संरक्षण की अपीलें भी अंतर्निहित आर्थिक कमजोरियों को उजागर करती हैं।
भविष्य में भंडार का स्तर भू-राजनीतिक घटनाओं, कमोडिटी की कीमतों और RBI की नीतियों पर निर्भर करेगा। निर्यात में मजबूती और विदेशी निवेश का प्रवाह भंडार को फिर से बनाने के लिए महत्वपूर्ण होंगे। विश्लेषक RBI के हस्तक्षेप की रणनीति या रुपये की स्थिरता पर किसी भी बदलाव के लिए केंद्रीय बैंक के संचार पर नजर रखेंगे।
