DPI बना 'वर्ल्ड-क्लास'
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने बताया कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) 'काफी हद तक दुनिया के स्तर' का हो चुका है। उन्होंने इस फ्रेमवर्क के बड़े पैमाने, डिज़ाइन और पहुँच की तारीफ की, और कहा कि इसने कम समय में ही कल्याणकारी योजनाओं के लाभ, सिस्टम की कुशलता और सुरक्षा को बेहतर बनाया है।
पहुंच की बाधाएं बरकरार
नागेश्वरन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद, सभी को डिजिटल सेवाओं का लाभ मिले, यह एक बड़ी चुनौती है। बुजुर्गों, खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले दूर-दराज के इलाकों के लोग, और कम डिजिटल साक्षरता वाले व्यक्तियों को अभी भी आवश्यक डिजिटल सेवाओं तक पहुँचने में मुश्किल हो रही है। यह सुनिश्चित करना एक अहम लक्ष्य है कि हर कोई, खासकर सबसे कमज़ोर वर्ग, इन सेवाओं का आसानी से उपयोग कर सके।
गवर्नेंस और सुरक्षा का बदलता परिदृश्य
डेटा साझाकरण और डिजिटल रिकॉर्ड के लिए कानूनों और प्रणालियों का विकास भी एक चुनौती है। भारत के विभिन्न राज्यों के बीच DPI की इंटरऑपरेबिलिटी (interoperability) अभी विकसित हो रही है, और राज्यों के इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता में अंतर उपयोगकर्ताओं को प्रभावित कर रहा है। साइबर सुरक्षा पर लगातार ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि खतरे लगातार अधिक परिष्कृत होते जा रहे हैं।
JAM Trinity का कमाल और भविष्य
जन धन बैंक खातों, आधार पहचान और मोबाइल फोन (JAM Trinity) का इस्तेमाल करके डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (direct benefit transfers) ने DPI की ताकत दिखाई है, जिससे बर्बादी कम हुई है। भारत अब डिजिटल सिस्टम का एक बड़ा उपयोगकर्ता होने से आगे बढ़कर अपनी विशाल डिजिटल आर्किटेक्चर (digital architecture) खुद बना रहा है, जो सरकारी सेवाओं के वितरण के तरीके को बदल रहा है।
