India Trade: ग्लोबल मंदी का नहीं असर! एक्सपोर्ट्स में बंपर उछाल, पर चीन से बढ़ती टेंशन

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
India Trade: ग्लोबल मंदी का नहीं असर! एक्सपोर्ट्स में बंपर उछाल, पर चीन से बढ़ती टेंशन
Overview

India's trade in FY2025-26 proved resilient, resisting global tariff hikes and geopolitical friction. Government support and market diversification boosted exports and imports, maintaining steady trade partner links. While the U.S. remains a top destination, a rapidly growing trade deficit with China is a significant concern.

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फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में India का Trade (-भारत का ट्रेड-) ग्लोबल मंदी (-Global Slowdown-) और भू-राजनीतिक तनाव (-Geopolitical Tensions-) के बावजूद काफी मजबूत रहा। इंडस्ट्री बॉडी ASSOCHAM के मुताबिक, अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक (-eleven months-), देश के Trade Flows (-ट्रेड फ्लो-) और Supply Chains (-सप्लाई चेन-) में गजब की स्थिरता देखने को मिली। यह स्थिरता सरकार की सक्रिय नीतियों (-Government Measures-) और Indian Businesses (-भारतीय बिजनेसमैन-) की तेज़ प्रतिक्रियाओं के चलते संभव हुई। अमेरिका (-U.S.-) भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट बना रहा, जहाँ इन ग्यारह महीनों में $79.3 बिलियन के शिपमेंट हुए, जो कुल एक्सपोर्ट्स का लगभग 19.7% रहा। UAE, चीन, नीदरलैंड्स और यूके (-UK-) के साथ भी Trade (-ट्रेड-) संबंध मजबूत बने रहे। खास बात यह है कि हांगकांग (-Hong Kong-) भी टॉप टेन एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन्स में शामिल हो गया, जो ग्लोबल झटकों को झेलने में मदद करने वाले Diverse Approach (-डाइवर्सिफाइड अप्रोच-) को दर्शाता है।

भारत सरकार (-Indian Government-) के Trade (-ट्रेड-) को सपोर्ट करने वाले प्रयासों का अहम रोल रहा। RoDTEP स्कीम का विस्तार, भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) जैसे प्रोग्राम्स, और Advance Authorisation (-एडवांस ऑथराइजेशन-) व EPCG स्कीम्स के तहत मिली राहत ने Exporters (-एक्सपोर्टर्स-) को ज़रूरी सहारा दिया है। इन Policies (-पॉलिसियों-) का मकसद Taxes (-टैक्स-) की भरपाई करना, Competitiveness (-कॉम्पिटिटिवनेस-) बढ़ाना और Market Access (-मार्केट एक्सेस-) को बेहतर बनाना है, ताकि भारतीय कंपनियां Global Uncertainty (-ग्लोबल अनिश्चितताओं-) के बावजूद सफल हो सकें। Export Promotion Mission (EPM) के तहत फाइनेंशियल ईयर 2025-26 से 2030-31 तक बड़ा Fund (-बड़ा फंड-) प्लान किया गया है, जो खासकर छोटे और मध्यम दर्जे के Businesses (MSMEs) के लिए Trade Finance (-ट्रेड फाइनेंस-) और Logistics (-लॉजिस्टिक्स-) को सपोर्ट करेगा। यह सपोर्ट इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि 2026 तक Global Trade Volume Growth (-ग्लोबल ट्रेड वॉल्यूम ग्रोथ-) के 2025 के 3.8% से घटकर 2.2% रहने का अनुमान है।

