Union Budget 2026-27 में सरकार ने आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने और राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने की कोशिश की है। एक बड़ा रणनीतिक बदलाव यह है कि फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) को जीडीपी के प्रतिशत के बजाय डेट-टू-जीडीपी रेशियो (Debt-to-GDP Ratio) को मीडियम-टर्म में 50% तक लाने पर फोकस किया जाएगा, जिसका लक्ष्य FY31 तक हासिल करना है। FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट का अनुमान 4.3% रखा गया है, जो FY26 के अनुमानित 4.4% से मामूली सुधार है।
बॉन्ड मार्केट पर बढ़ता बोझ
सरकार का विकास पर जोर काफी हद तक उधार लेने की बड़ी योजनाओं पर टिका है। FY27 के लिए केंद्र सरकार का ग्रॉस मार्केट बॉरोइंग (Gross Market Borrowing) ₹17.2 लाख करोड़ तय किया गया है, जो पिछले साल से 18% ज्यादा है। वहीं, नेट बॉरोइंग (Net Borrowing) ₹11.7 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। यह उधार इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि निवेशकों की मांग कमजोर पड़ गई है। बैंकों का सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश कम हुआ है, क्योंकि उनकी डिपॉजिट ग्रोथ क्रेडिट एक्सपेंशन से पिछड़ रही है, जिसके चलते क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो 82% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सप्लाई बढ़ने और डिमांड कम होने के कारण बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) पर दबाव बढ़ा है, और बेंचमार्क 10-साल की सरकारी सिक्योरिटी यील्ड 6.7% के करीब मंडरा रही है। इस स्थिति में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMOs) के जरिए लिक्विडिटी बनाए रखने की जरूरत पड़ेगी।
राज्यों की खस्ताहाल स्थिति से सप्लाई का दबाव
ऊपर से, राज्य सरकारों का फिस्कल परफॉरमेंस भी चिंता बढ़ा रहा है। FY27 में उनका फिस्कल डेफिसिट GSDP का 3.2% रहने का अनुमान है। वहीं, राज्यों से कुल ₹13 लाख करोड़ की सरकारी सिक्योरिटीज जारी होने की उम्मीद है। इस तरह, केंद्र और राज्यों को मिलाकर FY27 में सरकारी सिक्योरिटीज की कुल ग्रॉस सप्लाई ₹30.2 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है। राज्यों का बढ़ता कर्ज, जो केंद्र की तुलना में कम पारदर्शी है, फिस्कल कंसॉलिडेशन के प्रयासों को कमजोर कर सकता है।
ग्लोबल दबाव और निवेशकों का सेंटिमेंट
घरेलू बॉन्ड मार्केट की मुश्किलें ग्लोबल फिस्कल दबावों से और बढ़ जाती हैं। कोविड-19 के बाद विकसित देशों में सरकारी कर्ज तेजी से बढ़ा है, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (US Treasury Yield) बढ़ी हैं, जो उभरते बाजारों की यील्ड के लिए एक फ्लोर बनाती हैं। इस ग्लोबल माहौल, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और ट्रेड फ्रिक्शन की संभावनाओं के बीच विदेशी निवेशकों का सेंटिमेंट प्रभावित हो रहा है। बॉन्ड मार्केट में विदेशी पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI) को आकर्षित करने के प्रयास चल रहे हैं, लेकिन रिकॉर्ड उधार की बढ़ती सप्लाई आने वाले समय में बॉरोइंग कॉस्ट बढ़ने का परीक्षण करेगी।