इकोनॉमी की रफ्तार पर CEA का बड़ा भरोसा
भारत के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन का मानना है कि भारतीय इकोनॉमी (Economy) आने वाले फाइनेंशियल ईयर (FY27) में भी 7% से ज़्यादा की रफ्तार से बढ़ेगी। यह उम्मीद मजबूत घरेलू मांग (domestic demand), सरकारी खर्च (government spending) और सर्विस सेक्टर (services sector) के लगातार अच्छा प्रदर्शन करने पर टिकी है। IMF ने भी भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.5% कर दिया है, जबकि Nomura जैसे ब्रोकरेज 6.8% की ग्रोथ का अनुमान लगा रहे हैं।
भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती लागत का खतरा
लेकिन, इस ग्रोथ के रास्ते में कुछ बड़े रोड़े भी हैं। वेस्ट एशिया में जारी जंग (conflict) के कारण कच्चे तेल (crude oil) की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जो सीधे तौर पर भारत की इकोनॉमी (Economy) को प्रभावित करेगा। EY का अनुमान है कि अगर कच्चे तेल का भाव $120 प्रति बैरल तक पहुंच गया, तो भारत की GDP ग्रोथ घटकर करीब 6% रह सकती है और महंगाई (inflation) 6% तक जा सकती है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल इम्पोर्ट (import) करता है, जो उसे भू-राजनीतिक झटकों के प्रति बेहद संवेदनशील बनाता है।
मुनाफे में कंपनी, पर निवेश में क्यों सुस्ती?
एक और हैरान करने वाली बात यह है कि कंपनियां अच्छा खासा मुनाफा कमा रही हैं। COVID के बाद से कंपनियों के मुनाफे में सालाना औसतन 30.8% की बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद, प्राइवेट सेक्टर (private sector) की ओर से निवेश (investment) बहुत कम हो रहा है। यह आंकड़ा पिछले एक दशक से GDP का सिर्फ 10-12% बना हुआ है। यह एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि टिकाऊ ग्रोथ के लिए प्राइवेट इन्वेस्टमेंट बहुत जरूरी है।
करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) का बढ़ता दबाव
बाहरी मोर्चे पर भी कुछ मुश्किलें हैं। भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) यानी आयात (imports) और निर्यात (exports) के बीच का घाटा FY27 में बढ़कर GDP का करीब 2% तक पहुंच सकता है, जो FY26 में 1% से भी कम था। Crisil और HDFC Bank के मुताबिक, तेल और दूसरे जरूरी सामानों के आयात पर ज्यादा खर्च और विदेश से आने वाले पैसे (remittances) में कमी इस घाटे को बढ़ा सकती है।
फॉरेन इन्वेस्टमेंट (FDI) अभी भी मजबूत
अच्छी खबर यह है कि भारत विदेशी निवेशकों (foreign investors) के लिए अभी भी एक आकर्षक डेस्टिनेशन बना हुआ है। FY26 में $90 अरब से ज्यादा का फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) आने का अनुमान है। यह भारत की बढ़ती क्षमता और सरकारी नीतियों पर ग्लोबल निवेशकों के भरोसे को दिखाता है। प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) स्कीम भी कई सेक्टर्स में निवेश को बढ़ावा दे रही है।
महंगाई पर भी रहेगी नजर
फिलहाल महंगाई नियंत्रण में है (मार्च 2026 तक करीब 3.4%), लेकिन भविष्य में इसके बढ़ने का खतरा बना हुआ है। खराब मॉनसून या बढ़ती लागत सीधे उपभोक्ताओं पर भारी पड़ सकती है। RBI जहां FY27 के लिए महंगाई 4.6% रहने का अनुमान लगा रहा है, वहीं EY इसे 6% तक जाने की चेतावनी दे रहा है।
मुख्य चिंताएं: ऊर्जा सुरक्षा और निवेश की कमी
भारत के लिए सबसे बड़ी कमजोरी ऊर्जा पर उसकी भारी निर्भरता है। अगर वेस्ट एशिया से सप्लाई बाधित हुई, तो इसका सीधा असर इकोनॉमी (Economy) पर पड़ेगा। कच्चे तेल की हर $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का सालाना इंपोर्ट बिल $13-14 अरब बढ़ जाता है। इससे महंगाई, ट्रेड बैलेंस और रुपये पर दबाव पड़ता है।
अच्छी GDP ग्रोथ के बावजूद, कमजोर प्राइवेट सेक्टर इन्वेस्टमेंट (private sector investment) बताता है कि भविष्य में रिटर्न को लेकर आत्मविश्वास कम हो सकता है। यह इकोनॉमी की प्रोडक्टिव क्षमता को सीमित कर सकता है।
आगे की राह: ग्रोथ और स्थिरता का संतुलन
FY27 में भारत को ग्रोथ और स्थिरता के बीच सावधानी से संतुलन बनाना होगा। मजबूत घरेलू फंडामेंटल (fundamentals) मदद करेंगे, लेकिन लगातार ऊंचे एनर्जी प्राइस, निवेश की कमी और करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को मैनेज करना अहम होगा। एनर्जी सप्लाई को डायवर्सिफाई (diversify) करने और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने वाली नीतियों की जरूरत है ताकि ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच भी ग्रोथ की रफ्तार बनी रहे।
