वर्ल्ड बैंक का बदला नज़रिया
दुनियाभर के अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी खबर है। वर्ल्ड बैंक (World Bank) अपनी पुरानी सोच से बाहर आता दिख रहा है। दशकों तक उसने बाज़ार को पूरी तरह खुला छोड़ने और सरकारी दखलअंदाजी से बचने की सलाह दी। लेकिन अब, वर्ल्ड बैंक इस बात को मानने लगा है कि हर अर्थव्यवस्था के विकास के लिए सिर्फ एक ही तरीका काफी नहीं है। संस्था ने माना है कि इंडस्ट्रियल पॉलिसी, यानी सरकार का उद्योगों को बढ़ावा देना, डेवलपमेंट के लिए अहम हो सकता है। अब वे देशों को 'कम दखलंदाजी' वाली नीतियां अपनाने का सुझाव दे रहे हैं। हालांकि, यह एक प्रैक्टिकल कदम है, लेकिन इसमें जोखिम भी छिपे हैं। इतिहास गवाह है कि इंडस्ट्रियल पॉलिसी अक्सर मार्केट में दिक्कतें, खास लोगों को फायदा और ट्रेड वॉर्स (Trade Wars) का सबब बनी हैं। इसलिए, इन नीतियों को लागू करते वक्त इनोवेशन (Innovation) और कॉम्पिटिशन (Competition) को बढ़ावा देना जरूरी होगा, न कि ऐसी इंडस्ट्रीज को जिन्हें हमेशा सरकारी सहारे की जरूरत पड़े।
Guar Gum एक्सपोर्ट में वैल्यू एडिशन का अभाव
भारत की अर्थव्यवस्था के एक खास सेक्टर, Guar Gum, में भी एक बड़ी चिंता साफ दिख रही है। Guar, जिसे पहले एक आम सब्जी के तौर पर जाना जाता था, अब एक अहम इंडस्ट्रियल कमोडिटी (Industrial Commodity) बन गया है। खासकर अमेरिका में शेल गैस (Shale Gas) निकालने के लिए इसकी भारी मांग है। हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग (Hydraulic Fracturing) प्रक्रिया में थिकनर (Thickener) के तौर पर Guar Gum का इस्तेमाल होता है। इस वजह से इसकी मांग सीधे तौर पर तेल और गैस की खोज गतिविधियों से जुड़ी हुई है।
समस्या यह है कि भारत का Guar Gum उद्योग ज्यादातर कच्चा माल, जैसे Guar Splits और पाउडर, एक्सपोर्ट कर देता है। इससे फूड (Food), फार्मा (Pharma) और कॉस्मेटिक्स (Cosmetics) जैसे सेक्टरों के लिए हाई-वैल्यू (High-Value) प्रोडक्ट्स बनाने का बड़ा मौका हाथ से निकल जाता है। Guar Gum की कीमतें भी हमेशा अस्थिर (Volatile) रही हैं, जो कच्चे तेल की कीमतों के साथ तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं। ऐसे में, जहां ग्लोबल कॉम्पिटिटर्स (Global Competitors) के पास एडवांस प्रोसेसिंग फैसिलिटीज (Advanced Processing Facilities) हैं, वहीं भारत इस मूल्य श्रृंखला (Value Chain) में पीछे छूट रहा है और जॉब्स (Jobs) व रेवेन्यू (Revenue) के नुकसान का सामना कर रहा है।
Luxury Retail ग्रोथ पर स्ट्रक्चरल रिस्क
दूसरी ओर, भारत का Luxury Retail सेक्टर तेजी से बढ़ तो रहा है, लेकिन यह ग्रोथ कई छुपे हुए स्ट्रक्चरल इश्यूज (Structural Issues) से ग्रस्त है। ग्लोबल ब्रांड्स बड़े शहरों और छोटे शहरों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। लेकिन यह ग्रोथ सिर्फ 'कुछ गिने-चुने हाई-इनकम' (High-Income) लोगों पर टिकी है, जिससे एक बड़े ग्राहक वर्ग तक पहुंच नहीं बन पा रही है।
एक और बड़ी समस्या है शहरों के प्राइम लोकेशंस (Prime Locations) पर हाई-क्वालिटी (High-Quality), मॉडर्न रिटेल स्पेस (Retail Space) की भारी कमी। इस कमी के कारण लागतें बढ़ जाती हैं और ब्रांड्स की ग्रोथ की क्षमता सीमित हो जाती है। विकसित लग्जरी मार्केट्स की तरह, जहां ग्राहक आधार और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत है, भारत का यह सेक्टर आर्थिक मंदी या ग्राहकों के मूड बदलने पर बहुत नाजुक साबित हो सकता है।
एक्सपर्ट्स की राय
एक्सपर्ट्स (Experts) का मानना है कि Guar Gum की भविष्य की ग्रोथ सिर्फ तेल और गैस की मांग पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि फूड और अन्य इंडस्ट्रीज में इसके इस्तेमाल को बढ़ाना होगा। इसके लिए भारतीय प्रोड्यूसर्स को R&D (Research and Development) और मार्केट डेवलपमेंट में बड़ा निवेश करना होगा। Luxury Retail की बात करें तो, ऑनलाइन और इन-पर्सन (In-person) एक्सपीरियंस पर ज्यादा फोकस करना होगा ताकि हाई रियल एस्टेट कॉस्ट (Real Estate Cost) और बदलते ग्राहक की पसंदों से निपटा जा सके। वहीं, वर्ल्ड बैंक की नई गाइडलाइन के तहत अपनाई जाने वाली इंडस्ट्रियल पॉलिसीज की सफलता काफी हद तक उनकी सावधानीपूर्वक इम्प्लीमेंटेशन (Implementation), पारदर्शिता (Transparency) और लचीलेपन (Flexibility) पर निर्भर करेगी, न कि पुरानी सोच पर।