भारत का Capex फोकस हुआ सिकुड़ा: एनर्जी और रिसोर्स पर जोर, सेवाएं पीछे

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AuthorAditya Rao|Published at:
भारत का Capex फोकस हुआ सिकुड़ा: एनर्जी और रिसोर्स पर जोर, सेवाएं पीछे
Overview

भारतीय कंपनियों का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) अब कुछ खास सेक्टर्स की ओर मुड़ गया है। प्राइवेट कंपनियाँ एनर्जी, रिसोर्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे मुख्य क्षेत्रों पर अपना फोकस बढ़ा रही हैं, जबकि सर्विस सेक्टर्स में निवेश घटता दिख रहा है। यह एक बड़ा बदलाव है जो भारत की आर्थिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।

कहां जा रहा है कंपनियों का पैसा?

FY27 के अनुमानों के मुताबिक, टॉप 5 सेक्टर कुल प्राइवेट Capex का लगभग 82% हिस्सा होंगे, जो FY25 के 80% से ज़्यादा है। यह दर्शाता है कि निवेश कुछ चुनिंदा जगहों पर ही केंद्रित हो रहा है।

मैन्युफैक्चरिंग अभी भी Capex का एक बड़ा हिस्सा है, जिसके FY27 में 44.7% रहने का अनुमान है। हालाँकि, पिछले कुछ सालों के मुकाबले इसका शेयर थोड़ा कम हुआ है।

ऊर्जा (बिजली, गैस, यूटिलिटीज) सेक्टर में निवेश तेज़ी से बढ़ रहा है। FY25 में जहाँ इसका शेयर 5.9% था, वहीं FY27 में यह बढ़कर 12.7% होने का अनुमान है। इसका मतलब है कि ऊर्जा क्षेत्र में निवेश लगभग दोगुना हो जाएगा। माइनिंग (खनन) सेक्टर भी ग्लोबल कमोडिटी डिमांड और एनर्जी सिक्योरिटी पर बढ़ते फोकस के कारण तेज़ी दिखा रहा है।

सर्विस सेक्टर में गिरावट

इसके ठीक उलट, सर्विस सेक्टर्स में निवेश घट रहा है। खासकर 'इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन' सेक्टर का शेयर FY25 के 23.3% से गिरकर FY27 में केवल 15.6% रहने का अनुमान है। यह इन क्षेत्रों में संभावित मंदी या निवेश के कम होने का संकेत देता है।

सरकारी नीतियाँ और ग्लोबल ट्रेंड्स का असर

इस बड़े बदलाव के पीछे कई अहम कारण हैं। ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और एनर्जी सिक्योरिटी पर बढ़ते फोकस ने रिसोर्स एक्सट्रैक्शन और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को बढ़ावा दिया है। साथ ही, भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया', प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम्स और पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान जैसी पहलें सीधे तौर पर निवेश को कोर इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और रिसोर्स-बेस्ड इंडस्ट्रीज की ओर मोड़ रही हैं।

फंड‍िंग और भविष्य की योजनाएँ

कॉर्पोरेट इंडिया अपने Capex का 65% से ज़्यादा हिस्सा अपनी आंतरिक कमाई (Internal Accruals) से ही पूरा कर रहा है। इससे कंपनियों के बैलेंस शीट मजबूत हुए हैं और वे आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद रणनीतिक निवेश करने में सक्षम हैं।

जोखिम और आगे की राह

हालाँकि, प्राइवेट Capex में यह बढ़ती एकाग्रता (Concentration) कुछ जोखिम भी पैदा करती है। निवेश का दायरा सीमित होने से इसके लाभ का अर्थव्यवस्था के विभिन्न हिस्सों तक फैलना मुश्किल हो सकता है।

FY27 के लिए प्राइवेट निवेश की योजनाओं में 16.5% तक की संभावित गिरावट का अनुमान है। कुछ सर्वेज़ यह भी संकेत देते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग Capex में 8% तक की कटौती हो सकती है। IT जैसे सेक्टर्स पर AI जैसी नई टेक्नोलॉजी का असर भी दिख रहा है, जो उनके Capex में योगदान को कम कर सकता है।

पिछले एक दशक से प्राइवेट Capex, GDP का लगभग 12% पर ही स्थिर है, जो एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

आगे का परिदृश्य मिला-जुला है। उम्मीद है कि सरकारी खर्च और नई हरित ऊर्जा (Green Energy) जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश ज़रूर बढ़ेगा, लेकिन व्यापक आर्थिक गति के लिए पब्लिक इन्वेस्टमेंट पर निर्भरता बनी रहेगी।

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