India (-भारत-) का Trade (-ट्रेड-) ऐसे समय में मज़बूती दिखा रहा है जब दुनिया बड़े बदलावों से गुज़र रही है। 2025 में World Trade (-वर्ल्ड ट्रेड-) ने उम्मीद से बेहतर 3.8% की ग्रोथ देखी, जिसका एक कारण अमेरिका (-U.S.-) की नई Tariffs (-टैरिफ-) लागू होने से पहले किए गए शिपमेंट थे। 2026 में यह ग्रोथ घटकर 2.2% रहने का अनुमान है। India (-भारत-) जैसी Emerging Economies (-उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं-) अच्छा कर रही हैं। अनुमान है कि भारत की GDP (-जीडीपी-) ग्रोथ फाइनेंशियल ईयर 2025-26 और 2026-27 में 6.5% से 7.4% के बीच रहेगी, जो Regional Averages (-रीजनल एवरेज-) से काफी ज़्यादा है। Strong Domestic Economic Activity (-मज़बूत डोमेस्टिक इकोनॉमिक एक्टिविटी-) Exports (-एक्सपोर्ट्स-) के लिए एक ठोस आधार प्रदान करती है। हालांकि, दुनिया का माहौल अब भी Volatile (-अस्थिर-) है, जिसमें Middle East (-मिडिल ईस्ट-) में जारी Geopolitical Tensions (-भू-राजनीतिक तनाव-) और अमेरिका (-U.S.-) जैसे देशों से लगातार Tariffs (-टैरिफ-) लगे हुए हैं। ये मुद्दे Supply Chain (-सप्लाई चेन-) में देरी और Prices Swings (-कीमतों में उतार-चढ़ाव-) पैदा कर रहे हैं, जिसका असर Global Trade (-ग्लोबल ट्रेड-) पर पड़ रहा है। Products (-प्रोडक्ट्स-) और Markets (-मार्केट्स-) का Diversification (-डाइवर्सिफिकेशन-) भारत के लिए अहम रहा है, जिससे उसे 2025 में लगाए गए बड़े U.S. Tariffs (-अमेरिकी टैरिफ-) जैसे झटकों से उबरने में मदद मिली है।

India (-भारत-) के Trade (-ट्रेड-) की मज़बूती के सामने एक बड़ी चुनौती चीन (-China-) के साथ बढ़ता Trade Deficit (-ट्रेड डेफिसिट-) है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के अप्रैल से फरवरी (-April to February-) तक, भारत ने चीन से $119.6 बिलियन का Import (-इम्पोर्ट-) किया, जबकि Export (-एक्सपोर्ट-) केवल $17.5 बिलियन का हुआ। इससे $102.1 बिलियन का भारी-भरकम Deficit (-डेफिसिट-) पैदा हुआ। यह असंतुलन चीन के Industrial Goods (-इंडस्ट्रियल गुड्स-) जैसे Electronics (-इलेक्ट्रॉनिक्स-), Machinery (-मशीनरी-) और Pharma Ingredients (-फार्मा इंग्रेडिएंट्स-) की भारत की बढ़ती ज़रूरत को दिखाता है, जिससे पता चलता है कि शायद Domestic Production (-डोमेस्टिक प्रोडक्शन-) सस्ते Imports (-इम्पोर्ट-) का मुकाबला नहीं कर पा रहा है। यह निर्भरता जोखिम भरी है, खासकर तब जब Trade (-ट्रेड-) का इस्तेमाल तेजी से Politically Used (-राजनीतिक हथियार-) के तौर पर हो रहा है और Geopolitical (-भू-राजनीतिक) रिश्ते तेज़ी से बदल सकते हैं। Full-year (-पूरे फाइनेंशियल ईयर-) के लिए चीन के साथ Deficit (-डेफिसिट-) $111.4 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसे ठीक करने के लिए Strategic Policies (-स्ट्रैटेजिक पॉलिसियों-) की ज़रूरत होगी।

