India Economy: **7.4%** की रफ्तार! मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर चमके, सरकार की नीतियों का बड़ा असर

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Economy: **7.4%** की रफ्तार! मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर चमके, सरकार की नीतियों का बड़ा असर
Overview

भारत की अर्थव्यवस्था ने फाइनेंशियल ईयर (FY) 2026 में कमाल की ग्रोथ दिखाई है। रियल GDP ग्रोथ **7.4%** रही, जो पिछले साल के **6.5%** से काफी ज्यादा है। दूसरी तिमाही (Q2 FY26) में **8.2%** की मजबूत ग्रोथ दिखी, जिसका श्रेय मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को जाता है। सरकारी पहलों और मॉनेटरी ईजिंग (Monetary Easing) ने घरेलू कंजम्पशन (domestic consumption) को बढ़ावा दिया, जबकि ग्लोबल ट्रेड (global trade) की अनिश्चितताओं का असर कम रहा। FY26 के ये आंकड़े **2011-12** के बेस ईयर (base year) पर आधारित आखिरी अनुमान हैं, जिसके बाद एक बड़ा मेथोडोलॉजिकल (methodological) बदलाव होने वाला है।

नीतियों का बूस्टर डोज

इस शानदार परफॉरमेंस के पीछे सरकार की सोची-समझी आर्थिक रणनीति और समय पर की गई नीतियों का बड़ा हाथ है। इन पहलों ने घरेलू मांग को फिर से जगा दिया है और अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार दी है।

कैसे आया ग्रोथ में उछाल?

FY26 के दौरान, सरकार ने इनकम टैक्स में राहत और GST दरों के युक्तिकरण (rationalization) जैसे कई अहम कदम उठाए। इनसे कंजम्पशन डिमांड (consumption demand) को तगड़ा सहारा मिला और लोगों के खर्च में इजाफा हुआ। सरकारी नीतियों के साथ-साथ, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भी मॉनेटरी ईजिंग (monetary easing) की, जिससे पॉलिसी रेट्स में 125 बेसिस पॉइंट्स की कुल कटौती हुई। इससे बिज़नेस और कंज्यूमर्स दोनों के लिए कर्ज लेना सस्ता हुआ, जिससे निवेश और खर्च के लिए बेहतर माहौल बना।

घरेलू ताकत बनाम ग्लोबल चुनौतियां

भारत की अर्थव्यवस्था ने लगातार अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। जुलाई-सितंबर (FY26) की दूसरी तिमाही में ग्रोथ 8.2% पर पहुंच गई, जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे ज्यादा है। इस उछाल का मुख्य कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की शानदार परफॉरमेंस और सर्विस सेक्टर की मजबूती रही, खासकर फाइनेंशियल, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज में। दुनियाभर में ट्रेड (trade) को लेकर अनिश्चितताओं और टैरिफ (tariffs) के दबाव के बावजूद, मजबूत घरेलू कंजम्पशन (consumption) और पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (public capital expenditure) पर जोर ने इन बाहरी दबावों को काफी हद तक कम कर दिया। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन, एस महेंद्र देव का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर उम्मीद से कम रहा है। अनुमान है कि मजबूत घरेलू मांग FY27 में भी ग्रोथ को 6.5-7% के आसपास बनाए रखेगी।

बेस ईयर बदलाव का इंतजार

FY26 के ये अनुमान एक खास वजह से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये 2011-12 के बेस ईयर (base year) के तहत जारी की गई GDP सीरीज के आखिरी आंकड़े हैं। अब एक बड़ी मेथोडोलॉजिकल (methodological) बदलाव की तैयारी है, जिसमें भविष्य के सभी कैलकुलेशन के लिए 2022-23 को नया बेस ईयर बनाया जाएगा। इस बदलाव का मकसद ज्यादा मौजूदा डेटा सोर्स और बेहतर मेथोडोलॉजी को शामिल करना है, जिससे अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचना का ज्यादा सटीक आकलन हो सकेगा। नए बेस ईयर के साथ एडवांस एस्टिमेट्स (advance estimates) 27 फरवरी को जारी किए जाएंगे।

आगे का रास्ता और फिस्कल लक्ष्य

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने FY27 के लिए नॉमिनल GDP ग्रोथ (nominal GDP growth) 10% रहने का अनुमान जताया है, जो पिछले अनुमान 10.1% से थोड़ा कम है। सरकार ने FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट (fiscal deficit) को GDP का 4.3% रहने का लक्ष्य रखा है। पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (public capital expenditure) में लगातार निवेश से आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, एनालिस्ट्स (analysts) का मानना है कि फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI) इनफ्लो (inflows) में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे भारतीय रुपये (Indian Rupee) में मजबूती आ सकती है। भारत ने निर्यात (exports) के भी बड़े लक्ष्य रखे हैं, जिनका लक्ष्य 2032 तक 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचना है।

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