Budget 2026 में भारत की आर्थिक प्राथमिकताओं में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव देखने को मिला है। सरकार ने ग्रामीण-आधारित विकास की राह से हटकर अब मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया है। इस नई रणनीति का मुख्य लक्ष्य देश की प्रोडक्टिविटी, इंडस्ट्रियल कैपेसिटी और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ाना है।
मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का बूस्ट
सरकार मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विस, टेक्सटाइल और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों को खास सपोर्ट देगी। भारत के बढ़ते हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) भी एक्सपोर्ट और सप्लाई-चेन के अवसरों को मजबूत करेंगे। साथ ही, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बड़ा फोकस है। इसमें डेटा सेंटर और टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल करते हुए एक नेशनल डिजिटल हाईवे का विकास किया जाएगा। सरकार ने India Semiconductor Mission (ISM) 2.0 और Biopharma SHAKTI जैसी पहलें भी शुरू की हैं, जो एडवांस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। भारत को एक ग्लोबल डिजिटल हब बनाने के लिए, जो विदेशी क्लाउड प्रोवाइडर भारत में डेटा सेंटर स्थापित करेंगे, उन्हें 2047 तक टैक्स हॉलिडे (Tax Holiday) का लाभ मिलेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर
इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (Public Capital Expenditure) इस बजट का एक अहम हिस्सा है। FY2026-27 के लिए ₹12.2 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर का अनुमान लगाया गया है। यह डिफेंस, रेलवे और सड़कों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश के ज़रिए इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित ग्रोथ को बढ़ावा देने की सरकार की मंशा को दिखाता है। यह निवेश इकोनॉमिक इंटीग्रेशन और गुड्स एंड सर्विसेज की आवाजाही को आसान बनाने के लिए बहुत ज़रूरी है।
STT Hike पर मार्केट की प्रतिक्रिया
इस बजट के ऐलान के तुरंत बाद बाजार में कुछ हलचल देखी गई, खासकर फ्यूचर और ऑप्शन (F&O) पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में हुई बढ़ोतरी के कारण। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने फ्यूचर पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शन ट्रांजैक्शन पर 0.01% से बढ़ाकर 0.15% करने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम से सरकार को ₹20,000 से ₹25,000 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू मिलने का अनुमान है। इस ऐलान के बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई, और Nifty 50 इंडेक्स में 1.35% की कमी दर्ज की गई। सरकार का कहना है कि इस बढ़ोतरी का मकसद स्पेकुलेटिव एक्टिविटी को रोकना है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इससे ट्रेडिंग वॉल्यूम और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर (FPI) के फ्लो पर अल्पकालिक असर पड़ सकता है।
निवेशकों की पोजीशनिंग और आउटलुक
हालांकि, STT hike से आई छोटी-मोटी गिरावट के बावजूद, कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gains Tax) में कोई प्रतिकूल बदलाव न होने से निवेशकों की भावनाएं काफी हद तक राहत भरी हैं। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि निवेशकों को मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश के अवसर तलाशने चाहिए। इसके अलावा, फार्मा और हॉस्पिटैलिटी (मेडिकल टूरिज्म के कारण) के साथ-साथ रियल एस्टेट और पावर सेक्टर भी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करने वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। यह बजट लंबी अवधि की पॉलिसी कंटिन्यूटी और स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स पर ज़ोर देता है, जो बाजार को स्थिरता प्रदान कर सकता है। साथ ही, डोमेस्टिक लिक्विडिटी सपोर्ट (Domestic Liquidity Support) मॉनेटरी ऑपरेशन्स के ज़रिए जारी रहेगा।