भारत की इकोनॉमी की रफ्तार धीमी, बढ़ती तेल कीमतों और ग्लोबल चिंताओं ने खींचा ब्रेक

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
भारत की इकोनॉमी की रफ्तार धीमी, बढ़ती तेल कीमतों और ग्लोबल चिंताओं ने खींचा ब्रेक
Overview

अप्रैल महीने में भारत की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ती नजर आई। एनालिस्ट्स के मुताबिक, भारत का एडवांस बिजनेस इंडेक्स (ABI) गिरकर **100.8** पर आ गया, जो पिछले तीन महीनों का सबसे निचला स्तर है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें और ग्लोबल अनिश्चितताओं ने इंडस्ट्रियल एक्टिविटी पर दबाव डाला है, जिससे डीजल और कोयले का उत्पादन धीमा हुआ है। कारों की बिक्री जैसे शहरी खपत के इंडिकेटर्स भी नरम पड़े।

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भारत का एडवांस बिजनेस इंडेक्स (ABI) अप्रैल में 100.8 के स्तर पर आ गया। यह फरवरी की ऊंचाई के मुकाबले आर्थिक रफ्तार में एक बड़ी नरमी का संकेत देता है। सॉफ्ट ग्रोथ की ओर यह बदलाव बाहरी दबावों और कमोडिटी की बढ़ती कीमतों से तेजी से बढ़ रहा है।

कच्चे तेल का बढ़ता बोझ

इस गिरावट की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी है। अप्रैल में भारत के कच्चे तेल का औसत $114.48 प्रति बैरल रहा, जो मार्च के $113.49 और फरवरी के $69.01 से काफी ज्यादा है। हालांकि ABI सीधे तौर पर कच्चे तेल की कीमतों को नहीं मापता, लेकिन इसका असर साफ दिख रहा है। डीजल की खपत में ग्रोथ घटकर 0.9% रह गई, जो मार्च में 8% थी। एविएशन टर्बाइन फ्यूल की खपत भी घटी है। कोयले के उत्पादन में 9.7% की गिरावट आई, जबकि पहले यह 1.5% घट रहा था।

उपभोक्ता खर्च में नरमी

यह नरमी खपत (Consumption) और इंडस्ट्रियल इंडिकेटर्स में फैली हुई थी। शहरी मांग का प्रॉक्सी माने जाने वाली चार-पहिया वाहनों की बिक्री 11.6% की रफ्तार से बढ़ी, जो पिछले महीने 25.8% थी। दो-पहिया वाहनों की बिक्री की ग्रोथ भी घटकर 13% रह गई, जो पहले 29.5% थी। लॉजिस्टिक्स एक्टिविटी को दर्शाने वाले ई-वे बिल जनरेशन में भी नरमी आई और यह 11.8% पर आ गया। क्रेडिट कार्ड पेमेंट ग्रोथ भी धीमी पड़ी, जो विवेकाधीन खर्च (discretionary spending) में कमी का संकेत है।

मजबूती के कुछ क्षेत्र

इस व्यापक नरमी के बावजूद, कुछ सेक्टर्स मजबूत बने रहे। मैन्युफैक्चरिंग PMI 55.9 पर पहुंच गया और सर्विसेज PMI 57.9 रहा। UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम 24.9% बढ़ा, और नॉन-फूड क्रेडिट एक्सपेंशन 14.9% रहा। ट्रैक्टर की बिक्री में 24.5% की बड़ी बढ़ोतरी हुई, जो ग्रामीण मांग में मजबूती का संकेत है।

ग्रोथ का आउटलुक

यह डेटा एक 'टू-स्पीड' इकोनॉमी (two-speed economy) की तस्वीर पेश करता है। फाइनेंशियल एक्टिविटी, डिजिटल पेमेंट्स और ग्रामीण क्षेत्र के कुछ हिस्से मजबूत दिख रहे हैं, जबकि एनर्जी से जुड़े सेक्टर्स, शहरी खपत और रोजगार सृजन (job creation) नरम पड़ रहे हैं। अप्रैल के आंकड़े बताते हैं कि नए फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) की शुरुआत कम मोमेंटम के साथ हुई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं, जिससे परचेजिंग पावर और कॉर्पोरेट मार्जिन पर असर पड़ेगा। इससे अर्थव्यवस्था विस्तार (expansion) से कंसॉलिडेशन (consolidation) की ओर बढ़ सकती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.