भारत की इकॉनमी धीमी, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मजबूत; El Niño का एग्रीकल्चर पर असर

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
भारत की इकॉनमी धीमी, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मजबूत; El Niño का एग्रीकल्चर पर असर

अप्रैल-मई 2026 में भारत की आर्थिक ग्रोथ थोड़ी धीमी हुई है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूती दिखी, लेकिन El Niño के कारण एग्रीकल्चर सेक्टर दबाव में है, जिससे रूरल डिमांड इंडिकेटर्स पर असर पड़ा है। अब सर्विसेज सेक्टर और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी पर नजर रहेगी।

मैन्युफैक्चरिंग की मजबूती, पर बढ़ी लागत

HSBC ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल और मई 2026 के दौरान भारत की आर्थिक रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने अपना दम दिखाया है, लेकिन एग्रीकल्चर सेक्टर मौसम की मार झेल रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था में असमान ग्रोथ देखने को मिल रही है।

भारत की जीडीपी में करीब 20% हिस्सेदारी रखने वाला मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, चालू फाइनेंशियल ईयर के पहले दो महीनों में स्थिर बना रहा। मार्च से मई के बीच एनर्जी की ऊंची कीमतों के बावजूद, कई कंपनियों ने ग्लोबल प्राइस अनिश्चितता से बचने के लिए इन्वेंटरी बढ़ाकर प्रोडक्शन लेवल बनाए रखा। इसके अलावा, अमेरिका के टैरिफ में अस्थायी कमी से डोमेस्टिक एक्सपोर्टर्स को फायदा हुआ, जिससे फैक्ट्री आउटपुट को कुछ राहत मिली।

एग्रीकल्चर और रूरल डिमांड पर संकट

जीडीपी में लगभग 20% योगदान देने वाला एग्रीकल्चर सेक्टर, El Niño के मजबूत होने की आशंका के चलते भारी दबाव में है। मॉनसून से जुड़ी बुवाई की गतिविधियां धीमी रही हैं, जिसमें पिछले साल के इसी समय के 24% की तुलना में अब तक केवल 17% सामान्य बुवाई क्षेत्र कवर हुआ है। जलाशयों के निचले स्तर और लगभग 30% की रेनफॉल डेफिसिट (rainfall deficit) ने खास तौर पर पल्सेज (pulses) और ऑयल सीड्स (oilseeds) को प्रभावित किया है, जिनके लिए भारत एक बड़ा इम्पोर्टर (importer) है।

इन एग्रीकल्चरल मुश्किलों का रूरल डिमांड पर असर दिखने लगा है। टू-व्हीलर सेल्स (two-wheeler sales) और रूरल बैंक डिपॉजिट्स (rural bank deposits) में ग्रोथ जैसे कंज्यूमर हेल्थ के इंडिकेटर्स धीमे पड़ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अर्बन सेंटर्स (urban centers) की तुलना में रूरल रीजन (rural regions) में यूथ अनएम्प्लॉयमेंट (youth unemployment) तेजी से बढ़ा है, जिससे इन इलाकों में खपत सीमित हो सकती है।

सर्विसेज सेक्टर से उम्मीद

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के सामने संभावित चुनौतियों और एग्रीकल्चर में क्लाइमेटिक रिस्क को देखते हुए, भारत की जीडीपी का लगभग 55% हिस्सा बनाने वाले सर्विसेज सेक्टर से 2026 के बाकी महीनों में ग्रोथ का मुख्य इंजन बनने की उम्मीद है। इस सेक्टर को दो खास फैक्टर सपोर्ट कर सकते हैं। पहला, ग्लोबल क्रूड ऑयल (crude oil) की कीमतों में गिरावट से ट्रेड (trade) और ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्रीज (transport industries) के ऑपरेटिंग कॉस्ट (operating costs) कम हो सकते हैं। दूसरा, सरकार के फॉरेन एक्सचेंज पैकेज (foreign exchange package) से आसान फाइनेंशियल कंडीशंस (financial conditions) का फायदा फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर को मिलने की उम्मीद है। कर्ज की लागत में पहले से ही गिरावट दिख रही है, जो आने वाले महीनों में लिक्विडिटी (liquidity) और इकोनॉमिक एक्टिविटी (economic activity) को सपोर्ट कर सकती है।

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