अपनी Overall (-ओवरऑल-) Strength (-स्ट्रेंथ-) के अलावा, India (-भारत-) का Trade (-ट्रेड-) Sector Structural Weaknesses (-स्ट्रक्चरल वीकनेसेस-) का भी सामना कर रहा है। जैसा कि बताया गया है, China (-चीन-) के साथ बढ़ता Deficit (-डेफिसिट-) Domestic Industry (-डोमेस्टिक इंडस्ट्री-) को नुकसान पहुंचा सकता है और Economic Dependence (-इकोनॉमिक डिपेंडेंस-) बढ़ा सकता है। इसके अलावा, Middle East (-मिडिल ईस्ट-) जैसे इलाकों में Geopolitical Tensions (-भू-राजनीतिक तनाव-) से Oil Prices (-तेल की कीमतें-) बढ़ रही हैं, जो Government Finances (-सरकारी खजाने-) पर दबाव डाल सकती हैं और Trade Deficit (-ट्रेड डेफिसिट-) को और बिगाड़ सकती हैं। इसे Services Trade (-सर्विसेज ट्रेड-) में Surplus (-सरप्लस-) से कुछ हद तक Offset (-बैलेंस-) किया जा रहा है। Currency (-करेंसी-) में उतार-चढ़ाव, Shipping Costs (-शिपिंग कॉस्ट-) में बढ़ोतरी और Global Financing (-ग्लोबल फाइनेंसिंग-) की मुश्किल स्थितियां, खासकर छोटे और मध्यम Businesses (MSMEs) के लिए, लगातार Challenges (-चुनौतियां-) बनी हुई हैं। Export Growth (-एक्सपोर्ट ग्रोथ-) को जारी रखने के लिए, India (-भारत-) को इन Risks (-जोखिमों-) को Manage (-मैनेज-) करना होगा, नए Trade Deals (-ट्रेड डील्स-) के ज़रिए बेहतर Market Access (-मार्केट एक्सेस-) सुरक्षित करना होगा और Trade Imbalances (-ट्रेड इम्बैलेंसेस-) को सक्रिय रूप से दूर करना होगा।

India (-भारत-) के Trade (-ट्रेड-) के लिए Outlook (-आउटलुक-) Cautiously Positive (-सतर्कता के साथ पॉजिटिव-) है, जिसे Strong Domestic Economic Fundamentals (-मज़बूत डोमेस्टिक इकोनॉमिक फंडामेंटल्स-) और Government Strategies (-सरकारी रणनीतियों-) का सपोर्ट मिल रहा है। S&P Global Ratings (-S&P ग्लोबल रेटिंग्स-) ने फाइनेंशियल ईयर 2027 (-FY27-) के लिए India की GDP (-जीडीपी-) ग्रोथ 7.1% रहने का अनुमान लगाया है, जबकि Crisil का अनुमान है कि Free Trade Agreements (FTAs) से प्रेरित होकर 2030 तक Exports (-एक्सपोर्ट्स-) में सालाना 13% की ग्रोथ जारी रहेगी। Goldman Sachs को उम्मीद है कि 2026 में India की GDP (-जीडीपी-) 6.9% की दर से बढ़ेगी। U.S. (-अमेरिका-) के साथ हाल ही में हुए Tariff Reduction (-टैरिफ रिडक्शन-), जिसमें दरें 25% से घटकर 18% कर दी गई हैं, से Economy (-इकोनॉमी-) को बढ़ावा मिलना चाहिए और Trade (-ट्रेड-) की Uncertainty (-अनिश्चितता-) कम होनी चाहिए। ASSOCHAM का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए Total Merchandise Exports (-कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स-) $440 बिलियन से $450 बिलियन तक पहुंच जाएंगे, जो Ongoing Expansion (-निरंतर विस्तार-) का संकेत देता है। यह Positive Trend (-सकारात्मक ट्रेंड-) लगातार Policy Support (-पॉलिसी सपोर्ट-), नए Markets (-मार्केट्स-) की खोज और Global Trade (-ग्लोबल ट्रेड-) की Complexities (-जटिलताओं-) व मौजूदा Trade Imbalances (-ट्रेड इम्बैलेंसेस-) के प्रभावी प्रबंधन पर निर्भर करेगा।

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