UN का भारत के लिए मजबूत ग्रोथ का अनुमान
संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) का अनुमान है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में 6.4% और 2027 में 6.6% की दर से बढ़ सकती है। यह 2025 में 7.4% की मजबूत ग्रोथ के बाद हो रहा है, जो कि मजबूत ग्रामीण मांग, GST दरों में कटौती और अमेरिकी टैरिफ की आशंका से पहले हुए एक्सपोर्ट (Export) के कारण संभव हुआ। देश का सर्विस सेक्टर (Service Sector) इस आर्थिक गतिविधि का एक बड़ा चालक बना हुआ है, लेकिन बाहरी दबाव इस अनुमान को प्रभावित कर सकते हैं।
अमेरिकी टैरिफ और रेमिटेंस टैक्स का असर
अगस्त 2025 में लागू किए गए अमेरिकी टैरिफ का असर एक्सपोर्ट पर दिखने लगा है। 2025 की दूसरी छमाही में अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट में 25% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे आर्थिक गतिविधियों में नरमी आई। इनमें से कुछ टैरिफ 50% तक के हैं, जिससे कुल एक्सपोर्ट 7-8% कम हो गए हैं और लाखों छोटे-मध्यम व्यवसायों से जुड़े वर्कर्स प्रभावित हुए हैं। इन व्यापारिक मुद्दों के अलावा, जनवरी 2026 से लागू होने वाला 1% का नया अमेरिकी रेमिटेंस टैक्स भारत के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है। भारत दुनिया भर में सबसे ज़्यादा रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश है, जो 2024 में $137 बिलियन तक पहुंचा था।
क्षेत्रीय तुलना और सेक्टर प्रदर्शन
2026 में भारत की अनुमानित ग्रोथ अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी अच्छी है। उदाहरण के लिए, चीन की ग्रोथ 4.4%-5.0% और इंडोनेशिया की 5.0% रहने का अनुमान है, जबकि भारत की रफ्तार इनसे कहीं ज़्यादा होगी। हालांकि, चीन को सरकारी नीतियों का अतिरिक्त सहारा मिल रहा है। भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट (Merchandise Exports) में 2025-26 फाइनेंशियल ईयर में मामूली 0.93% का इजाफा हुआ, जो $441.78 बिलियन रहा। वहीं, नॉन-पेट्रोलियम एक्सपोर्ट 3.62% बढ़े, लेकिन सर्विस सेक्टर में 7.94% की जोरदार ग्रोथ देखी गई।
आर्थिक कमजोरियां और व्यापार में बदलाव
ग्रोथ के अनुमानों के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था में कई कमजोरियां हैं। देश की इकोनॉमी घरेलू खपत और रेमिटेंस पर निर्भर है, जो बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील हैं। अमेरिकी टैरिफ ने एक्सपोर्ट को कम किया है और भारत को यूरोप, मध्य पूर्व और आसियान देशों में नए बाजार तलाशने पड़ रहे हैं। सर्विस सेक्टर कुछ सहारा दे रहा है, लेकिन $333 बिलियन का गुड्स ट्रेड डेफिसिट (Goods Trade Deficit) एक बड़ी चिंता है, जहां 2025-26 में इम्पोर्ट (Import) 7.5% बढ़कर $775 बिलियन तक पहुंच गए। बढ़ती महंगाई (Inflation), जिसके 2026 में 4.4% रहने का अनुमान है, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को मॉनेटरी पॉलिसी सख्त करने पर मजबूर कर सकती है, जो निवेश को प्रभावित करेगा। करीब 80.9% के सरकारी कर्ज (Government Debt) का स्तर भी एक चुनौती है।
ग्रीन इकोनॉमी को बूस्ट और अन्य अनुमान
भारत ग्रीन इकोनॉमी (Green Economy) पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिससे नए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। भारत में लगभग 1.3 मिलियन ग्रीन जॉब्स हैं, जिन्हें सोलर पीवी (Solar PV) और ग्रीन हाइड्रोजन मैन्युफैक्चरिंग के लिए PLI जैसी स्कीमें सपोर्ट कर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के साथ-साथ, S&P ग्लोबल रेटिंग्स (7.1% FY27), एशियाई विकास बैंक (6.9% FY26) और गोल्डमैन सैक्स (6.7% 2026) जैसी संस्थाएं भी भारत की ग्रोथ को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखती हैं। ये सभी अनुमान इस बात पर निर्भर करते हैं कि भारत अपनी घरेलू ताकत का उपयोग करते हुए मौजूदा वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों से कैसे निपटता है।
