रेवेन्यू कलेक्शन लक्ष्य के करीब
सरकार फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए अपना रिवाइज्ड ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू (GTR) का लक्ष्य शायद पूरा न कर पाए। फरवरी 2026 तक, ₹34.19 लाख करोड़ का कलेक्शन हुआ है, जबकि लक्ष्य ₹40.77 लाख करोड़ का था। मार्च में ₹6.58 लाख करोड़ की कमी को पूरा करना बाकी है। पूरे साल के अनुमान को छूने के लिए मार्च में कलेक्शन में पिछले साल की तुलना में 11.38% की वृद्धि की जरूरत होगी, जो कि अप्रैल-फरवरी के 6.7% ग्रोथ रेट से काफी ज्यादा है।
लेकिन अच्छी खबर यह है कि 4.4% जीडीपी के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) का लक्ष्य अभी भी पूरा होने की उम्मीद है। इसकी मुख्य वजह विभिन्न मंत्रालयों में खर्च में कटौती और अप्रत्यक्ष करों (Indirect Taxes) से मिली मजबूत आय है।
डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स का अलग-अलग प्रदर्शन
राजस्व की कमी का मुख्य कारण डायरेक्ट टैक्स, खासकर पर्सनल इनकम टैक्स (PIT) में धीमी ग्रोथ रही है। 17 मार्च 2026 तक, ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 4.86% बढ़कर ₹27.15 लाख करोड़ हो गया। वहीं, रिफंड के बाद नेट कलेक्शन 7.19% बढ़कर ₹22.80 लाख करोड़ रहा, जो कि रिवाइज्ड अनुमान के 9% ग्रोथ टारगेट से कम है।
कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन अच्छा रहा, जिसमें नेट कलेक्शन 13% बढ़कर ₹10.92 लाख करोड़ हो गया, जो रिवाइज्ड टारगेट से ज्यादा है। दूसरी ओर, पर्सनल इनकम टैक्स कलेक्शन सिर्फ 2.7% बढ़कर ₹11.32 लाख करोड़ रहा, जो ₹13.12 लाख करोड़ के रिवाइज्ड टारगेट से काफी पीछे है। इस धीमी ग्रोथ की एक वजह यूनियन बजट में किए गए टैक्स राहत उपाय हैं, जिसने नई टैक्स व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक की सालाना टैक्सेबल इनकम को टैक्स-फ्री कर दिया था। टैक्स रिफंड में 18.82% की कमी ने नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन को कुछ हद तक सहारा दिया।
इनडायरेक्ट टैक्स से मिली बड़ी राहत
इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन ने उम्मीदों को पार कर लिया है। यह रिवाइज्ड FY26 टारगेट का 101.2% रहा। कस्टम्स ड्यूटी, एक्साइज ड्यूटी और सेंटर के हिस्से वाले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) का कुल कलेक्शन ₹15.53 लाख करोड़ के रिवाइज्ड अनुमान से ज्यादा रहा। कस्टम्स ड्यूटी 102%, एक्साइज ड्यूटी 101% और सेंट्रल जीएसटी (CGST) कलेक्शन अपने-अपने रिवाइज्ड टारगेट के 100.8% पर रहा। इनडायरेक्ट टैक्स की यह मजबूत परफॉर्मेंस बताती है कि आर्थिक गतिविधियां और टैक्स नियमों का पालन ठीक ठाक चल रहा है, जिसने डायरेक्ट टैक्स की कमी को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई।
भविष्य की वित्तीय सेहत पर चिंताएं
हालांकि, FY26 के लिए 4.4% जीडीपी का राजकोषीय घाटा लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद है, लेकिन यह अप्रत्यक्ष करों से डायरेक्ट टैक्स की कमी को पूरा करने पर निर्भर करता है। पर्सनल इनकम टैक्स कलेक्शन में कमी को पूरा करने के लिए अप्रत्यक्ष करों पर निर्भरता, जो सीधे खपत (Consumption) से जुड़े हैं, यह बताती है कि कॉरपोरेट प्रॉफिट तो मजबूत हैं, लेकिन घरेलू आय में वृद्धि और ग्राहकों की खर्च करने की क्षमता पर दबाव हो सकता है। खपत को बढ़ावा देने के लिए की गई टैक्स राहत का असर सीधे PIT कलेक्शन पर पड़ा है, जो पॉलिसी लक्ष्यों और रेवेन्यू टारगेट्स के बीच संतुलन को दर्शाता है।
भू-राजनीतिक तनाव जैसे बाहरी कारक एनर्जी की कीमतों को बढ़ा सकते हैं, जिससे फ्यूल और फर्टिलाइजर पर सब्सिडी का खर्च बढ़ सकता है। इससे कॉरपोरेट प्रॉफिटेबिलिटी और FY27 में कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन और डिविडेंड (Dividend) की प्राप्ति प्रभावित हो सकती है। रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि अगर एनर्जी की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो FY27 के 4.5% (बजट में 4.3%) राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को खतरा हो सकता है। डिसइन्वेस्टमेंट (Disinvestment) टारगेट में कमी भी नॉन-टैक्स रेवेन्यू पर दबाव डाल सकती है, जैसा कि FY25 में अनुमान लगाया गया था।
आगे क्या: FY27 के लिए वित्तीय लक्ष्य
आगे देखें तो, FY27 के लिए यूनियन बजट में 4.3% जीडीपी का राजकोषीय घाटा लक्ष्य रखा गया है, जो FY26 के 4.4% से थोड़ा कम है। FY27 में ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू 8% बढ़कर ₹44.04 लाख करोड़ होने का अनुमान है। इसमें डायरेक्ट टैक्स में 11.4% की वृद्धि की उम्मीद है, जबकि इनडायरेक्ट टैक्स ग्रोथ घटकर करीब 3% रहने का अनुमान है। सरकार कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) को लगभग ₹12.2 लाख करोड़ पर बनाए रखने की योजना बना रही है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर फोकस को दर्शाता है। डेट-टू-जीडीपी (Debt-to-GDP) अनुपात FY26 में अनुमानित 56.1% से घटकर FY27 में 55.6% होने का अनुमान है, जो 2031 तक 50% के लॉन्ग-टर्म लक्ष्य की ओर बढ़ने का संकेत है।