फिजिकल करेंसी की लगातार मांग
15 मई तक, सर्कुलेशन (Circulation) में मौजूद करेंसी (CiC) अभूतपूर्व रूप से ₹42.86 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। यह पिछले साल के मुकाबले 11.5% की बढ़ोतरी दर्शाता है। फाइनेंशियल ईयर 2027 के पहले छह हफ्तों में ही यह ₹1.15 लाख करोड़ का बड़ा इजाफा हुआ है। यह ट्रेंड फिजिकल करेंसी पर लगातार निर्भरता को दिखाता है, भले ही डिजिटल पेमेंट सिस्टम (Digital Payment System) में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिल रही है। CiC में यह बढ़ोतरी पिछले साल की तुलना में तेज़ है, जो नोटों और सिक्कों की मांग में मजबूती का संकेत देती है।
बढ़ी हुई नकदी की वजहें
विश्लेषकों का मानना है कि फिजिकल कैश की बढ़ती मांग कई आर्थिक कारकों का मिलाजुला असर है। विभिन्न राज्यों में चुनावों से जुड़े ज़ोरदार खर्च इसका एक प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा, ग्रामीण आय में सुधार और लगातार अच्छी मॉनसून के सहारे कृषि क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने से नकदी का इस्तेमाल बढ़ा है। बाज़ार की अस्थिरता (Market Volatility) के बीच एहतियात के तौर पर, लोग अपनी नकदी को भी बढ़ा रहे हैं। महंगाई (Inflation) का दबाव भी करेंसी की मांग को बढ़ा रहा है।
सरकारी सहायता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की भूमिका
सरकार की योजनाएं, जिनमें विभिन्न आबादी वर्गों के लिए सीधी कैश ट्रांसफर (Direct Cash Transfer) स्कीमें शामिल हैं, औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से नकदी के रिसाव में योगदान दे सकती हैं। बढ़ती मांग के रुझानों के साथ मिलकर, यह सर्कुलेशन के आंकड़ों को और मजबूत करता है। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भी माना है कि भारत के GDP के मुकाबले सर्कुलेशन में करेंसी का प्रतिशत FY21 में 14.4% से घटकर FY26 में 12.1% हो गया है, जो समग्र रूप से अधिक डिजिटाइज़्ड अर्थव्यवस्था का संकेत देता है, फिर भी फिजिकल कैश की मांग बनी हुई है।
आर्थिक संदर्भ और बाज़ार की अस्थिरता
वर्तमान आर्थिक माहौल वैश्विक वित्तीय बाज़ार की अस्थिरता और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से भरा है। इस माहौल के चलते भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है, जिससे आयात लागत और महंगाई पर असर पड़ सकता है। हालांकि अप्रैल 2026 में महंगाई 3.48% के आसपास नियंत्रित रही है, लेकिन ऊंचे कच्चे तेल की कीमतों जैसे वैश्विक दबाव जोखिम पैदा कर रहे हैं। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लिक्विडिटी (Liquidity) को मैनेज करने और रुपए को स्थिर करने के लिए सीधे डॉलर बेचने और लिक्विडिटी ऑपरेशन्स जैसे साधनों का इस्तेमाल कर रहा है।
डिजिटल पेमेंट्स बनाम कैश सर्कुलेशन
डिजिटल ट्रांजैक्शन (Digital Transactions) में भारी वृद्धि के बावजूद, जिसमें FY26 में UPI की वैल्यू 21% बढ़कर ₹314.23 लाख करोड़ हो गई, फिजिकल कैश में बढ़ोतरी जारी है। यह अंतर बताता है कि जहाँ डिजिटल माध्यम ट्रांजैक्शन को बदल रहे हैं, वहीं नकदी मूल्य के भंडार (Store of Value) और विशिष्ट आर्थिक गतिविधियों के लिए पसंदीदा माध्यम बनी हुई है, खासकर ग्रामीण इलाकों में और एहतियाती बचत के लिए। विशेषज्ञों का कहना है कि UPI ट्रांजैक्शन और CiC में वृद्धि का सह-अस्तित्व लगातार एहतियाती मांग और अनौपचारिक क्षेत्र (Informal Sector) की गतिशीलता को दर्शाता है। कुछ मामलों में, जैसे कि कुछ राज्यों में छोटे व्यापारियों को बड़ी UPI ट्रांजैक्शन मात्रा के लिए GST नोटिस जारी करना, ने भी कुछ लोगों को नकदी के अधिक उपयोग की ओर बढ़ाया होगा।
