भारत का CAD बढ़ा: महंगे तेल और ट्रेड गैप का डबल अटैक, पर सर्विस सेक्टर ने संभाला मोर्चा!

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत का CAD बढ़ा: महंगे तेल और ट्रेड गैप का डबल अटैक, पर सर्विस सेक्टर ने संभाला मोर्चा!
Overview

भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3FY26) में बढ़कर **$13.2 बिलियन** हो गया है। मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट में बड़ी बढ़ोतरी और एफडीआई (FDI) में आउटफ्लो बढ़ने के चलते यह स्थिति बनी है, हालांकि सर्विसेज सेक्टर की मजबूती ने कुछ हद तक सहारा दिया है।

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ट्रेड डेफिसिट और एफडीआई का बढ़ता बोझ

फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3FY26) में भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पिछले साल के $11.3 बिलियन से बढ़कर $13.2 बिलियन पर पहुँच गया है। यह जीडीपी (GDP) का 1.3% है, जो पिछले साल 1.1% था। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट का $79.3 बिलियन से बढ़कर $93.6 बिलियन हो जाना है। साथ ही, एफडीआई (FDI) में नेट आउटफ्लो भी $2.8 बिलियन से बढ़कर $3.7 बिलियन रहा। ये आंकड़े भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (Balance of Payments) पर बढ़ते दबाव को दिखाते हैं।

सर्विसेज और रेमिटेंस का सहारा

लेकिन, इन चिंताओं के बीच भारत के सर्विसेज एक्सपोर्ट (Services Exports) ने बड़ा सहारा दिया है। नेट सर्विसेज रिसीट्स (Net Services Receipts) पिछले साल के $51.2 बिलियन से बढ़कर $57.5 बिलियन हो गए हैं। आईटी (IT) और बिजनेस सर्विसेज की मजबूत मांग इसका मुख्य कारण है। इसके अलावा, विदेशों में काम कर रहे भारतीयों से आने वाले रेमिटेंस (Remittances) भी $36.9 बिलियन पर स्थिर रहे, जिसने करंट अकाउंट को सहारा दिया।

महंगा तेल और भू-राजनीतिक जोखिम

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतें बढ़ रही हैं। यह भारत के इम्पोर्ट बिल (Import Bill) के लिए बड़ा खतरा है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि क्रूड ऑयल की हर $10 प्रति बैरल बढ़ोतरी से भारत का CAD करीब 0.4-0.5% जीडीपी (GDP) बढ़ सकता है। भारत अपनी 85% से ज्यादा क्रूड की जरूरतें इम्पोर्ट से ही पूरी करता है, जिससे यह खतरा और बढ़ जाता है।

ट्रेड नीतियां और भविष्य के अनुमान

इसके अलावा, अमेरिका जैसी देशों की ट्रेड टैरिफ नीतियां (Trade Tariff Policies) भारतीय एक्सपोर्ट, खासकर टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग गुड्स को प्रभावित कर रही हैं। हालांकि, FY26 के पहले नौ महीनों में भारत का कुल ट्रेड डेफिसिट पिछले साल के $36.6 बिलियन से घटकर $30.1 बिलियन रहा, जो सर्विसेज सरप्लस के कारण संभव हुआ। ICRA के अनुसार, FY26 के लिए CAD का अनुमान 0.6-0.7% जीडीपी (GDP) के आसपास है, जबकि कुछ अन्य रिपोर्ट्स इसे 1.7% तक भी बढ़ने का अनुमान लगा रही हैं।

फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व्स और रुपये की चाल

अच्छी बात यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व्स (Foreign Exchange Reserves) काफी मजबूत है, जो 11 महीने के इम्पोर्ट के बराबर है और बाहरी कर्ज का 95% कवर करता है। यह झटकों से निपटने में मददगार है। हालांकि, फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) के आउटफ्लो में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और मार्च 2026 तक भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 91.55 के आसपास रहा, जिसके और कमजोर होने के अनुमान हैं।

भू-राजनीतिक अस्थिरता और कैपिटल आउटफ्लो

वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता, खासकर पश्चिम एशिया में संघर्ष, भारत के आर्थिक दृष्टिकोण के लिए एक बड़ा जोखिम है। इससे न सिर्फ तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, बल्कि शिपिंग रूट बाधित होने से माल ढुलाई और बीमा लागत भी बढ़ सकती है। इससे CAD बढ़ने के साथ-साथ रुपये पर दबाव और FPI आउटफ्लो का खतरा बढ़ेगा। भारत का कैपिटल अकाउंट (Capital Account) पहले से ही FPI आउटफ्लो और घटते नेट एफडीआई (FDI) के चलते दबाव में है।

आगे का रास्ता: चुनौतियों के बीच उम्मीद

आगे चलकर, ICRA का अनुमान है कि Q4 FY26 में CAD -$1.0 बिलियन से +$1.0 बिलियन के बीच रह सकता है। पूरे FY26 के लिए CAD 0.6-0.7% जीडीपी (GDP) रहने की उम्मीद है, और FY27 में यह लगभग 1% तक बढ़ सकता है। इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) के अनुसार, FY27 में जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.5% के बीच रहने का अनुमान है। लेकिन, लगातार भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोत्तरी और वैश्विक व्यापार में संभावित रुकावटें इन अनुमानों के लिए बड़ा डाउनसाइड रिस्क (Downside Risk) हैं। भारत के सर्विसेज सेक्टर की मजबूती और फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व्स (Foreign Exchange Reserves) अभी भी बचाव के प्रमुख कारक हैं, लेकिन बाहरी माहौल पर कड़ी नजर रखना जरूरी है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.