सरकार ने अपने बजट 2026 में एक बड़ा कदम उठाते हुए नई टैक्स एक्ट, 2025 का प्रस्ताव दिया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। यह नई एक्ट, 1961 के इनकम टैक्स एक्ट को पूरी तरह से बदल देगी। 600 से ज़्यादा पन्नों की इस विस्तृत योजना का मकसद डायरेक्ट टैक्स ढांचे को बेहद सरल बनाना, टैक्सपेयर्स के लिए इसे समझना आसान करना और प्रशासनिक जटिलताओं को कम करना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के मुख्य स्तंभों - स्थिरता, सरलता और टैक्सपेयर-केंद्रित उपायों पर ज़ोर दिया, ताकि बार-बार होने वाले नीतिगत बदलावों से बचा जा सके।
नई रिजीम की ओर बढ़ता झुकाव
हाल के फाइनेंशियल इयर्स में, सरकार पर्सनल टैक्सेशन को सरल बनाने की ओर बढ़ रही है, जिसमें कम दरों और अनुमानित नतीजों पर ज़ोर है। बजट 2026 इसी राह को और मज़बूत करता है। अब नई टैक्स रिजीम आमदनी के ज़्यादा बड़े स्लैब, बढ़ी हुई छूट (rebates) और स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ मध्यम-आय वर्ग के लिए काफी आकर्षक बन गई है। कई लोगों के लिए टैक्स देनदारी या तो काफी कम हो जाएगी या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। ₹2 करोड़ से ज़्यादा कमाने वाले हाई-इनकम वाले लोगों के लिए, नई रिजीम में सरचार्ज को 25% पर सीमित कर दिया गया है, जिससे प्रभावी टैक्स दर करीब 39% हो जाती है। वहीं, पुरानी रिजीम में यह दर 42% से ऊपर जा सकती है।
पुरानी रिजीम का अब भी महत्व
हालांकि नई टैक्स प्रणाली की लोकप्रियता बढ़ रही है, फिर भी मौजूदा इनकम टैक्स एक्ट, 1961 वाली पुरानी टैक्स रिजीम को बरकरार रखा गया है। यह दोहरे विकल्प वाली व्यवस्था (dual-option approach) इस बात को स्वीकार करती है कि बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स अभी भी होम लोन, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और लॉन्ग-टर्म सेविंग्स जैसे वित्तीय साधनों से जुड़े डिडक्शन का फायदा उठा रहे हैं। पिछले फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में फाइल किए गए 7.28 करोड़ इनकम टैक्स रिटर्न्स (ITRs) में से लगभग 72% यानी 5.27 करोड़ लोगों ने नई रिजीम को चुना, जबकि बाकी 2.01 करोड़ (लगभग 28%) ने पुरानी रिजीम को ही जारी रखा।
विशेष राहत और अनुपालन पर जोर
बजट 2026 में वित्तीय बोझ को कम करने और स्वेच्छा से नियमों का पालन करने को बढ़ावा देने के लिए कुछ खास उपाय भी किए गए हैं। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा और मेडिकल खर्चों के लिए विदेश में पैसे भेजने पर लगने वाले टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) की दर को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। इससे परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा, एक छह महीने की कम्प्लायंस विंडो (compliance window) भी खोली गई है। यह पहल उन लोगों को मौका देगी, खासकर छात्र, युवा पेशेवर या हाल ही में विदेश गए लोग, जिन्होंने अनजाने में अपनी आय का खुलासा नहीं किया हो। ऐसी अघोषित आय पर 30% की दर से टैक्स लगेगा और कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। यह सरकार के सज़ा देने के बजाय स्वेच्छा से नियमों का पालन कराने पर ज़ोर देने का संकेत है।
नीतिगत स्थिरता - एक मुख्य सिद्धांत
बजट 2026 का एक अहम हिस्सा नीतिगत स्थिरता (policy continuity) के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता है। पिछले बजटों में कैपिटल गेंस टैक्सेशन और टैक्स स्लैब में किए गए बड़े सुधारों के बाद, इस साल स्थिरता पर ध्यान देना यह स्पष्ट करता है कि टैक्सपेयर्स अब अपने वित्तीय भविष्य की योजना निश्चितता के साथ बना सकते हैं। बार-बार होने वाले विधायी बदलावों का असर कम होगा। यह अनुमानित टैक्स नीति सीधे टैक्स राहत जितनी ही महत्वपूर्ण है, जिससे एक संतुलित वित्तीय माहौल को बढ़ावा मिलेगा।