कर्ज़ का पहाड़ खड़ा करेगी सरकार!
भारत सरकार ने अगले फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए ₹16.09 लाख करोड़ के ग्रॉस बॉरोइंग (Gross Borrowing) का लक्ष्य तय किया है। अच्छी-खासी रकम, करीब ₹8.20 लाख करोड़, इसी फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही (H1) में ही जुटाई जाएगी। यह प्लान सरकार की बड़ी फाइनेंसिंग जरूरतों को दर्शाता है, जो फिस्कल डेफिसिट को कंट्रोल करने और इंफ्रास्ट्रक्चर पर कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) को बढ़ाने के लिए है। अच्छी बात यह है कि यह रकम पहले सोचे जा रहे ₹17.20 लाख करोड़ से कम है, क्योंकि सरकार ने सिक्योरिटी स्विच (Security Switch) जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल किया है।
बॉन्ड मार्केट में हलचल, यील्ड्स चढ़ीं
इस बड़े ऐलान के साथ ही बॉन्ड मार्केट (Bond Market) में हलचल मच गई है। सरकारी बॉन्ड यील्ड्स (Bond Yields) एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 6.78% के पार जा चुकी है, जो इस भारी कर्ज की सप्लाई का नतीजा है।
मैच्योरिटीज़ (Maturities) और ग्रीन बॉन्ड्स पर फोकस
सरकार 3 साल से लेकर 50 साल तक की मैच्योरिटी वाली बॉन्ड जारी करेगी, जिसमें 10-वर्षीय बॉन्ड्स पर खास ध्यान रहेगा। यह कुल जारी होने वाले कर्ज़ का करीब 29% हिस्सा होगा। इसके अलावा, सरकार पहली छमाही में ₹15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (Sovereign Green Bonds) भी जारी करेगी। हालांकि, पिछले ग्रीन बॉन्ड इश्यूज़ को यील्ड एक्सेप्टेंस (Yield Acceptance) को लेकर कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।
RBI की लिक्विडिटी (Liquidity) सपोर्ट
छोटी अवधि की नकदी की जरूरतों और लिक्विडिटी (Liquidity) को संभालने के लिए, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने H1 FY27 के लिए ** ₹2.5 लाख करोड़** की वेज एंड मीन्स एडवांसेज (Ways and Means Advances - WMA) लिमिट तय की है। सरकार FY27 में ₹2.5 ट्रिलियन के बॉन्ड स्विच (Bond Switch) भी करने की योजना बना रही है, जिसमें पुराने बॉन्ड्स को नए, लंबी अवधि वाले बॉन्ड्स से बदला जाएगा।
एनालिस्ट्स (Analysts) को यील्ड्स में और तेज़ी का डर
कई एनालिस्ट्स, जैसे कि नोमुरा होल्डिंग्स (Nomura Holdings) और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज (ICICI Securities), का मानना है कि 10-वर्षीय यील्ड जल्द ही 7% तक पहुंच सकती है। डीबीएस बैंक (DBS Bank) को अगले तीन महीनों में यील्ड्स के 6.95% तक पहुंचने की उम्मीद है। यील्ड्स बढ़ने का मतलब है सरकार, कंपनियों और आम लोगों के लिए उधार लेना महंगा हो जाएगा, जिससे आर्थिक विकास धीमा पड़ सकता है। ₹17.2 ट्रिलियन का यह भारी-भरकम कुल बॉरोइंग प्लान, जो पिछले साल से 17% ज्यादा है, मार्केट पर दबाव डाल सकता है।