डिजिटल रुपये की जोरदार रफ्तार
इंडिया का डिजिटल रुपया (CBDC) लोगों के बीच खूब पसंद किया जा रहा है। अब तक 150 मिलियन से ज़्यादा ट्रांजेक्शन (लेन-देन) पूरे हो चुके हैं। इन सभी डिजिटल रुपये के लेन-देन की कुल वैल्यू ₹34,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर गई है, जो साफ तौर पर नए डिजिटल पेमेंट सिस्टम में बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है।
RBI की भविष्य की योजनाएं: 'प्रोग्रामेबिलिटी' पर ज़ोर
RBI डिप्टी गवर्नर टी. रवि शंकर ने डिजिटल रुपये को 'पेमेंट्स का भविष्य' बताते हुए कहा है कि यह एक ऐसी 'इनोवेशन' है जिसका समय आ चुका है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सेंट्रल बैंक अभी 'प्रोग्रामेबिलिटी' जैसे बेहद ज़रूरी फीचर पर काम कर रहा है। यह फीचर खास तरह के सशर्त लेन-देन को संभव बनाएगा, जिससे भविष्य में और भी स्मार्ट पेमेंट्स हो सकेंगे।
जल्दबाजी नहीं, 'धीरे-धीरे लॉन्च' की रणनीति
हालांकि डिजिटल रुपये को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन RBI जल्दबाज़ी में इसका पूरा लॉन्च करने के मूड में नहीं है। श्री रवि शंकर ने साफ किया कि बड़े पैमाने पर लॉन्च डोमेस्टिक (घरेलू) तैयारियों और इंटरनेशनल (अंतर्राष्ट्रीय) स्तर पर हो रही प्रगति पर निर्भर करेगा। खासकर क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजेक्शन में CBDC के बड़े फायदे देखे जा सकते हैं। फिलहाल, RBI का ध्यान टेक्नोलॉजी को और बेहतर बनाने और इसके सबसे प्रभावी यूज़ केस (उपयोग के मामलों) को खोजने पर है।
AI सैंडबॉक्स और SRO मॉडल पर भी हो रहा विचार
इसके साथ ही, RBI टेक्नोलॉजी सेक्टर में लगातार संवाद को बढ़ावा देने के लिए सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन (SRO) मॉडल पर भी विचार कर रहा है। इतना ही नहीं, RBI का फिनटेक डिपार्टमेंट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सैंडबॉक्स की भी पड़ताल कर रहा है। यह एक कंट्रोल्ड (नियंत्रित) जगह होगी जहां AI मॉडल्स को टेस्ट और ट्रेन किया जा सकेगा, जब तक कि इनके लिए विशेष नियम (रेगुलेशन) विकसित नहीं हो जाते।