AI की धुन में फिसला भारत का इंडेक्स वेटेज
ग्लोबल इन्वेस्टर्स का ध्यान इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर (Semiconductor) की जबरदस्त रैली पर है। यही वजह है कि MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स (MSCI EM Index) में भारत का दबदबा कुछ कम हुआ है। जहां टेक-हैवी मार्केट्स जैसे ताइवान और साउथ कोरिया इस AI बूम का फायदा उठा रहे हैं, वहीं भारत का इस क्षेत्र में एक्सपोजर (Exposure) कम है। यही कारण है कि भारत अब 13.34% वेटेज के साथ इंडेक्स में चौथे पायदान पर आ गया है, जो कि एक बड़ी गिरावट है।
एफआईआई आउटफ्लो और रुपये का कमजोर होना भी बना कारण
इस स्थिति को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने और गंभीर बना दिया है। जनवरी 2025 से अब तक करीब $21.4 बिलियन का आउटफ्लो (Outflow) हुआ है। साथ ही, पिछले छह महीनों में रुपये में 3% की गिरावट आई है, जबकि इसी दौरान बेंचमार्क निफ्टी 50 (Nifty 50) में सिर्फ 2% का मामूली उछाल देखा गया है।
ताइवान, साउथ कोरिया की चमक बरकरार
इस बीच, चीन 26.6% वेटेज के साथ टॉप पर है, वहीं ताइवान 21.04% और साउथ कोरिया 15.65% के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर अपनी जगह बनाए हुए हैं। ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) जैसी कंपनियों के कारण ताइवान का मार्केट कैप (Market Cap) $3.6 ट्रिलियन तक पहुंच गया है, जबकि साउथ कोरिया का मार्केट कैप $3.3 ट्रिलियन के करीब है।
परफॉरमेंस में बड़ा अंतर
पिछले छह महीनों में, साउथ कोरिया का KOSPI 50% से अधिक उछला है, ताइवान का TAIEX 25.1% भागा है, और चीन का शंघाई कम्पोजिट 16% बढ़ा है। इसकी तुलना में, निफ्टी 50 का 2% का रिटर्न काफी फीका लगता है। यह तस्वीर सितंबर 2022 के बिलकुल उलट है, जब भारत का MSCI EM इंडेक्स वेटेज 18% तक पहुंच गया था और यह ताइवान को पछाड़कर दूसरे सबसे बड़े कॉन्स्टिट्यूएंट (Constituent) के रूप में उभरा था।
भविष्य की राह: AI का दबदबा
एनालिस्ट्स का मानना है कि 2026 में इमर्जिंग मार्केट्स में ग्रोथ जारी रहेगी, जिसमें AI और अर्निंग्स (Earnings) बढ़त मुख्य कारक होंगे। साउथ कोरिया को AI के लिए चिप्स और हार्डवेयर प्रोडक्शन का एक महत्वपूर्ण हब माना जा रहा है। हालांकि, भारत का टेक-हैवी इंडेक्स में कम प्रतिनिधित्व नियर-टर्म में उसके परफॉरमेंस और ग्लोबल वेटेज को प्रभावित कर सकता है, खासकर तब जब कैपिटल फ्लो (Capital Flow) उन देशों की ओर जा रहा है जहाँ AI और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम (Ecosystem) मजबूत है।