India की GDP ग्रोथ का अनुमान: Nomura की रिपोर्ट में 6.8% की रफ्तार, पर ग्लोबल रिस्क से सावधान!

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
India की GDP ग्रोथ का अनुमान: Nomura की रिपोर्ट में 6.8% की रफ्तार, पर ग्लोबल रिस्क से सावधान!
Overview

Nomura की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की GDP ग्रोथ FY27 में **6.8%** रहने का अनुमान है। हालांकि, साल की पहली छमाही में यह **6.3%** से **6.7%** के बीच थोड़ी धीमी रह सकती है, जबकि दूसरी छमाही में रिकवरी के साथ **7.1%** से **7.2%** तक पहुंच सकती है।

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FY27 के लिए India की Growth Story: डोमेस्टिक डिमांड मजबूत, पर ग्लोबल रिस्क भी भारी!

Nomura की रिपोर्ट बताती है कि FY27 की पहली छमाही में भारत की GDP ग्रोथ 6.3% से 6.7% के बीच धीमी रह सकती है। इसका मुख्य कारण सप्लाई-साइड (supply-side) की चुनौतियां हैं जो मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन, अच्छी खबर यह है कि घरेलू मांग (domestic demand) मजबूत रहने की उम्मीद है, जो इकोनॉमी को गंभीर गिरावट से बचाएगी। इसी मजबूत मांग के सहारे साल की दूसरी छमाही में ग्रोथ बढ़कर 7.1% से 7.2% तक पहुंचने की संभावना है। पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY) 2027 के लिए Nomura का समग्र अनुमान 6.8% ग्रोथ का है।

Nomura का 6.8% का अनुमान कई अन्य बड़े संस्थानों के अनुमानों के बीच आता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और एशियाई विकास बैंक (ADB) ने 6.9% ग्रोथ का अनुमान लगाया है, जबकि वर्ल्ड बैंक 6.6% की बात कर रहा है। मूडीज (Moody's) 6%, UNESCAP 6.4%, स्टैंडर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered) 6.4% और डेलॉइट (Deloitte) 6.6% से 6.9% के बीच अनुमान लगा रहे हैं। वहीं, क्रिसिल (Crisil) का अनुमान 7.1% है, यह मानते हुए कि पश्चिम एशिया में कोई बड़ा संघर्ष नहीं होगा।

इस पूरे अनुमान में सबसे बड़ा 'लेकिन' पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) है। भारत अपनी 85% कच्ची तेल (crude oil) की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक तेल की कीमतों में अस्थिरता देश की इकोनॉमी के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकती है। Nomura का कहना है कि तेल की कीमतों में हर $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी से महंगाई (inflation) लगभग 0.5% बढ़ सकती है। ऐतिहासिक रूप से भी देखें तो, जब 2012-2014 के दौरान तेल की कीमतें औसतन $111 प्रति बैरल थीं, तब भारत की GDP ग्रोथ सिर्फ 5.7% पर सिमट गई थी। वहीं, 2023-2025 के बीच $85 प्रति बैरल पर ग्रोथ 7.4%-7.2% रही थी। वर्तमान में तेल की बढ़ती कीमतें और प्रमुख शिपिंग रूट्स (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) में संभावित रुकावटें भारत के इंफ्लेशन (inflation) और करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) के लिए सीधा खतरा हैं। Nomura ने FY27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 4.5% और CAD का अनुमान 1.6% कर दिया है, जो कि चिंता का विषय है।

सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने और एक्सपोर्टर्स को लॉजिस्टिकल सपोर्ट जैसे कदम उठा रही है। अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के साथ ट्रेड एग्रीमेंट्स एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, सप्लाई चेन की दिक्कतें और बढ़ती ईंधन लागत छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) पर सीधा असर डाल रही हैं। यह सेक्टर पहले से ही प्रोडक्शन कट और लेबर अस्थिरता का सामना कर रहा है, और अगर यह दबाव बना रहा तो नौकरियों का भी संकट पैदा हो सकता है।

इन तमाम बाहरी जोखिमों के बावजूद, भारत की घरेलू मांग (domestic demand) ही ग्रोथ का मुख्य इंजन बनी रहेगी। उम्मीद है कि सरकार की नीतियां, संरचनात्मक सुधार (structural reforms) और वैश्विक व्यापार तनाव में कमी आने से इकोनॉमी में रिकवरी आएगी। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाएं भी मीडियम-टर्म ग्रोथ को 7% के आसपास रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हालांकि, पूरी आर्थिक तस्वीर अभी भी वैश्विक घटनाओं के विकास पर टिकी है।

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