MSMEs की बल्ले-बल्ले! CEA ने बड़े उद्योगों को दी मोहलत, तुरंत करें भुगतान

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
MSMEs की बल्ले-बल्ले! CEA ने बड़े उद्योगों को दी मोहलत, तुरंत करें भुगतान
Overview

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने बड़ी कंपनियों को सख्त हिदायत दी है कि वे छोटे और मझोले उद्यमों (MSMEs) का भुगतान समय पर करें। यह कदम MSMEs को कैश फ्लो की दिक्कत से बचाने और उनका उधार लेने का खर्च (borrowing costs) कम करने के लिए उठाया गया है।

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क्यों ज़रूरी है समय पर भुगतान?

CEA वी. अनंत नागेश्वरन ने CII की एनुअल बिज़नेस समिट में कहा कि MSMEs भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और बड़ी कंपनियों को उनके वर्किंग कैपिटल पर निर्भर रहने के बजाय, उन्हें सपोर्ट करना चाहिए। यह कदम सप्लाई चेन में वित्तीय अनुशासन लाने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और भारतीय MSMEs को ग्लोबल मार्केट से बेहतर ढंग से जोड़ने में मदद करेगा।

भुगतान में देरी का दर्द

देरी से मिलने वाले भुगतान MSMEs के लिए एक बड़ी समस्या हैं, जिससे उन्हें अक्सर अनौपचारिक स्रोतों से महंगे कर्ज (informal credit) लेने पड़ते हैं। अनुमान है कि MSMEs का करीब ₹8.1 लाख करोड़ का भुगतान बकाया है, जो उनके रोज़मर्रा के कामकाज और विकास में निवेश करने की क्षमता को बाधित करता है। अक्सर बड़ी कंपनियां अपने कैश फ्लो को बेहतर बनाने के लिए छोटे सप्लायर्स को पेमेंट में देरी करती हैं।

क्या हैं नियम और क्या है विरोध?

भारत में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 43B(h) के तहत यह नियम है कि बड़ी कंपनियों को MSMEs को 45 दिनों (या अगर कोई समझौता नहीं है तो 15 दिनों) के भीतर भुगतान करना होगा, वरना उन्हें टैक्स में छूट नहीं मिलेगी। इसके बावजूद, कुछ बड़े बिज़नेस एसोसिएशन पेमेंट की 45-दिन की सीमा को हटाने की मांग कर रहे हैं। यह दिखाता है कि कुछ बड़ी कंपनियां MSMEs को अपने वर्किंग कैपिटल का जरिया मानती हैं, जिसे CEA बदलना चाहते हैं।

छोटे व्यवसायों पर वित्तीय बोझ

जब भुगतान में देरी होती है, तो MSMEs को अक्सर हर महीने 3-5% तक के ब्याज पर अनौपचारिक कर्ज लेना पड़ता है। यह वित्तीय बोझ उनके मुनाफे के मार्जिन को काफी कम कर देता है। MSMED एक्ट के तहत भुगतान की समय-सीमा लागू करवाने में ऐतिहासिक रूप से ढिलाई बरती गई है।

अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर

इस समय जब ब्याज दरें ऊंची हैं और लिक्विडिटी (तरलता) टाइट है, तब देरी से भुगतान MSMEs को और भी ज़्यादा प्रभावित करते हैं। बड़े उद्यमों द्वारा समय पर भुगतान सुनिश्चित करना, MSMEs की वित्तीय सेहत, जीडीपी में उनके योगदान और रोज़गार सृजन के लिए बेहद ज़रूरी है।

अनुपालन के फायदे

अगर बड़ी कंपनियां समय पर भुगतान करती हैं, तो MSMEs को क्रेडिट तक बेहतर पहुंच मिलेगी, वित्तीय तनाव कम होगा और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, बड़ी कंपनियों को टैक्स पेनल्टी से बचने, अपनी साख सुधारने और सप्लायर के साथ मज़बूत रिश्ते बनाने में मदद मिलेगी, जिससे उनके ऑपरेशंस में भी predictability आएगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.