ग्रोथ की रफ्तार और बाजार की चाल
Motilal Oswal ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए 7.8% रियल GDP ग्रोथ का अनुमान लगाया है, जो सरकार के 7.4% के अनुमान से काफी आगे है। यह अनुमान चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में 8.5% की सालाना ग्रोथ पर आधारित है। ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस Goldman Sachs का अनुमान है कि 2026 में GDP ग्रोथ 6.9% और Deloitte का कहना है कि 2025-26 में यह 7.5% से 7.8% के बीच रहेगी। डोमेस्टिक डिमांड के दम पर भारत की अर्थव्यवस्था 2026 और 2027 में लगभग 6.7% से 6.8% की दर से बढ़ सकती है, जो ग्लोबल एवरेज से काफी ज़्यादा है। इस मजबूत आर्थिक आउटलुक का असर शेयर बाजारों पर भी दिख रहा है, जहाँ Nifty 50 के 2026 के अंत तक 28,500 से 29,800 के बीच रहने की उम्मीद है।
सर्विसेज सेक्टर और GST का जादू
भारत की ग्रोथ में सर्विसेज सेक्टर का दबदबा साफ दिख रहा है, जो अब देश के ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) का 56% से ज़्यादा हिस्सा रखता है। ट्रेड, फाइनेंस और डिजिटल सर्विसेज इस ग्रोथ को लगातार बढ़ा रहे हैं। हाल ही में GST रेट्स में किए गए बदलावों, खासकर कई चीजों को 5% या 18% स्लैब में लाने से, कंज्यूमर डिमांड बढ़ने की उम्मीद है। ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और सीमेंट जैसे सेक्टर कम कीमतों का फायदा उठा सकते हैं।
महंगाई और RBI का रुख
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) यानी महंगाई दर 4.0% से 4.5% के बीच रहने का अनुमान है। Crisil का मानना है कि FY27 में यह बढ़कर 4.3% हो सकती है, जो FY26 में अनुमानित 2.5% से ज़्यादा है। हालांकि, फूड प्राइसेस के सामान्य होने के बाद भी मुख्य महंगाई (underlying inflation) कंट्रोल में रहने की उम्मीद है। मजबूत ग्रोथ और स्थिर महंगाई को देखते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) वित्त वर्ष 2027 (FY27) तक अपनी पॉलिसी रेट्स को स्थिर रख सकता है। RBI ने 5.25% के रेपो रेट को बरकरार रखा है।
जोखिम और चुनौतियाँ
मजबूत ग्रोथ के अनुमानों के बावजूद, कुछ बड़े जोखिम भी हैं। ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल टेंशन, ट्रेड पॉलिसी में बदलाव और कैपिटल फ्लो में अस्थिरता भारतीय इकोनॉमी को प्रभावित कर सकती है। GST रेट में बदलाव से सरकारी रेवेन्यू पर असर पड़ने की चिंता भी है, अगर कंजम्पशन ग्रोथ बढ़ी हुई दरों की भरपाई नहीं कर पाती। इसके अलावा, पब्लिक डेट-टू-GDP रेश्यो लगभग 81.9% (2024) है, जो चिंता का विषय है, हालांकि इसके 2027 तक 78% तक आने का अनुमान है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर इन स्ट्रक्चरल मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया तो ग्रोथ में बाधा आ सकती है।