Indian Economy: GDP ग्रोथ में भारत का दबदबा! 6.5% के अनुमान को 8.2% पर पहुंचाया

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Economy: GDP ग्रोथ में भारत का दबदबा! 6.5% के अनुमान को 8.2% पर पहुंचाया
Overview

Fiscal Year 2024 (FY24) के लिए India की GDP ग्रोथ **8.2%** रही, जो इकोनॉमिक सर्वे के **6.5%** के अनुमान से कहीं ज्यादा है। यह शानदार प्रदर्शन घरेलू खपत (domestic consumption) और निवेश (investment) की मजबूती के दम पर संभव हुआ, भले ही ग्लोबल इकोनॉमी चुनौतियों से घिरी रही और मॉनेटरी पॉलिसी टाइट थी।

उम्मीदों से कहीं आगे निकली ग्रोथ

भारतीय इकोनॉमी ने उम्मीदों को पछाड़ते हुए 8.2% का GDP ग्रोथ रेट हासिल किया है। इकोनॉमिक सर्वे ने FY24 के लिए 6.5% की ग्रोथ का अनुमान लगाया था, जिसे भारत की अर्थव्यवस्था ने काफी पीछे छोड़ दिया। यह साफ दिखाता है कि अर्थव्यवस्था की असल ताकत को शायद कम आंका गया था।

ग्रोथ के मुख्य कारण (Drivers of Strong Growth)

इस बेहतरीन परफॉर्मेंस के पीछे कई घरेलू वजहें (domestic drivers) रहीं। उपभोक्ताओं की लगातार खर्च करने की क्षमता (consumer spending) और निवेश (investment) में सुधार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। खासकर, इंडस्ट्रियल सेक्टर में जबरदस्त तेजी देखी गई। मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट (manufacturing output) FY24 में 9.9% बढ़ा, जिसका मुख्य कारण क्रेडिट की आसान उपलब्धता और कैपिटल इन्वेस्टमेंट (capital investment) रहा। हालांकि, मॉनसून की दिक्कतों के कारण एग्रीकल्चर सेक्टर की ग्रोथ थोड़ी धीमी (1.4%) रही, लेकिन दूसरे सेक्टर्स ने इसकी भरपाई कर दी।

ग्लोबल इकोनॉमी का हाल और भारत की स्थिति

भारत की 8.2% की ग्रोथ दर, मौजूदा मुश्किल ग्लोबल इकोनॉमी के मुकाबले काफी प्रभावशाली है। IMF के अनुमान के मुताबिक, अमेरिका और यूरोप जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ दर काफी धीमी रही (IMF: 1.7%, World Bank: 2.6%)। यह अंतर भारत की सापेक्षिक मजबूती को दर्शाता है। दुनिया भर में महंगाई से लड़ने के लिए ब्याज दरें (interest rates) ऊंची रखी गईं, जिससे ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में टाइटनेस थी। इसके बावजूद, भारत में लगातार कैपिटल फ्लो (capital flows) बना रहा, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट (current account deficit) घटकर GDP का महज 0.7% रह गया, जो पिछले साल 2% था।

चुनौतियों से पार पाना

भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions), सप्लाई चेन (supply chain) की दिक्कतें और महंगाई से जुड़ी मॉनेटरी टाइटनिंग (monetary tightening) जैसे जोखिमों का अंदेशा था। लेकिन, इनका भारत की इकोनॉमी पर असर उम्मीद से कम रहा या उसे बेहतर तरीके से संभाला गया। उदाहरण के तौर पर, ग्लोबल मंदी (global recession) या टेक जॉब्स के खत्म होने के डर ने घरेलू ग्रोथ को धीमा नहीं किया। भारत ने अपना फिस्कल डेफिसिट (fiscal deficit) भी कंट्रोल में रखा, जो FY24 में घटकर GDP का 5.6% रह गया, जबकि पिछले साल यह 6.4% था। इस स्टेबल फिस्कल एनवायरनमेंट (fiscal environment), स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स (structural reforms) और मजबूत घरेलू मांग (domestic demand) ने भारत को ग्लोबल प्रेशर के खिलाफ लचीला (resilient) बनाए रखा और ग्रोथ को शुरुआती अनुमानों से कहीं आगे ले जाने में मदद की।

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