डिजिटल क्रांति के बावजूद क्रेडिट की कमी?
पिछले एक दशक में भारत ने डिजिटल फाइनेंस (Digital Finance) के क्षेत्र में कमाल की तरक्की की है। UPI जैसे पेमेंट प्लेटफॉर्म ने करोड़ों लोगों को फॉर्मल फाइनेंसियल सिस्टम से जोड़ा है। लेकिन यह डिजिटल इंगेजमेंट लोन मिलने की राह को आसान बनाने में कामयाब नहीं हो पा रहा है।
### क्यों क्रेडिट इनविजिबल है?
बैंक और दूसरे पारंपरिक कर्जदाता (Lenders) आज भी लोन अप्रूवल (Loan Approval) के लिए पुराने क्रेडिट स्कोर और गारंटी (Collateral) पर बहुत ज्यादा निर्भर करते हैं। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी बाधा है जो सक्रिय रूप से काम करते हैं, छोटे बिज़नेस चलाते हैं, या नियमित डिजिटल पेमेंट करते हैं, लेकिन उनके पास लंबा क्रेडिट हिस्ट्री (Credit History) या फॉर्मल जॉब रिकॉर्ड (Formal Job Records) नहीं है। उनकी रोजमर्रा की फाइनेंशियल एक्टिविटी (Financial Activity) पुराने क्रेडिट स्कोरिंग सिस्टम (Credit Scoring Systems) की नजर में नहीं आती है।
### कर्जदाताओं के लिए चुनौतियां
जोखिम (Risk) से जुड़े नियमों और नए तरह के डेटा का मूल्यांकन करने में मुश्किलों के कारण बैंक हिचकिचाते हैं। डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड्स (Digital Payment Records) वैकल्पिक क्रेडिट स्कोरिंग (Alternative Credit Scoring) के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं, लेकिन इसे मौजूदा नियमों और सिस्टम में फिट करना बड़े फाइनेंशियल फर्मों के लिए एक कठिन काम है। इस धीमी गति के कारण लाखों लोग आज भी ज़रूरी क्रेडिट से वंचित हैं।
### आगे का रास्ता
फिनटेक (Fintech) कंपनियां अब नए डेटा सोर्स, जैसे डिजिटल पेमेंट की आदतें और यूजर बिहेवियर (User Behaviour), का इस्तेमाल करके उन लोगों के लिए क्रेडिट प्रोफाइल बनाने की कोशिश कर रही हैं जिन्हें अभी तक लोन नहीं मिला है। इसका लक्ष्य लाखों लोगों के लिए लोन के रास्ते खोलना है, जिससे खर्च, बिज़नेस की शुरुआत और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है, बशर्ते ये तरीके कारगर साबित हों और उन्हें सरकारी मंजूरी भी मिल जाए।