अप्रैल 2026 में नॉन-रेसिडेंट इंडियंस (NRIs) के फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) खातों में जमा राशि में 39% की भारी गिरावट आई है, जो कि $166 मिलियन तक पहुंच गई है। हालांकि, इस दौरान NRE (नॉन-रेजिडेंट एक्सटर्नल) रुपए खातों में 40% का जोरदार उछाल देखा गया, जिससे कुल एनआरआई जमा राशि लगभग स्थिर बनी हुई है। यह बदलाव एनआरआई निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
क्या हुआ?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अप्रैल 2026 के नए आंकड़ों से पता चलता है कि फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) डिपॉजिट में साल-दर-साल 39% की गिरावट आई है। अप्रैल 2025 में जहां $272 मिलियन का इनफ्लो था, वहीं अप्रैल 2026 में यह घटकर $166 मिलियन रह गया। इसके बावजूद, सभी नॉन-रेजिडेंट डिपॉजिट स्कीमों में कुल मिलाकर $764 मिलियन का इनफ्लो आया, जो पिछले साल के $751 मिलियन के आंकड़े से थोड़ा अधिक है।
इस स्थिरता की मुख्य वजह नॉन-रेजिडेंट एक्सटर्नल (NRE) रुपए खातों का शानदार प्रदर्शन रहा। अप्रैल 2026 में NRE खातों में इनफ्लो 40% बढ़कर $528 मिलियन हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में $376 मिलियन था। वहीं, नॉन-रेजिडेंट ऑर्डिनरी (NRO) खातों में 31% की गिरावट देखी गई और इसमें केवल $71 मिलियन का इनफ्लो आया।
FCNR और NRE के बीच इस बदलाव का महत्व
इस अंतर को समझना महत्वपूर्ण है। FCNR खाते एनआरआई को अमेरिकी डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं में पैसा जमा करने की सुविधा देते हैं। चूंकि पैसा विदेशी मुद्रा में रखा जाता है, इसलिए विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का जोखिम बैंक उठाता है। दूसरी ओर, NRE खाते भारतीय रुपये में रखे जाते हैं। जब एनआरआई NRE खातों का विकल्प चुनते हैं, तो वे मुद्रा जोखिम उठाते हैं या रुपए की मजबूती पर दांव लगाते हैं।
भारतीय बैंकों के लिए यह बदलाव अक्सर फायदेमंद होता है। जब एनआरआई NRE खातों में पैसा जमा करते हैं, तो बैंकों को रुपए की तरलता (Liquidity) मिलती है, जिसका उपयोग वे घरेलू ऋण देने के लिए कर सकते हैं, बिना विदेशी मुद्रा की अस्थिरता से बचाव की चिंता किए। NRE इनफ्लो में वृद्धि से पता चलता है कि विदेशी निवेशक रुपए-आधारित संपत्तियों (Rupee-denominated assets) को रखने में सहज हैं, जो घरेलू ब्याज दरों और मुद्रा स्थिरता की उम्मीदों से प्रभावित हो सकता है।
पूरे फाइनेंशियल ईयर का संदर्भ
अप्रैल में देखे गए रुझान 2025-26 के पूरे वित्तीय वर्ष (Financial Year) के व्यापक पैटर्न का हिस्सा हैं। पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए कुल एनआरआई जमा इनफ्लो $14.41 बिलियन रहा, जो वित्त वर्ष 2025 के $16.16 बिलियन से कम है।
इस वार्षिक गिरावट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा FCNR(B) खातों से आया, जो वित्त वर्ष 2026 में घटकर $946 मिलियन रह गए, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह आंकड़ा $7.08 बिलियन था। इसके विपरीत, NRE खातों ने लचीलापन दिखाया और पिछले साल के $4.71 बिलियन की तुलना में वित्त वर्ष 2026 में $7.94 बिलियन आकर्षित किए। NRO जमा में भी वृद्धि हुई, जो वित्त वर्ष 2025 के $4.37 बिलियन की तुलना में वित्त वर्ष 2026 में $5.53 बिलियन दर्ज की गई।
निवेशकों को आगे क्या देखना चाहिए
देखने वाला मुख्य कारक ब्याज दरों का माहौल है। एनआरआई जमा विदेशी देशों (जैसे अमेरिका) और भारत में ब्याज दरों के अंतर के प्रति संवेदनशील होते हैं। यदि वैश्विक ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं या बदलती हैं, तो यह भारतीय जमा योजनाओं की आकर्षण क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, बाजार प्रतिभागी RBI की तरलता और रुपए पर टिप्पणियों पर नजर रखेंगे ताकि यह समझा जा सके कि क्या NRE खातों को प्राथमिकता देना घरेलू बैंकिंग प्रणाली को लगातार धन उपलब्ध कराता रहेगा।
